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Opinion: मोदी सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा की जगह बेकार मुद्दे क्योंं खड़ा कर रहा है विपक्ष

Opinion: मोदी सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा की जगह बेकार मुद्दे क्योंं खड़ा कर रहा है विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

पीएम मोदी द्वारा वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के दावोस एजेंडे को वर्चुअल संबोधन के दौरान हुई घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर टेलीप्रॉम्पटर में ख़राबी आई भी तो क्या इस मसले को बहस का मुद्दा बनाया जा सकता है? क्या इस मसले के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा जा सकता है?

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गत सोमवार 18 जनवरी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के दावोस एजेंडे को वर्चुअल संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के सामने लगा टेलीप्रॉम्पटर रुका या नहीं रुका, यह बात की बात है। पहली बात तो यह है कि अगर टेलीप्रॉम्पटर में ख़राबी आई भी, तो क्या इस मसले को बहस का मुद्दा बनाया जा सकता है? क्या इस मसले के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा जा सकता है? मोदी, जिनकी भाषण कला का जवाब विपक्ष के पास एक प्रतिशत भी नहीं है, उनका भाषण सिर्फ़ टेलीप्रॉम्पटर के रुक जाने से रुक गया हो, क्या यह संभव लगता है? क्या कोई भी समझदार व्यक्ति यह सोच सकता है? जी नहीं!

वैसे तो भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि टेलीप्रॉम्पटर में कोई बड़ी तकनीकी ख़राबी नहीं थी। मोदी हिंदी में भाषण कर रहे थे, जिसका अंग्रेज़ी इंटरप्रेटेशन साथ-साथ होना था। मोदी बोलने लगे, लेकिन अंग्रेज़ी इंटरप्रेटर की आवाज़ सुनाई नहीं दी, तो विश्व आर्थिक मंच के दावोस एजेंडे के आयोजकों ने तकनीकी टीम को संदेश दिया और वहां से सूचना आने के बाद मोदी ने भाषण रोक दिया और आयोजको से पूछा भी कि क्या उनकी आवाज़ सुनाई दे रही है… इसके तुरंत बाद तकनीकी तारतम्य पूरी तरह जुड़ जाने के पर उनका भाषण दोबारा शुरू हो गया। बीजेपी के कई नेताओं ने कांग्रेस की छोटी सी क्लिप के जवाब में पूरा भाषण ही डिजिटल मीडिया पर डाल दिया है, जिसे सुन कर असलियत अच्छी तरह समझी जा सकती है.

इतने पर ही कांग्रेस मोदी का मज़ाक उड़ाने लगी। पार्टी ने ‘टेलीप्रॉम्पटर पीएम हैशटैग के साथ ट्वीट किया कि ‘अच्छा चलता हूं, दुआओं में याद रखना।’ एक और ट्वीट में कांग्रेस ने लिखा, ‘हमें तो टेलीप्रॉम्प्टर ने लूटा, अपनों में कहां दम था।’ पार्टी ने तो ट्वीट किया ही, मोदी फ़ोबिया में डूबे पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी लिखा कि ‘इतना झूठ टेलीप्रॉम्पटर भी नहीं झेल पाया।’ सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और राहुल गांधी इतना भी नहीं समझते कि इंटरनेट से संचार के दौरान तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है.

