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OPINION: कृषि कानूनों को वापस लेना एक राजनीतिक कदम नहीं है, आखिर क्यों ?

OPINION: कृषि कानूनों को वापस लेना एक राजनीतिक कदम नहीं है, आखिर क्यों ?

बीजेपी ने भी 20 सितंबर 2020 को इन कानूनों के पास होने बाद कई चुनाव जीते हैं.(फाइल फोटो)

बीजेपी ने भी 20 सितंबर 2020 को इन कानूनों के पास होने बाद कई चुनाव जीते हैं.(फाइल फोटो)

Agricultural Laws,Krishi kanoon,Farmer Protest: फरवरी 2021 को हुए 6 नगर निगम के चुनावों में बीजेपी ने पिछले 2 दशाओं का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था . सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, भावनगर की कुल 576 सेवाओं में 483 सीटें यानी 84% बीजेपी ने जीतीं. जबकि 2015 को हू चुनावों में इन्हें 68% सीटें मिलीं थी. चुनाव में बीजेपी की जीत का सिलसिला जारी रहा. October 2021 को हुए पंचायत और नगर निगम.चुनावों में भी बीजेपी ने सफलता के झंडे गाड़े.

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नई दिल्ली:  पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया कि आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार कृषि कानूनों (Agricultural Laws) को वापस लेने का काम करेगी. लेकिन, पीएम मोदी (PM Narendra Modi) और उनकी सरकार की इस किसानों का हित सामने रखने वाली मंशा को राजनीतिक दलों ने बीजेपी सरकार का उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रख लिया हुआ फैसला बता कर एक बहस छेड़ दी. लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने भी 20 सितंबर 2020 को इन कानूनों के पास होने बाद कई चुनाव जीते हैं.

असम (Assam)- मई 2021 में हुए विधान सभा चुनावों में बीजेपी ने 93 seat पर चुनाव लड़ा था जिनमे से 60 पर वो जीते थे. खास बात ये कि 2011 की जनगणना के मुताबिक असम.की 86% आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. और सिर्फ 14% लोग शहरी इलाकों में रहते हैं.

पश्चिम बंगाल (West Bengal)- मई 2021 में हुए विधान सभा चुनावों में बीजेपी को 77 में जीत हासिल हुई थी. जबकि वो 291 सेवाओं पर चुनाव लड़ी थी. जबकि 2016 में बंगाल में ही बीजेपी को 291 में लड़ कर सिर्फ 3 सेवाओं पर जीत हासिल. हुई थी .

पुडुचेरी (Puducherry)- मई 2021 के चुनावों में बीजेपी पहली बार yahan की सरकारों का हिस्सा बनी. इन्हें 9 पर लड़ कर 6 विधान सभा सीट पर जीत हाथ लगी. जबकि कॉंग्रेस ने 14 सीटें लड़ी और सिर्फ 2 जीतीं.

इस के अलावे देश भर में जितने भी चुनाव हुए जिसमें उप चुनाव, स्थानीय निकायों, पंचायत स्तर के चुनाव शामिल हैं , उनमे बीजेपी को लगातार जीत ही मिलती रही है.

यह भी पढ़ें- वरुण गांधी की पीएम मोदी से मांग- MSP पर बने कानून, ‘शहीद’ किसानों को मिले 1 करोड़ का मुआवजा

गुजरात (Gujarat)- फरवरी 2021 को हुए 6 नगर निगम के चुनावों में बीजेपी ने पिछले 2 दशाओं का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था . सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, भावनगर की कुल 576 सेवाओं में 483 सीटें यानी 84% बीजेपी ने जीतीं. जबकि 2015 को हू चुनावों में इन्हें 68% सीटें मिलीं थी. चुनाव में बीजेपी की जीत का सिलसिला जारी रहा. October 2021 को हुए पंचायत और नगर निगम.चुनावों में भी बीजेपी ने सफलता के झंडे गाड़े. गांधीनगर नगर निगम चुनावों में 44 में से 41 पर जीत हांसिल की .

टीआरएस को हराकर बीजेपी ने जीती सीट
उप चुनावों में जीत के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत के अध्यक्षों के चुनावों में जबरदस्त स्वीप किया. जुलाई 2021 में हुए इन चुनावों में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों ने 75 में से 67 जीतीं और इन 67 में से 21 सीटों पर बीजेपी बिना किसी विरोध के जीती. महाराष्ट्र के पंढरपुर मंगल विधा सीट पर हुए उप चुनावो में बीजेपी जीती तो असम के उप चुनावों में बीजेपी और उसकी सहयोगी दलों ने सभी 5 सीटें जीत ली . तेलंगाना विधान सभा उप चुनाव में सत्तारुढ़ टीआरएस को हरा कर बीजेपी ने सीट जीती. मध्य प्रदेश में आदिवासी रिजर्व सीट बीजेपी ने जीत ली तो कर्नाटक की सिंधगी सीट भी बीजेपी न जीती.

डीडीसी चुनाव में मिली जीत
बीजेपी को सफलता जम्मू कश्मीर के पहले डीडीसी चुनावों में मिली . दिसम्बर 2020 में हुए चुनावों में बीजेपी अकेली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. जबकि वहाँ की गपकार गढ़बंधन ने 112 सीटें जीती.
असम के Autonomous Council चुनावों में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की . दक्षिण में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में बीजेपी ने 48 सीटें जीती. जबकि टीआरएस ने 55 और ओवैसी की पार्टी को 44 सीटें मिलीं. बोडोलैंड Territorial Council के चुनावों में एनडीए को बहुमत मिला. लद्दाख काउंसिल के चुनावों में बीजेपी ने 26 में से 15 क्षेत्रों में जीत हासिल की.

इस लिए विपक्ष के ये आरोप मिथ्या ही हैं कि किसान आंदोलन के चलते पीएम मोदी को कृषि कानून वापस लेना पड़ा. किसान बिल के पास होने के बाद कई राष्ट्रीय और स्थानीय निकायों में बीजेपी ने जीत हासिल की है. लोकतंत्र में चुनावी जीत और हार तो चलती रहती है लेकिन ये तमाम उदाहरण साबित कर रहे हैं कि कम से कम

कृषि बिल के कारण बीजेपी के चुनावी जंग पर कोई असर नहीं पद है. और सैफ ये भी है कि कृषि कानून सुधार का एक बड़ा काम था कोई चुनावी प्रपंच नहीं

Tags: Farmer Laws, Farmer Protest, Kisan Andolan

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