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OPINION: BJP के लिए इतने जरूरी क्यों हैं अमित शाह?

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 3:45 PM IST
OPINION: BJP के लिए इतने जरूरी क्यों हैं अमित शाह?
2014 में पहली बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद अमित शाह को जुलाई 2014 में बीजेपी अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी

2014 में पहली बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद अमित शाह (Amit Shah) को जुलाई 2014 में बीजेपी अध्यक्ष ( president of Bharatiya Janata Party) की कमान सौंपी गई थी. इस पद को संभालने के बाद से शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने वो ऊंचाइयां हासिल की हैं, जिसके सामने विपक्ष कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 3:45 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष  (president of Bharatiya Janata Party) अमित शाह (Amit Shah) आज (22 अक्टूबर) 55 साल के हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं देते हुए लिखा, 'कर्मठ, अनुभवी, कुशल संगठनकर्ता एवं मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अमित शाह जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं. सरकार में बहुमूल्य भूमिका निभाने के साथ ही वो भारत को सशक्त और सुरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. ईश्वर उन्हें दीर्घायु करे और सदा स्वस्थ रखे.' पीएम की शुभकामनाएं ये साबित करती हैं कि उनकी सरकार और पार्टी के लिए अमित शाह कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

2014 में पहली बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद अमित शाह को जुलाई 2014 में बीजेपी अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी. इस पद को संभालने के बाद से शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने वो ऊंचाइयां हासिल की हैं, जिसके सामने विपक्ष कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. अमित शाह के अध्यक्ष रहते बीजेपी ने केंद्र में ना केवल दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, बल्कि उन राज्यों की सत्ता भी हासिल की, जहां बीजेपी का कभी खाता नहीं खुलता था. इन सबके बावजूद अमित शाह अक्सर कहते हैं कि बीजेपी का स्वर्णिम काल अभी आना बाकी है. यानी उन्होंने पार्टी के लिए इससे भी ज्यादा विस्तार सोच रखा है.

शाह ने कश्मीर के लिए किए ऐतिहासिक ऐलान
इस साल लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अमित शाह को अपने मंत्रिमंडल में बतौर गृहमंत्री शामिल किया, तो शायद किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वो क्या सोच रहे हैं. लेकिन, 5 अगस्त को इसका खुलासा हुआ, जब संसद में गृहमंत्री के तौर पर अमित शाह ने अनुच्छेद 370 और 35 (ए) के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. अचानक हुए इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की किसी को भनक तक नहीं थी, मगर गृहमंत्री के तौर पर अमित शाह की तैयारी पुरजोर थी.

संसद से प्रस्ताव पारित कराने के साथ ही आशंकाएं उठने लगीं कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति बिगड़ सकती है. अलगाववादी और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी सिर उठा सकते हैं. राज्य में स्थिति बिगाड़ सकते हैं, लेकिन ऐसी सारी आशंकाएं पूरी तरह से गलत साबित हुईं. सरकार ने ना सिर्फ राज्य में बड़े पैमाने पर अमन-चैन बनाए रखने में सफलता हासिल की, बल्कि इस बीच पाकिस्तान से होने वाली किसी भी नापाक हरकत का पूरी मजबूती के साथ जवाब भी दिया.

70 साल से देश में 370 और 35 (ए) को लेकर बहस चलती थी, लेकिन किसी को भनक नहीं लगी कि सरकार इतने आराम से इसे हटा देगी. ये अमित शाह की राजनीतिक चतुराई थी कि सरकार ने संसद के जरिए इस प्रस्ताव को पारित कराया. वहीं, सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से राज्य में कानून व्यवस्था सुनिश्चित भी की.


AMIT SHAH
अमित शाह को जुलाई 2014 में बीजेपी अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी.

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मोदी-शाह की जोड़ी ने बीजेपी को दिया एक नया मुकाम
पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने बीजेपी को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां से उनके राजनीतिक विरोधी बौने नजर आते हैं. नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और अमित शाह की संगठन चलाने की क्षमता, दोनों के मिलने से बीजेपी की चुनौतियां अक्सर अवसरों में बदल जाती हैं. संगठन और बीजेपी की विचारधारा को बढ़ाने की दिशा में जिस तरह से अमित शाह ने काम किया है, वो अभूतपूर्व है. चाहे 2019 का लोकसभा चुनाव हो या फिर हरियाणा और महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव. एक बारगी ऐसा नहीं लगा कि विपक्ष कहीं भी बीजेपी को चुनौती दे रहा हो.

अमित शाह को आज बीजेपी का सफलतम अध्यक्ष कहा जाता है. उनके नेतृत्व में ना केवल बीजेपी को केंद्र और राज्यों में सरकारें बनाने में सफलता मिली, बल्कि पार्टी ने संगठन के तौर पर भी बड़ा विस्तार करते हुए 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को पार्टी के साथ सीधे तौर पर जोड़ा.


पूर्वोत्तर में भी खिलाया कमल
2014 में जब नरेंद्र मोदी पीएम बने, तो उससे पहले तक बीजेपी को उत्तर भारत की हिंदी पट्टी की पार्टी कहा जाता था, लेकिन इस जोड़ी ने देखते ही देखते पूर्वोत्तर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया. 2019 के चुनाव नतीजों ने पार्टी को पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी बना दिया, जहां कभी बीजेपी का खाता तक नहीं खुलता था.

हालांकि, अमित शाह इतने भर से संतुष्ट नहीं हैं. पार्टी पूरा जोर लगाकर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लिए संघर्ष कर रही है. साथ ही दक्षिण भारत के उन राज्यों पर भी पार्टी की नजर है, जहां अब तक बीजेपी का झंडा नहीं दिखाई देता है. अगले कुछ महीनों में बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा. जाहिर है कि ऐसे में नए अध्यक्ष के लिए अमित शाह की रफ्तार को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी रहेगी.

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First published: October 22, 2019, 3:15 PM IST
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