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि वैश्विक मंचों पर दिए जाने वाले औपचारिक भाषण आमतौर पर पहले से ही लिखे होते हैं, यह छोटी सी बात देश पर 55 साल से ज़्यादा शासन करने वाली पार्टी को क्या समझ में नहीं आती? भाषण पहले काग़ज़ से देख कर पढ़े जाते थे, लेकिन अब तकनीक के युग में टेलीप्रॉम्पटर जैसी सुविधा है, जिस पर चेहरा कैमरे की ओर रख कर भाषण पढ़ा जा सकता है। जो लोग टीवी न्यूज़ चैनलों में काम करते हैं, उन्हें यह बात अच्छी तरह पता होगी। हां, वैश्विक मंचों पर या विदेश दौरों के दौरान प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान नेता तय दायरे में बात अपने आप रखते हैं। लेकिन औपचारिक भाषण पहले से ही लिखे होते हैं, ताकि एकाध शब्द भी इधर से उधर होने न पाए और देश की नीति का कहीं से भी अहित न हो।
तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर वर्चुअल माध्यम से हो रही किसी बैठक के दौरान वक्ता की आवाज़ आनी ही बंद हो जाएगी और उसे इस बात की जानकारी मिलेगी, तो भी क्या वह बोलना जारी रखेगा? कोविड काल में कांग्रेस भी वर्चुअल बैठकें करती होगी। हो सकता है कि राहुल गांधी या कांग्रेस के दूसरे नेता अपनी आवाज़ दूसरों को सुनाई नहीं देने की सूरत में भी बोलते रहते होंगे, तभी उन्होंने मोदी के भाषण रुकने का मज़ाक उड़ाया है। नहीं तो उन्हें सामान्य बुद्धि से यह बात समझ लेनी चाहिए थी.

क्या हमें वैश्विक मंच पर बात रखने के दौरान हुई किसी छोटी सी तकनीकी चूक को लेकर अपने ही देश के प्रधानमंत्री का मख़ौल उड़ाना शोभा देता है? मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर विश्व आर्थिक मंच से मुख़ातिब थे। वे भारतीय जनता पार्टी के किसी जलसे में नहीं बोल रहे थे। ठीक है देश में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की गहमा-गहमी जारी है। लेकिन किसी भी बात को तूल देने से पहले क्या अपने देश के प्रधानमंत्री का मज़ाक इस तरह उड़ाना उचित है? क्या यह कहीं से भी चुनावी मुद्दो हो सकता है?

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मसले पर मात्र इसलिए अपनी बात सार्वजनिक करनी चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण बीच में रोक देने का मूर्खतापूर्ण आरोप किसी पार्टी या किसी नेता ने लगाया है और कहने की कोशिश की गई है कि मोदी बिना टेलीप्रॉम्पटर के कुछ बोल ही नहीं सकते? जब पार्टी की तरफ़ से सही बात रख दी गई है, तब पीएमओ को ऐसे आरोप का खंडन क्यों करना चाहिए, जिसका कोई सिर-पैर है ही नहीं। असल में तो यह कोई मुद्दा है ही नहीं.

बेकार मुद्दे क्यों खड़े कर रहा है विपक्ष?
हो सके तो विपक्ष को नई और बड़ी लकीर खींचनी चाहिए। पिछले साढ़े सात साल में मोदी की लकीर आप एक इंच भी नहीं मिटा पाए हैं। आप 24 घंटे अगर मोदी को सिर पर रख कर घूमते रहेंगे, तो उनका नुकसान नहीं, भला ही करेंगे। जैसा कि अभी तक आपने किया है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी छोटी सी बात पर मोदी पर चुटकी ले कौन रहा है। राहुल गांधी! यह अपने आप में हास्यास्पद है। मोदी और राहुल के भाषण सुनने वालों के मन में यह वाक़या गुदगुदी कर सकता है.
चाहे सोने और आलू को जोड़ने वाला राहुल का बयान हो या राफैल युद्धक विमान की अलग-अलग क़ीमतों वाले कई बयान, राहुल गांधी बहुत बार यह साबित कर चुके हैं भाषण देने में उन्हें उतनी महारत हासिल नहीं है, जितनी मोदी को है। इसलिए, कृपया बेकार की बातों को मुद्दा मत बनाइए। असल मुद्दों पर अपने एजेंडे पर ज़ोर लगाइए, तो कुछ भला हो भी सकता है।

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Narendra modi, Opposition, PM Modi, Pm narendra modi

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