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मंदी, बेरोजगारी और RCEP पर मोदी सरकार को मिलकर घेरेंगे विपक्षी दल, संसद से सड़क तक संघर्ष का ऐलान

भाषा
Updated: November 4, 2019, 9:52 PM IST
मंदी, बेरोजगारी और RCEP पर मोदी सरकार को मिलकर घेरेंगे विपक्षी दल, संसद से सड़क तक संघर्ष का ऐलान
विपक्ष ने आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, कृषि संकट और RCEP पर सरकार को घेरने की योजना बनाई है.

लोकतांत्रिक जनता दल (Loktantrik Janata Dal party) के नेता शरद यादव (Sharad Yadav) ने कहा कि अगले महीने संसद सत्र के दौरान विपक्ष सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएगा.

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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) सहित कई विपक्षी दलों ने सोमवार को आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, कृषि संकट और क्षेत्रीय समग्र आर्थिक समझौते (RCEP) जैसे मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के खिलाफ एकजुट होकर संसद से सड़क तक संघर्ष का ऐलान किया. देश के कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में यह सहमति बनी कि अगले महीने संसद सत्र के दौरान इन मुद्दों को लेकर सरकार को मिलकर घेरा जाएगा.

कांग्रेस द्वारा आहूत विपक्षी दलों की बैठक में 13 दल शामिल हुए, लेकिन समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और बसपा (BSP) जैसी दो प्रमुख पार्टियां इसमें शामिल नहीं हुईं. बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (National Congress Party) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) को भी शामिल होना था. हालांकि सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में चल रही सियासी उठापटक को लेकर संभवत: व्यस्त रहने के कारण वह शामिल नहीं हो सके.

कांग्रेस ने कहा- देश में सब परेशान
बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने आरोप लगाया कि इस वक्त देश में सब परेशान हैं, लेकिन सिर्फ भाजपा को परेशानी नहीं हैं क्योंकि उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं है. विपक्ष के कई नेताओं की मौजूदगी में आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ समान विचारधारा वाले 13 दलों की बैठक थी. इस बैठक में आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, किसानों की समस्या और आरईसीपी पर चर्चा हुई.’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में बेरोजगारी बढ़ रही है. पढ़े-लिखे नौजवानों में बेरोजगारी ज्यादा है. नोटबंदी के बाद बेरोजगारी ज्यादा बढ़ी है.’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘अर्थव्यवस्था पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. आर्थिक विकास दर लगातार गिर रही है. अब हम सातवें नंबर की अर्थव्यवस्था हो गए हैं. हर क्षेत्र में गिरावट है. एनपीए आठ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए. बैंक जालसाजी बढ़ गई है. अब तो ये रिजर्व बैंक को कमजोर कर रहे हैं.’’ आजाद ने दावा किया, ‘‘कृषि विकास दर गिर गई है. समर्थन मूल्य के नीचे उपज बिक रही है. कृषि उत्पादों पर जीएसटी लगाया गया है. ऐसी स्थिति है कि किसान आत्महत्या को मजबूर है. देश ने ऐसी संवेदनहीन सरकार 70 साल में कभी नहीं देखी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर आरसीईपी पर हस्ताक्षर हो गया तो चीन के तमाम उत्पाद आएंगे तो देश की अर्थव्यवस्था का क्या होगा? यह एकतरफा समझौता है.’’

शरद यादव ने सरकार के खिलाफ एकजुट सरकार
लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने कहा कि अगले महीने संसद सत्र के दौरान विपक्ष सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएगा. तारीख तय होगी और उसी कार्यक्रम के मुताबिक विपक्षी दल संसद के भीतर और सड़क पर सरकार को घेरेंगे.
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संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से कुछ दिनों पहले हुई इस बैठक में कांग्रेस के अहमद पटेल (Ahmed Patel), गुलाम नबी आजाद, रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) , द्रमुक के टी. आर. बालू, राजद (RJD) के मनोज झा (Manoj Jha), तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) के नदीमुल हक, माकपा के टीके रंगराजन, भाकपा के डी राजा, राष्ट्रीय लोक दल (Rashtriya Lok Dal) के अजित सिंह, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, आईयूएमएल के कुनालिकुट्टी और रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा ने हिस्सा लिया.

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First published: November 4, 2019, 8:56 PM IST
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