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किसान आंदोलनः BKU का बड़ा आरोप, कहा- दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों को कांग्रेस की फंडिंग

भानु प्रताप सिंह ने कहा,

भानु प्रताप सिंह ने कहा, "जितने भी संगठन सिंघु बॉर्डर, गाज़ीपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे थे. ये सब कांग्रेस के खरीदे हुए थे." ANI

Farmers Protest: BKU चीफ ने कहा कि जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और लालकिले पर कोई और झंडा लहराया तो हमने अपना समर्थन वापस ले लिया और लौट आए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 15, 2021, 6:08 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों (New Farm Law) के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन पर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह (Bhanu Pratap Singh) ने बड़ा आरोप लगाया है. भानु प्रताप सिंह ने कहा, '26 जनवरी को हमें मालूम पड़ा था कि जितने भी संगठन सिंघु बॉर्डर, गाज़ीपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे थे. ये सब कांग्रेस के खरीदे हुए और कांग्रेस के भेजे हुए संगठन थे. कांग्रेस इनको फंडिंग कर रही थी.' उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनकारियों (किसान) ने पुलिस पर हमला किया और लालकिले पर कोई और झंडा लहराया तो हमने अपना समर्थन वापस ले लिया और लौट आए.

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के चीफ ने कहा कि हम केंद्र सरकार से बात करेंगे और कहेंगे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सलाह देने के लिए किसानों की एक कमेटी गठित की जाए. उन्होंने कहा, "अभी तक मांग पूरी नहीं हुई है और जिन लोगों को बातचीत के लिए भेजा गया था, वे इसे 4 से 5 साल तक लटकाए रखना चाहते हैं. ये सिर्फ आतंकियों की ही भाषा हो सकती है, भारतीय किसान की नहीं."

'दिसंबर तक चलेगा किसान आंदोलन'
दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार को किसान आंदोलन पर कहा कि नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के इस साल दिसंबर तक चलने की संभावना है. पश्चिम बंगाल का दौरा करने के बाद रविवार को प्रयागराज पहुंचे टिकैत ने झलवा में कहा, “नवंबर-दिसंबर तक इस आंदोलन के चलने की उम्मीद है.” अपने बंगाल दौरे के बारे में टिकैत ने बताया, “दिल्ली से सरकार के लोग पश्चिम बंगाल में किसानों से एक मुट्ठी अनाज मांग रहे हैं. हमने किसानों से कहा कि जब वे चावल दें तो अनाज मांगने वालों से कहें कि वे इस पर एमएसपी भी तय करवा दें और 1850 रुपये का भाव दिला दें.”
'नए कानून से छोटे दुकानदारों का खात्मा'


उन्होंने कहा, “कल हम बंगाल में थे.. पूरे देश में जा रहे हैं. हम किसानों से एमएसपी का कानून बनवाने की मांग करने के लिए कह रहे हैं. अभी बिहार में धान 700-900 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा गया. हमारी मांग है कि एमएसपी का कानून बने और इससे नीचे पर खरीद ना हो.” टिकैत ने कहा, “हम दिल्ली में ही रहेंगे... पूरे देश में हमारी बैठकें चल रही हैं." उन्होंने कहा कि नए कानून से छोटे दुकानदार खत्म हो जाएंगे... केवल दो मॉल रहेंगे. व्यापारी वर्ग खत्म होगा... लघु उद्योग खत्म हो जाएंगे. वालमार्ट जैसी कंपनियों के आने से साप्ताहिक बाजार खत्म हो जाएंगे.

'जनता एसी में सोती रही तो देश बिक जाएगा'
टिकैत ने कहा, “यदि सरकार किसी पार्टी की होती तो वह बातचीत कर लेती. लेकिन इस सरकार को तो बड़ी कंपनियां चला रही हैं. इन्होंने पूरा देश बेच दिया. बैंकिंग क्षेत्र, एलआईसी, हवाई अड्डे... देश का सब कुछ बिक गया. अगर जनता पंखे और एसी में सोती रही तो देश बिक जाएगा.”

इससे पूर्व, टिकैत ने झलवा में टिकैत पार्क में स्थित महेंद्र सिंह टिकैत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुज सिंह और अन्य किसान नेता मौजूद थे.

दिल्ली बॉर्डर पर नवंबर 2020 से ही किसान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ डटे हुए हैं. आंदोलन को 100 दिन पूरे हो गए हैं और किसान नेता देश भर में घूम-घूम कर केंद्रीय कानूनों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं.
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