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इस परिवार को सलाम! अपने एक फैसले से 6 घंटे में बचा दी 6 जिंदगी

हर साल ‘ऑर्गेन’ न मिल पाने से होती है 5 लाख लोगों की मौत (सांकेतिक तस्वीर/twitter)

हर साल ‘ऑर्गेन’ न मिल पाने से होती है 5 लाख लोगों की मौत (सांकेतिक तस्वीर/twitter)

कर्नाटक के बेलगावी जिले (Belagavi District) में रहने वाले दंडगी परिवार (Dandagi Family) के एक फैसले से 6 लोगों की जिंदग ...अधिक पढ़ें

    कर्नाटक: अंगदान (Organ Donation) जैसा महादान हो ही नहीं सकता. अंगदान कर आप किसी को नया जीवन दे सकते हैं, आप किसी के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला सकते हैं. आप किसी को फिर से ये दुनिया दिखा सकते हैं. अंगदान करके आप फिर किसी की जिंदगी को नई उम्मीद से भर सकते हैं. अंगदान करने से न केवल आपको बल्कि दूसरे को भी खुशी देती है.  कर्नाटक के बेलगावी जिले में रहने वाले दंडगी परिवार ने 6 परिवारों में खुशियां लौटाईं.

    द हिन्दू की खबर के मुताबिक, बेलगावी के महाबलेश्वर नगर में सीढ़ी चढ़ते समय 51 साल के उमेश बसवन्ना दंडगी (Umesh Basavanna Dandagi) गिर गए. उनके सिर में गभीर चोट लगी. उन्हें फौरन जिले के केएलई अस्पताल (KLE Hospital, Belagavi) पहुंचाया गया, मगर डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड (Brian Dead) घोषित कर दिया.

    डॉक्टरों ने उमेश के परिवारवालों को अंगदान की सालह दी, जिसपर वे सहमत हो गए. इसके बाद युद्धस्तर पर अस्पताल में सभी इंतजाम किए गए. उमेश के शरीर को पुन:  जांच की गई  इसके बाद छह लोगों की जिंदगी बदल गई. और उनके शरीर के 6 अंगों को निकाला गया. शहर के कोर अस्पताल (Core Hospital) में हद्य प्रत्यारोपण किया गया.

    6 घंटे में 6 लोगों को मिली नई जिंदगी

    वहीं उनके लीवर को सांबरा एयपोर्ट से एयरलिप्ट कर बेंगलुरु भेजा गया. एक किडनी को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए धारवाड़ के एसडीएम हॉस्पिटल और दूसरी किडनी को हुबली के तत्वदर्श अस्पताल में भेजा गया, जहां सभी जरूरतमंत मरीजों में सफलतापूर्वक अंग प्रत्यारोपण किया गया. इसके अलावा उनकी आंखों ने दो लोगों को रोशनी दी. उमेश के शरीर से ह्दय, लीवर और किडनी निकालने की पूरी कवायद और उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाने और अंग प्रत्यारोपण में कुल मिलाकर 6 घंटे का समय लगा.

    केएलई सोसायटी के अध्यक्ष प्रभाकर कोरे, कोरे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक एम.वी. जाली और बोर्ड के सदस्यों ने अंगों को जल्दी पहुंचाने हेतु ग्रीन कॉरिडोर सुनिश्चित करने के लिए हुबली-धारवाड़ और बेलगावी के पुलिस आयुक्तों को धन्यवदा दिया है.

    देश में हर साल 5 लाख लोगों की होती है मौत

    वही अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि लोगों को अंग दान के लिए सहमति देते हुए देखकर खुशी हो रही है और दूसरों से अंग दान करने का संकल्प लेने का आग्रह किया है ताकि वे अपनी मृत्यु के बाद भी दूसरों के माध्यम से जीवित रहें. एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में हर साल हर साल ‘ऑर्गेन’ न मिल पाने से 5 लाख लोगों की मौत होती है. सचमुच अंगदान से बड़ा दान कुछ नहीं है.

    Tags: Inspiring story, Organ Donation, Organ transplant

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