Home /News /nation /

घर के भीतर गवाह की अनुपस्थिति में SC/ST पर अपमानजनक टिप्पणी अपराध नहीं: SC

घर के भीतर गवाह की अनुपस्थिति में SC/ST पर अपमानजनक टिप्पणी अपराध नहीं: SC

झारखंड सरकार ने ब्रह्मपुत्र मेटालिक्स लिमिटेड को 50 प्रतिशत की विद्युत शुल्क छूट का लाभ देने के HC के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी. फाइल फोटो

झारखंड सरकार ने ब्रह्मपुत्र मेटालिक्स लिमिटेड को 50 प्रतिशत की विद्युत शुल्क छूट का लाभ देने के HC के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी. फाइल फोटो

न्यायालय (Supreme Court) ने कहा कि एससी व एसटी कानून के तहत अपराध तब माना जाएगा जब समाज के कमजोर वर्ग के सदस्य को किसी स्थान पर लोगों के सामने 'अभद्रता, अपमान और उत्पीड़न' का सामना करना पड़े.

    नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बृहस्पतिवार को कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित किसी व्यक्ति के खिलाफ घर की चारदीवारी के अंदर किसी गवाह की अनुपस्थिति में की गई अपमानजनक टिप्पणी अपराध नहीं है. इसके साथ ही न्यायालय ने एक व्यक्ति के खिलाफ एससी-एसटी कानून के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया, जिसने घर के अंदर एक महिला को कथित तौर पर गाली दी थी.

    कोर्ट ने ये कहा
    न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति का अपमान या धमकी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कानून के तहत अपराध नहीं होगा जब तक कि इस तरह का अपमान या धमकी पीड़ित के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने के कारण नहीं है. न्यायालय ने कहा कि एससी व एसटी कानून के तहत अपराध तब माना जाएगा जब समाज के कमजोर वर्ग के सदस्य को किसी स्थान पर लोगों के सामने 'अभद्रता, अपमान और उत्पीड़न' का सामना करना पड़े.

    तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा
    न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा, 'तथ्यों के मद्देनजर हम पाते हैं कि अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून, 1989 की धारा 3 (1) (आर) के तहत अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप नहीं बनते हैं. इसलिए आरोपपत्र को रद्द किया जाता है.’ इसके साथ ही न्यायालय ने अपील का निपटारा कर दिया.

    पीठ ने अपने 2008 के फैसले पर भरोसा किया 
    पीठ ने कहा कि हितेश वर्मा के खिलाफ अन्य अपराधों के संबंध में प्राथमिकी की कानून के अनुसार सक्षम अदालतों द्वारा अलग से सुनवाई की जाएगी. पीठ ने अपने 2008 के फैसले पर भरोसा किया और कहा कि इस अदालत ने 'सार्वजनिक स्थान' और 'आम लोगों के सामने किसी भी स्थान पर' अभिव्यक्ति के बीच अंतर को स्पष्ट किया था. न्यायालय ने कहा कि यह कहा गया था कि यदि भवन के बाहर जैसे किसी घर के सामने लॉन में अपराध किया जाता है, जिसे सड़क से या दीवार के बाहर लेन से किसी व्यक्ति द्वारा देखा जा सकता है तो यह निश्चित रूप से आम लोगों द्वारा देखी जाने वाली जगह होगी.

    पीठ ने कहा कि प्राथमिकी के अनुसार, महिला को गाली देने का आरोप उसकी इमारत के भीतर हैं और यह मामला नहीं है जब उस समय कोई बाहरी व्यक्ति सदस्य (केवल रिश्तेदार या दोस्त नहीं) घर में हुई घटना के समय मौजूद था.undefined

    Tags: SC, Supreme Court

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर