NRC: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले NGO ने उठाए लिस्ट पर सवाल

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Updated: August 31, 2019, 5:00 PM IST
NRC: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले NGO ने उठाए लिस्ट पर सवाल
असम (Assam) में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of Citizens) को अपडेट करने के लिए 6 साल पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल करने वाले असम पब्लिक वर्क्स (Assam Public Works) ने एनआरसी (NRC) के फाइनल डॉक्यूमेंट को गलत ठहराया है.

असम (Assam) में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of Citizens) को अपडेट करने के लिए 6 साल पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल करने वाले असम पब्लिक वर्क्स (Assam Public Works) ने एनआरसी (NRC) के फाइनल डॉक्यूमेंट को गलत ठहराया है.

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असम (Assam) में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of Citizens) को अपडेट करने के लिए 6 साल पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल करने वाले असम पब्लिक वर्क्स (Assam Public Works) ने एनआरसी (NRC) के फाइनल डॉक्यूमेंट को गलत ठहराया है. इसके लिए उन्होंने इसके री-वेरिफिकेशन की मांग की थी जिसे शीर्ष अदालत ने ठुकरा दिया है.

इस एनजीओ (NGO) ने ये भी सवाल उठाए हैं कि जिस सॉफ्टवेयर की मदद से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है. एनजीओ का मानना है कि यह सॉफ्टवेयर इतने बड़े डाटा की जांच करने में सक्षम नहीं है. असम पब्लिक वर्क्स के अध्यक्ष अभीजित शर्मा (APW president Aabhijeet Sharma) का कहना है कि या फिर इस डाटा की जांच के लिए किसी थर्ड पार्टी इंफॉरमेशन एक्सपर्ट की मदद ली गई है.

कभी नहीं होगा इसका समाधान
19 लाख से अधिक आवेदकों के नाम हटाए जाने के बाद शर्मा ने अंतिम एनआरसी जारी होने के बाद पत्रकारों को बताया कि फाइनल एनआरसी ने यह साफ कर दिया है कि असम में अवैध शरणार्थियों की समस्या का समाधान कभी नहीं किया जाएगा. अगर यह बिना किसी गलती के पूरा हो गया होता, तो यह असम के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय होता.

उन्होंने कहा कि प्राथमिक याचिकाकर्ता के रूप में APW ने सुप्रीम कोर्ट में पांच ज्ञापन सौंपे थे जिसमें एनआरसी के मसौदे का फिर से वैरिफिकेशन करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया था.

सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल
शर्मा ने कहा कि 27 प्रतिशत री-वैरिफिकेशन NRC राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने किया है जो कि एक रहस्य है. ये कोई नहीं जानता कि यह 100 प्रतिशत बिना किसी गलती के था या नहीं. यही नहीं शर्मा ने एनआरसी के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर पर भी संदेह जताया क्योंकि कई संदिग्ध मतदाताओं के नाम एनआरसी के मसौदे में दर्ज किए गए थे.
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APW अध्यक्ष ने सवाल किया कि क्या सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण तत्कालीन जिला आयुक्त द्वारा मोरीगांव जिले के 39 परिवारों संदिग्ध मतदाताओं को एनआरसी के मसौदे में जोड़ा गया है.

2009 में दाखिल की थी याचिका
2009 में APW ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि 41 लाख विदेशी नागरिकों को असम की वोटर लिस्ट से बाहर किया जाए और एनआरसी को भी अपडेट किया जाए. इस याचिका के जवाब में केंद्र ने शीर्ष अदालत में कहा था कि 1951 में एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है.

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एपीडब्ल्यू याचिका को लिया और केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को NRC को अपडेट करने के लिए प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया. इसका वास्तविक काम दो साल बाद शुरू हुआ.

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First published: August 31, 2019, 5:00 PM IST
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