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अयोध्या का दूसरा केस: जानें बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले का क्या है हाल

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Updated: November 9, 2019, 12:09 PM IST
अयोध्या का दूसरा केस: जानें बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले का क्या है हाल
अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था.

Babri masjid Ram Janmbhoomi ayodhya verdict 2019: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद इमारत को तोड़ने के कथित षड्यंत्र, भडकाऊ भाषण और पत्रकारों पर हमले के केस में कुल 49 में से 22 अभियुक्तों पर लखनऊ के स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई अंतिम दौर में है.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 12:09 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में शीर्ष अदालत (Supreme Court) का फैसला आज चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी है. वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में कहीं भी 5 एकड़ जमीन देने को कहा गया है. जबकि, निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज कर दिया गया है. अदालत के इस फैसले से अयोध्या के विवादित स्थल पर राममंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है.

हालांकि, अयोध्या मामले से इतर एक और केस पर फैसले का भी बेसब्री से इंतजार है. ये केस अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद की इमारत को तोड़ने के कथित षड्यंत्र, भड़काऊ भाषण और पत्रकारों पर हमले से जुड़ा है. इस पर 49 मुकदमे पिछले 27 वर्षों से कानूनी दांव पेंच और अदालतों के भंवरजाल में उलझे हैं.

(अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लाइव अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें)

कुल 49 में से 22 अभियुक्तों पर लखनऊ के स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई अंतिम दौर में है. वहीं, 8 अभियुक्तों पर रायबरेली में मुकदमे चल रहे हैं. 9 ऐसे भी अभियुक्त हैं, जिन पर कहीं मुकदमा चल ही नही रहा है. इस बीच 10 अभियुक्तों और लगभग 50 गवाहों की मौत भी हो चुकी है. अभियुक्तों में कुछ मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं.

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में ये हैं नामजद अभियुक्त
6 दिसंबर 1992 को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद इमारत को तोड़ने के कथित षड्यंत्र, भडकाऊ भाषण केस में अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा नामजद अभियुक्त हैं. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153ए ,153बी , 505, 147 और 149 के तहत यह मुकदमा रायबरेली में चल रहा है. इनमें अब तक 40 गवाह पेश हुए हैं.

Ayodhya-station (1)
अयोध्या मामले (Ayodhya Case) पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है

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इसी मुकदमे के आधार पर पुलिस ने 8 दिसंबर 1992 को आडवाणी व अन्य नेताओं को गिरफ्तार किया था. शांति व्यवस्था की दृष्टि से इन्हें ललितपुर में माताटीला बांध के गेस्ट हॉउस में रखा गया था.

आइए जानते हैं बाबरी विध्वंस केस से जुड़ी बड़ी बातें:-

>>अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने (Babri Masjid Demolition) के बाद कुल 49 मामले दर्ज किए गए थे. लेकिन क्या आपको यह पता है कि इनमें से ढांचा गिराने के सिर्फ 2 मामले थे, बाकी सब पत्रकारों से मारपीट और फोटोग्राफरों से कैमरा तोड़ने-छीनने के थे. ढांचा गिराने के एक मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) थी तो दूसरे में आठ लोग नामजद थे. ये सभी केस थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या (Ram Janmabhumi, Ayodhya) में दर्ज किए गए थे.

>>6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के कुछ मिनटों बाद इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी. FIR no. 197/92 अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ शाम 5:15 बजे दर्ज हुई थी. इसमें सेक्शन आईपीसी की धारा 395, 397, 332, 337,338,295,297 और 153A लगाई गई थी. इसके अलावा आरोपियों पर क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट का सेक्शन 7 भी लगाया गया था.

>>इसके 10 मिनट बाद दूसरी एफआईआर (FIR no. 198/92) दर्ज हुई. इस एफआईआर में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा का नाम है. इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 153B, 505 लगाई गई हैं. इन सभी नेताओं पर कथित षड्यंत्र और भडकाऊ भाषण देने का आरोप है.

POLICE SECUTITY
फैसले के कारण देशभर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं


>>इसके साथ ही पत्रकारों से मारपीट, मीडिया कैमरों और रिपोर्टिंग गैजेट की लूट के मामले में कुल 47 एफआईआर दर्ज हुईं. ये सभी एफआईआर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज हुई थीं.

सीबीआई को कब ट्रांसफर हुए केस?
इन सभी एफआईआर में से केस नंबर 197 और केस नंबर 198 सबसे अहम था. तत्कालीन सरकार ने केस नंबर 197 की जांच सीबीआई को सौंप दी, जबकि केस नंबर 198 की जांच यूपी पुलिस की सीबी और सीआईडी विंग को सौंपी गई.

>>केस नंबर 197: 6 दिसंबर 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद शाम सवा पांच बजे थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या में अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और अन्य मामलों में केस दर्ज किया गया. यह केस थाना प्रभारी पीएन शुक्ल ने दर्ज किया था.

>>केस नंबर 198: पहली एफआईआर के करीब 10 मिनट बाद केस नंबर 198 दर्ज हुआ. इसमें नामजद हुए अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा. आठ लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद गिरवाने का मुकदमा दर्ज हुआ. इसे थाने के दूसरे पुलिस अधिकारी गंगा प्रसाद तिवारी ने रजिस्टर किया.

>>वहीं, 27 अगस्त 1993 में यूपी सरकार ने बाकी सभी केस सीबीआई को सौंप दिए. सीबीआई ने इन सभी केस की जांच की, जिसमें बाबरी मस्जिद विध्वंस केस का मामला भी शामिल था. इसके बाद सीबीआई ने 5 अक्टूबर 1993 को लखनऊ के स्पेशल कोर्ट में 40 लोगों के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल की.

>>इसके करीब 2 साल बाद 11 जनवरी 1996 को सीबीआई ने एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की. इसमें 9 वीआईपी लोगों को नाम था. इस तरह कुल आरोपियों की संख्या 49 हो गई.

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First published: November 9, 2019, 9:29 AM IST
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