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बाढ़ से अब तक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत, इस दिन मानसून कर सकता है वापसी

भाषा
Updated: October 9, 2019, 11:02 PM IST

दक्षिण पश्चिम के शुरुआती चरण में अल नीनो के प्रभाव के कारण जून में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गयी. लेकिन जुलाई, अगस्त और सितबंर में मानसून की जमकर बारिश हुई और इसका स्तर सामान्य से दस प्रतिशत की अधिकता को पार कर गया.

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नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने बुधवार को कहा कि इस साल मॉनसून (Monsoon) की बारिश और इसके चलते आई बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 2,100 लोगों की मौतें हुई और 46 अन्य लापता दर्ज किये गये. वहीं, 22 राज्यों में 25 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सर्वाधिक लोगों की मौतें हुईं, जहां 399 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इसके बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal) में 227 लोग मारे गए. देश के करीब 357 जिले बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए.

अधिकारियों के मुताबिक देश भर में 738 लोग घायल हुए और करीब 20,000 पशु भी मारे गये. भारी बारिश और बाढ़ से 1.09 लाख मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गये, 2.05 लाख मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गये और 14.14 लाख हेक्टेयर खेतों में फसलें बर्बाद हो गई.

शुरू हो गई मानसून की वापसी
वहीं पिछले चार महीने के दौरान मध्य और उत्तर पश्चिम भारत (North West India) में सामान्य से लगभग दस प्रतिशत अधिक बारिश देने वाले दक्षिण पश्चिम मानसून की बुधवार को लगभग एक महीने देरी से वापसी शुरु हो गई. मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर तक मानसून की पूरी तरह से वापसी का अनुमान जताया है.

विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार पिछले पांच दिनों से मानसून की लगातार सुस्ती के मद्देनजर उत्तर पश्चिम क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान से मानसून की आधिकारिक तौर पर वापसी शुरू हो गयी है. भारत में बारिश के मौसम के लिये जिम्मेदार दक्षिण पश्चिम मानसून की सामान्य तौर पर हर साल एक सितंबर को वापसी शुरुआत हो जाती है और 30 सितंबर तक यह पूरी तरह लौट जाता है.

देरी से हो रही है मानसून की वापसी
विभाग के अनुसार इस साल मानसून की सबसे अधिक देरी से वापसी शुरू हुई है. इससे पहले 1961 में एक अक्टूबर को मानसून की वापसी शुरू हुई थी जबकि 2007 में 30 सितंबर और 2018 में 29 सितंबर को मानसून की वापसी शुरू हुई थी.
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विभाग के अनुसार मानसून की इस साल वापसी की शुरुआत पंजाब के कपूरथला, हरियाणा के अंबाला और करनाल तथा राजस्थान के चुरू से हुई है. उत्तर और मध्य भारत में हवा के कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ने के कारण अगले दो दिनों में मानसून की इन इलाकों से भी वापसी शुरु हो जायेगी.

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून की मौजूदा गतिविधि को देखते हुए दक्षिण पश्चिम मानसून की 20 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापसी संभावित है. मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की चार माह लंबी अवधि के दौरान भारत में 1994 से सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई.

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First published: October 9, 2019, 10:47 PM IST
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