OTT कंटेंट की निगरानी करेगी सरकार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत लाए गए प्लेटफॉर्म्स

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के न्यूज और करेंट अफेयर्स सरकार के दायरे में होंगे.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के न्यूज और करेंट अफेयर्स सरकार के दायरे में होंगे.

सरकार ने OTT प्लेटफॉर्म्स को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का फैसला लिया है. यह फैसला ऑनलाइन मीडिया (Online Media) पर चल रहे कंटेंट की निगरानी के लिहाज से उठाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 8:02 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. वेब सीरीज (Web Series) के बढ़ते जाल, ऑडियो-विजुअल संदेश और ओटीटी और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आने वाले कंटेट को लेकर भारत में आम आदमी की चिंता बढ़ती जा रही थी. कई ऐसे कंटेट नजर आने लगे थे जो नुकसानदायक, गलत संदेश देने वाले और साथ ही कानून का उल्लंघन भी कर रहे थे. साथ ही सूप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और देश भर के उच्च न्यायलयों में भी याचिकाएं दायर कर हस्तक्षेप करने की मांग उठ रही थी. कोर्ट से अपील की जा रही थी कि ओटीटी और ऑनलाइन मीडिया के लिए केन्द्र सरकार से एक रेगुलेटरी मेकेनिज्म बनाने की मांग भी तेज हो गयी थी. ऐसे में केन्द्र सरकार को एक बड़ा फैसला लेना ही पड़ा. मंत्रीमंडल सचिवालय ने कानूनों में कुछ संशोधन करते हुए आदेश दिया कि अब ऑडियो-विजुअल और न्यूज से जुडे़ कंटेट अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय की निगरानी में आएंगे. इसके तहत ऑनलाइन कंटेट प्रोवाईडरों द्वारा उपलब्ध कराई गई फिल्म, ऑडियो-विजुअल कार्यक्रम और ऑनलान प्लेटफआर्म पर आने वाले समाचार और समसामयिक विषय वस्तु भी शामिल हैं.

सरकारी सूत्र बताते हैं कि अखबारों और टीवी चैनलों में दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए एक पूरा का पूरा तंत्र है, जबकि ऑनलाइन और ओटीटी प्लेटफार्म पर आने वाले कंटेंट लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का कोई सिस्टम भारत में नहीं था. जैसे प्रिंट मीडिया की खबरों के लिए प्रेस काउंसिल एक्ट है, वैसा ही कोई नियम या कानून ऑनलाइन छपने वाली खबरों को रेगुलेट करने के लिए कुछ नहीं था.

कोशिशें हुईं की एक सेल्फ रेलुलेटरी मेकैनिज्म बन जाए, लेकिन कई डिजिटल प्लेटफार्म इससे जुड़ने को तैयार नहीं हुए. बहुत तेजी से टेक्नोलॉजी का बदलाव भी ये सुनिश्चित करने लगा कि ऑनलाइन मीडिया कंटेंट दुनिया भर में देखा और पढ़ा जाने लगा है. डिजिटल मीडिया अब इतना ज्यादा लोकप्रिय होता जा रहा है कि पुराने पंरपरागत मीडिया प्लेटफार्म से ज्यादा हिट साबित होने लगा है. इसलिए सरकार को सख्त जरुरत आ गयी कि इसे बाकी मीडिया प्लेटफार्मों की तरह इन पर नजर रखने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाए.



मनोरंजन के लिए चल रहे चैनलों के लिए केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट 1995 है तो थियेटरों और टीवी पर दिखायी जाने वाली फिल्मों के लिए सरकार ने सिनेमेटोग्राफ एक्ट 1952 बनाया हुआ है, लेकिन ओटीटी यानि ओवर द टॉप प्लेटफार्म के कंटेट प्रोवाइडरों के लिए कोई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अब तक उपलब्ध नहीं है. सरकार की चिंता इस बात को लेकर भी है कि सस्ती होती इंटरनेट सुविधाएं, स्मार्ट फोन की कम होती कीमतों के कारण अब ओटीटी प्लेटफार्म पर स्कूल और कॉलेज जाने वाले ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक पहुंचेगा. दर्शक बढ़ेंगे तो और ज्यादा प्लेयर्स भी नजर आने लगेंगे.


एक अनुमान के मुताबिक मोबाईल और डेटा की सुविधा कम से कम 560 मिलियन भारतीयों तक पहुंच चुकी है, जिसमें 250 मिलियन लोग ग्रामीण भारत में हैं. अगर इन मोबाईलों में गलत कंटेट चले तो लाखों युवाओं के दिमाग पर असर डाल सकते हैं. इसलिए सरकार ने इसके लिए एक रेगुलेचरी मेकैनिज्म लाना जरुरी समझा है.

भारतीय संविधान में मीडिया की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के मकसद से सरकार इस कोशिश में लगी रहेगी कि न्यूज पोर्टलों और ओटीटी प्लेटफार्म अपने लिए एक सेल्फ रेगुलेशन मेकैनिस्म बनाएं ताकि आम लोगों की चिंताओं का निवारण वो खुद ही कर सकें और अपनी अभिवयक्ति की आजादी को भी बरकरार रखें और लोगों को कंटेट को लेकर कोई शिकायत भी नहीं हो और कानून के दायरे में ही अपना काम कर सकें.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज