OPINION: नवीन पटनायक को लेकर क्यों बदल गए BJP के सुर

पटनायक ने इन चीजों पर खुद कुछ भी नहीं कहते हैं. लेकिन बीजेडी के प्रवक्ता और राज्यसभा के सदस्य प्रताप केधारी देव ने बुधवार को कहा कि ऐसे समय में इस तरह की बातचीत होती रहती है

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Updated: May 22, 2019, 4:53 PM IST
OPINION: नवीन पटनायक को लेकर क्यों बदल गए BJP के सुर
नवीन पटनायक (फ़ाइल फोटो)
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Updated: May 22, 2019, 4:53 PM IST
(संदीप साहू)

ओडिशा में पिछले महीने बीजेपी के कार्यकर्ता की कथित तौर पर बीजू जनता दल के लोगों ने हत्या कर दी थी. दो दिन बाद यानी 16 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने भुवनेश्वर में एक रैली में कहा था कि गुंडों से डरने की जरूरत नहीं है और ओडिशा से गुंडाराज खत्म कर दिया जाएगा.



एक महीने बाद यानी 15 मई को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ओडिशा और बंगाल की सरकारों की तुलना की. उन्होंने कहा कि हिंसा सिर्फ ममता के राज्य में होती है जबकि नवीन पटनायक के यहां ऐसा कुछ नहीं होता.

पिछले एक महीने में बीजेपी और बीजेडी के बीच रिश्ते बदल गए हैं. गुंडाराज को बढ़ावा देने वाले पटनायक अब बीजेपी के लिए अहिंसा के प्रतीक बन गए हैं. आखिर क्यों बीजेपी के रूख में ऐसा बदलाव आ रहा है ये बताने की जरूरत नहीं है. दरअसल बीजेपी चाह रही है कि 23 मई को नतीजे आने के बाद बीजेडी के सुप्रीमो नवीन पटनायक उनके खेमे में बने रहे.

दोनों दलों के रिश्तों में फानी तूफान ने नजदीकियां ला दी. दरअसल पीएम मोदी ने तूफान से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए ओडिशा का एरियल सर्वे किया. इसके बाद पीएम मोदी ने पटनायक की जम कर तारीफ की थी. बाद में पटनायक ने भी केंद्र से मिले मदद को लेकर पीएम को सराहा था.

इस बीच बता दें कि कांग्रेस भी शांत नहीं बैठी है. उन्होंने भी पटनायक को अपने खेमे में लाने की कोशिशें शुरू कर दी है. यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पटनायक को दिल्ली में 23 मई को एक बैठक के लिए न्योता भेजा है. इसके अलावा पटनायक और उनके दोस्त कमलनाथ के बीच भी लंबी बातचीत हुई है.

पटनाक ने इन चीजों पर खुद कुछ भी नहीं कहते हैं. लेकिन बीजेडी के प्रवक्ता और राज्यसभा के सदस्य प्रताप केधारी देव ने बुधवार को कहा कि ऐसे समय में इस तरह की बातचीत होती रहती है. हालांकि उन्होंने इस बात के कोई संकते नहीं दिए कि वो किस खेमे में जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक पटनायक खुद सोनिया गांधी की बैठक में नहीं जाएंगे लेकिन वो पार्टी से किसी को भेज सकते हैं.
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पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान नवीन पटनायक ने कहा था, ''बीजेडी उनके साथ हाथ मिलाएगी जो ओडिशा को सबसे अच्छी डील देगा. यानी केंद्र की राजनीति में पटनायक का कोई फेवरेट नहीं है. वो विचारधारा के बदले अपने लिए फायदे की बात सोच रहे हैं.

उधर तीसरे मोर्चे की भी बात चल रही है. टीआरएस के प्रमुख केसीआर और टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी भी चाह रही हैं कि पटनायक उनके खेमे में आ जाए. हालांकि पिछले एक साल के दौरान पटनायक और केसीआर के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.

पटनायक नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं. इसके बाद ही वो ये फैसला लेंगे कि तीनों खेमों में से वो किसके साथ हाथ मिलाएंगे. उन्होंने पहले ही कह दिया है कि उनकी कोई राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं नहीं है. लेकिन जिस तरह से उम्मीद की जा रही है कि उनकी पार्टी कई सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है ऐसे में पटनायक किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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