Opinion : आवश्यकता है पूरी सावधानी और मर्यादा के साथ अपना काम पूरा करने की

Opinion : आवश्यकता है पूरी सावधानी और मर्यादा के साथ अपना काम पूरा करने की
राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन प्रस्तावित है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन में 200 घंटे से अथक की ऐतिहासिक मैराथन सुनवाई ने आखिरकार जन्मभूमि को मुक्त करते हुए अपना ऐतिहासिक निर्णय सुना ही दीया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 24, 2020, 12:43 PM IST
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(विनोद बंसल)

सन् 1528 से लेकर आज तक भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ने असंख्य उतार-चढ़ाव देखे हैं. एक ओर उसने वह असहनीय दर्द सहा जब भव्य तथा विशाल मंदिर को धूल धूसरित कर अपने सत्ता मद में चूर एक विदेशी आक्रान्ता ने भारत की आस्था को कुचलकर देश के स्वाभिमान की नशृंस हत्या का दुस्साहस किया. तो वहीं, 6 दिसंबर 1992 का वह दृश्य भी देखा जब लाखों राम भक्तों ने ढांचे को कुछ घंटों में ढहा दिया. समूचे विश्व ने वह दृश्य लाइव देखा.

इन दो घटनाओं के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण दिवस श्री राम जन्म भूमि के लिए आया तो वह था 2019 का नौ नवम्बर. अर्थात वह पावन तिथि जब भारत के इतिहास में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय खण्ड-पीठ के माननीय न्यायाधीशों ने सर्व सम्मति से एक ऐसा निर्णय दिया जिसे सम्पूर्ण विश्व ने अपनी धड़कती हुई सांसों को थाम कर लाइव सुना, सुनाया, चर्चाएं कीं और सर्व सम्मति से एकाकार होकर अंगीकार किया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितम्बर 2010 के निर्णय के विरुद्ध अपीलें तो सभी पक्षों ने 2011 के प्रारम्भ में ही दायर कर दी थीं किन्तु, उसके बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय की लगभग 8 वर्षों की चुप्पी ने देश को अधीर कर दिया. किन्तु, माननीय उच्चतम न्यायालय की दो सौ दिनों की मैराथन सुनवाई अंततोगत्वा परिणाम भी ले आई.



लगभग 500 वर्षों के सतत संघर्ष में कभी पूजा-पाठ हुआ तो कभी सिर्फ जन्म भूमि वंदन, कभी गम्भीर शाांति रही तो कभी जबरदस्त संघर्ष. किन्तु इस सबके बीच यदि कुछ जस का तस था तो वह था जन्मभूमि से गहरा लगाव व समर्पण. वैसे भी हिन्दू परम्परा में स्थान देवता का बड़ा महत्व है. भारत की स्वतंत्रता के उपरांत श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के लिए हुए आन्दोलन के विभिन्न चरणों में लगभग 16.5 करोड़ लोगों की सहभागिता ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा शाांतिपूर्ण व अनुशासित जन-आन्दोलन बना दिया.
दिसम्बर 2017 में प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने जब पहली बार सुनवाई का मन बनाया तो कई पक्षों ने राम द्रोह के नए-नए प्रपंच रच कर सुनवाई को अटकाने, भटकाने व लटकाने की नई नई चालें चलीं. इसे सम्पूर्ण विश्व ने देखा. कभी दो वर्ष बाद होने वाले आम चुनावों का हवाला तो कभी सुनवाई से देश का माहौल खराब होने की बात, कभी न्यायाधीशों की पीठ की संख्या पर प्रश्न तो कभी मुख्य न्यायाधीश की सेवा निवृत्ति की तिथि का बहाना, कभी उच्च न्यायालय के दस्तावेजों के अंग्रेजी अनुवाद का बहाना तो कभी उसकी विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिह्न, कभी पूर्व कानून मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल व उनके सहयोगी वरिष्ठ वकीलों द्वारा भरे कोर्ट रूम में चीख-चिल्लाहट व बहिष्कार की धमकी तो कभी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने का मामला, भारत के न्यायिक इतिहास में सब कुछ पहली बार देखने को मिला.

खैर! 40 दिन में 200 घंटे से अथक की ऐतिहासिक मैराथन सुनवाई ने आखिरकार जन्मभूमि को मुक्त करते हुए अपना ऐतिहासिक निर्णय सुना ही दीया. केंद्र सरकार की पहल पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई सुनवाई में आई अनेक बाधाओं को राम-भक्त वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन की टोली, चम्पत राय के कुशल मार्ग दर्शन व राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक-एक कर हटाया गया. निर्णय से पूर्व, पूज्य संतों, पूजनीय सरसंघचालक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विश्व हिन्दू परिषद कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार के साथ अनेक विद्वानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों की देश में शान्ति व व्यवस्था की गम्भीर अपील ने निर्णयोपरांत के उपद्रव की सम्भावनाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया. इस दौरान अनेक बार योगी आदित्यनाथ का अयोध्या प्रवास, उसके विकास का खाका तथा संतों व श्रद्धालुओं के साथ सभी पक्षकारों में व्यवस्था के प्रति विश्वास की पुनरस्थापना ने भी बड़ा कार्य किया. देश-विदेश में फैले राम भक्तों के संकल्प और उनके अथक विविध प्रकार के प्रयासों ने भी देश की इस जटिल समस्या के समाधान की ओर आगे बढ़ने में कोई कम भूमिका नहीं निभाई.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आहवान पर, सभी राम भक्तों के सहयोग व योगदान से मंदिर निर्माण के पुनीत कार्य के श्री गणेश की पावन बेला भी अब सन्निकट है. प्रत्येक रामभक्त अब इस प्रतीक्षा में है कि कोरोना संकट के इस काल में उसे राम जी क्या काम सौंपते हैं. जिस जन्मभूमि की मुक्ति हेतु जिन्होंने तन-मन-धन के साथ पूरा जीवन लगा दिया, उस पर बनने वाले विराट भव्य मंदिर के भूमि पूजन के स्वर्णिम बेला को स्वनेत्रों से निहारने की उत्कंठा बार बार मन में हिलोरें मार रही है. अब सभी राम भक्त तैयार रहें. सबके लिए कुछ ना कुछ राम काज आने ही वाला है. कोरोना संकट भला हमें अपने आराध्य देव के दर्शन के अधिकार से वंचित कैसे कर सकता है. हां! दर्शन का माध्यम बदल सकता है. आवश्यकता इस बात की है कि इससे सम्बंधित सभी सावधानियों का पूर्णता से पालन करते हुए हमारे लिए जो भी करणीय कार्य हैं, हम वह सब मर्यादापूर्वक करेंगे. जय श्रीराम!!

(लेखक विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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