West Bengal Election Result: बंगाल में इस बार हिंदी भाषी वोटर्स का बोलबाला, तृणमूल-भाजपा दोनों जमकर लगा रहीं दांव

पश्चिम बंगाल ने इस देश को बहुत कुछ दिया है. देश को भी उसे बहुत कुछ देना चाहिए.  (फोटो: PTI)

पश्चिम बंगाल ने इस देश को बहुत कुछ दिया है. देश को भी उसे बहुत कुछ देना चाहिए. (फोटो: PTI)

West Bengal Election Result 2021: सैकड़ों प्रवासी (Migrants) दोनों दलों की बातों को सुन रहे हैं और शायद उन्होंने किसी एक पक्ष को चुन भी लिया है. यह वर्ग चुनाव के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.

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(पल्लवी घोष)

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आज यानि रविवार को नतीजे घोषित होंगे. यहां किसी भी राजनीतिक दल ने लोगों तक अपनी पहुंच कम नहीं होने दी. वे लगातार राज्य में अलग-अलग समुदायों से संपर्क कर रहे हैं. ऐसा ही एक समुदाय प्रवासियों का भी है. ये वो लोग हैं, जो काम या कारोबार की तलाश में कभी पश्चिम बंगाल (West Bengal) आए थे और यहीं बस गए. राज्य में ऐसे प्रवासियों की संख्या एक करोड़ से कुछ कम है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन लोगों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है.

कुछ दिनों पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि हिंदी भाषी फैक्टर अहम है और ये बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं. कहा जाता है कि बीजेपी को कभी हिंदी बेल्ट की पार्टी कहा जाता था. लेकिन अब इसे प्रवासी मतों से फायदा मिल सकता है. एक ओर टीएमसी लगातार बीजेपी को 'बाहरी लोगों की' पार्टी बता रही है. हालांकि, बीजेपी ने टीएमसी के इस दावे को नकारा है कि और कहा है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो 'मिट्टी का सपूत' ही मुख्यमंत्री बनेगा.

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सैकड़ों प्रवासी दोनों दलों की बातों को सुन रहे हैं और शायद उन्होंने किसी एक पक्ष को चुन भी लिया है. यह वर्ग चुनाव के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. इस धारणा के मुताबिक, हिंदी भाषी लोग बीजेपी के साथ जाएंगे. राज्य की सीएम ने खुद इस पर काम किया. बीते साल उन्होंने छठ पूजा पर 2 दिनों के राजकीय अवकाश की घोषणा की. उन्होंने तब कहा था 'क्या किसी ने भी कभी यह किया है? किसी ने मुझसे नहीं कहा, लेकिन मैंने किया. मैं यह भी चाहती हूं कि राज्य में क्षेत्रीय भाषाओं के संस्थान आएं.'

बीजेपी भी इस वर्ग को लेकर शांत नहीं है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा लगातार प्रवासियों तक पहुंचकर बता रहे हैं कि वे 'बाहरी' नहीं हैं. वे बता रहे हैं कि उन्होंने बंगाल की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है. पार्टी ने राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी जैसे केंद्रीय मंत्रियों को लोगों तक पहु्ंचने के लिए चुना है. समीक्षण सुबीर भौमिक कहते हैं 'बीजेपी ने पहले ही 2019 लोकसभा चुनाव में हिंदी भाषियों पर पकड़ बना ली थी और यह इस चुनाव में नहीं बदलेगा. वे (बनर्जी) यह उम्मीद नहीं कर सकती कि हिंदी भाषी उनके लिए मतदान करें.'





हालांकि, 2019 लोकसभा चुनाव के बाद और बीते साल भी बनर्जी ने हिंदी भाषी मतदाताओं के साथ मीटिंग की थी. उस समय कहा जा रहा था कि पार्टी ने इस वर्ग के बड़े हिस्से में विश्वास खो दिया है. उस दौरान उन्होंने कसम खाई थी कि वे उन्हें घर जैसा एहसास दिलाने के लिए सभी प्रयास करेंगी. हालांकि, कई लोग इस बात से सहमत नहीं हो पाए थे.

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