असम : पिता का शव लेने से बेटे ने किया इनकार, बोला-पहले घोषित करो भारतीय नागरिक

असम : पिता का शव लेने से बेटे ने किया इनकार, बोला-पहले घोषित करो भारतीय नागरिक
कोरबा में व्यावसायी की मौत. फाइल फोटो.

विदेशी न्यायाधिकरण (Foreign Tribunal) ने दुलाल पाल को 2017 में बांग्लादेशी घोषित किया था. इसके बाद उन्हें तेजपुर जेल (Jail) सह हिरासत केंद्र में डाल दिया गया था, जहां उनकी मौत हो गई.

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तेजपुर. असम सरकार (Assam Government) ने तेजपुर जिले में स्थित विदेशी हिरासत केंद्र में एक कैदी (Prisoner) की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं. तेजपुर जेल सह हिरासत केंद्र के अधीक्षक मृणमय दावका ने यह जानकारी देते हुए बुधवार को बताया कि दुलाल पाल नामक इस कैदी के पुत्र ने अपने पिता का शव (Dead Body) तब तक लेने से मना कर दिया है, जब तक उनके पिता को भारतीय नागरिक घोषित नहीं कर दिया जाता.

विदेशी न्यायाधिकरण (Foreign Tribunal) ने दुलाल पाल को 2017 में बांग्लादेशी घोषित किया था. इसके बाद उन्हें तेजपुर जेल सह हिरासत केंद्र में डाल दिया गया था. डीसीपी मानवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 65 वर्षीय पाल को गुवाहाटी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई. इस मामले की जांच एसीपीपी पराग काकोती करेंगे. प्रताप सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच की मांग करते हुए ‘‘द बेंगाली फेडरेशन ऑफ असम’’ ने भी एक ज्ञापन सौंपा था.

13 अक्टूबर को हुई थी मौत
तेजपुर जेल सह हिरासत केंद्र के अधीक्षक मृणमय दावका ने बताया कि पाल का मधुमेह और मनोविकार संबंधी बीमारियों का इलाज चल रहा था. 11 अक्टूबर को तेजपुर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की. फिर उन्हें हिरासत केंद्र ले जाया गया. अगले दिन वह बीमार हो गए और उन्हें फिर तेजपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया. वहां से उन्हें उसी दिन गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) भेज दिया गया जहां 13 अक्टूबर को उन्होंने दम तोड़ दिया.



बेटे ने शव लेने से किया इनकार


दुलाल का शव जीएमसीएच के शवगृह में रखा है क्योंकि उनके इकलौते पुत्र आशीष पाल ने शव लेने से मना कर दिया. पेशे से मोटर मैकेनिक आशीष का कहना है कि तब तक उनके पिता को भारतीय नागरिक घोषित नहीं किया जाता, तब तक वह शव नहीं लेगा.

सोनितपुर जिले के अधिकारी एडीजी कुलेन शर्मा तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नुमाल महंत की अगुआई में सोमवार को आशीष के घर गए और उन्हें उनके पिता का शव लेने के लिए समझाया, लेकिन आशीष नहीं माने. दावका ने बताया कि जिला अधिकारियों का एक दल दोबारा मंगलवार को आशीष के घर गया.

इस बीच असम कांग्रेस समिति के महासचिव तथा प्रवक्ता अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि एपीसीसी अध्यक्ष रिपुन बोरा की अगुआई में एक दल ने मंगलवार को अलीसिंगा गांव का दौरा किया. दुलाल अलीसिंगा गांव के ही रहने वाले थे. भट्टाचार्य ने कहा ‘‘ग्रामीणों का कहना है कि अगर दुलाल को बांग्लादेशी घोषित किया गया है तो वह उनका शव कैसे ले सकते हैं?’’

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First published: October 16, 2019, 3:51 PM IST
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