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CJI के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! विपक्ष ने उपराष्ट्रपति को सौंपा ड्राफ्ट

CJI के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! विपक्ष ने उपराष्ट्रपति को सौंपा ड्राफ्ट

संसद परिसर में हुई इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, एनसीपी की वंदना चौहान, सीपीआई के डी. राजा शामिल हैं. हालांकि, आरजेडी और टीएमसी अभी महाभियोग प्रस्ताव की मुहिम से दूरी बनाए हुए हैं.

संसद परिसर में हुई इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, एनसीपी की वंदना चौहान, सीपीआई के डी. राजा शामिल हैं. हालांकि, आरजेडी और टीएमसी अभी महाभियोग प्रस्ताव की मुहिम से दूरी बनाए हुए हैं.

संसद परिसर में हुई इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, एनसीपी की वंदना चौहान, सीपीआई के डी. राजा शामिल हैं. हालांकि, आरजेडी और टीएमसी अभी महाभियोग प्रस्ताव की मुहिम से दूरी बनाए हुए हैं.

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग कार्यवाही के नोटिस पर सात राजनीतिक दलों के 71 सांसदों ने दस्तख़त भी कर दिए हैं. जिसके बाद विपक्षी दल ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात की और उन्हें महाभियोग का ड्राफ्ट सौंपा.

    उपराष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. आजाद ने कहा कि सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ पांच बिंदुओं पर महाभियोग का प्रस्ताव तैयार किया गया है. सात दलों के 71 सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. न्यायपालिका की स्वतंत्रता व निष्पक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ये महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा रहा है. उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति इसे स्वीकार करेंगे.

    गुलाम नबी आजाद ने कहा, "महाभियोग प्रस्ताव पर जिन 71 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. इनमें 7 रिटायर हो चुके हैं. हालांकि, फिर भी यह जरूरी संख्या से अधिक है."

    वहीं, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, "संविधान के तहत अगर कोई जज दुर्व्यवहार करता है तो संसद का अधिकार है कि उसकी जांच होनी चाहिए." सिब्बल के मुताबिक, "जब से दीपक मिश्रा चीफ जस्टिस बने हैं तभी से कुछ ऐसे फैसले लिए गए हैं जो कि सही नहीं हैं. इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट के ही चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी."



    कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, "जिस देश की जनता सुप्रीम कोर्ट पर इतना भरोसा करती है. उसके मुख्य न्यायाधीश को भी इसका ओहदे का सम्मान करना चाहिए. लेकिन, अफसोस है कि सीजेआई दीपक मिश्रा के मामले में ऐसा नहीं है. इसलिए हमारे पास महाभियोग लाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था."



    वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई पर महाभियोग चलाने के संबंध में जनप्रतिनिधियों सहित अन्य लोगों के सार्वजनिक बयानों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा, ‘हम सभी इसे लेकर बहुत स्तब्ध हैं.’

    सूत्रों के अनुसार, संसद परिसर में हुई इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, एनसीपी की वंदना चौहान, सीपीआई के डी. राजा शामिल रहे. हालांकि, आरजेडी और टीएमसी अभी महाभियोग प्रस्ताव की मुहिम से दूरी बनाए हुए हैं.



    सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज बीएच लोया की मौत की एसआईटी जांच की मांग वाली सभी अपीलों के सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद विपक्षी दलों ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर ये मीटिंग बुलाई. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जज लोया केस की मामलों की सुनवाई सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी.



    दरअसल, विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस सीजेआई को पद से हटाने को लेकर लिए बाकी दलों को एक साथ लाने की कोशिश में जुटी है. जहां लेफ्ट, एनसीपी और कांग्रेस सीजेआई को हटाने के लिए ड्राफ्ट लाने पर सहमत हैं, वहीं अभी कुछ अन्य दलों के साथ बात नहीं बन पाई है.


    जनवरी में जब सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने न्यायिक अनियमिता को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, इसके पहले किसी ने नहीं सोचा था कि सीजेआई पर इस तरह से आरोप लग सकते हैं.

    अब बड़ा सवाल ये है कि क्या सीजेआई को अन्य जजों की तरह महाभियोग प्रस्ताव से हटाया जा सकता है या फिर इसके लिए कोई दूसरा रास्ता है? दरअसल, भारत के न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में अब तक किसी भी जज पर महाभियोग न लगा था. सीजेआई के मामले में ये कितना अलग होगा?

    कैसे लाया जा सकता है महाभियोग?
    -किसी भी जज या सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है. इसका प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में रखा जा सकता है.
    -महाभियोग अगर राज्यसभा में लाया जा रहा है, तो सभापति को इसका प्रस्ताव सौंपना होता है. लोकसभा में महाभियोग लाने की स्थिति में संबंधित प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को सौंपा जाता है.
    -इसके बाद राज्यसभा सभापति या लोकसभा अध्यक्ष पर निर्भर करता है वो इस प्रस्ताव को स्वीकार करे या रद्द कर दें.
    -अगर राज्यसभा सभापति या लोकसभा स्पीकर प्रस्ताव मंजूर कर लेते हैं, तो आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाता है.
    -इस कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट के जज, एक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद् शामिल होता है.
    -जांच के बाद कमिटी अपनी रिपोर्ट पेश करती है. अगर संबंधित जज को दोषी पाया जाता है, तो महाभियोग का प्रस्ताव सदन में रखा जाता है. इस प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से समर्थन मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है.
    -इसके बाद अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास ही है. राष्ट्रपति चाहें तो अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए चीफ जस्टिस को पद से हटा सकते हैं.

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