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जम्मू कश्मीर में 5 अगस्त से अब तक 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया: केंद्रीय मंत्री

भाषा
Updated: November 27, 2019, 8:15 PM IST
जम्मू कश्मीर में 5 अगस्त से अब तक 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया: केंद्रीय मंत्री
जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को निष्‍प्रभावी करने के बाद लगभग 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी (G Kishan Reddy ) ने जम्‍मू कश्‍मीर (Jammu Kashmir) पर कहा कि राज्‍य में शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए अनुच्‍छेद 370 (Article 370) हटाया गया. इससे आतंकवाद पर लगाम लगी है.

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नई दिल्‍ली. सरकार ने बुधवार को बताया कि जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में पांच अगस्त के बाद से 5,000 से अधिक लोगों को ऐहतियातन गिरफ्तार किया गया और इनमें से 609 लोग अभी भी हिरासत में हैं. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी (G Kishan Reddy) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि पांच अगस्त से राज्य में पुलिस की गोलीबारी में किसी की मौत नहीं हुई लेकिन कानून व्यवस्था संबंधी घटनाओं में 197 लोग घायल हुए हैं.

गौरतलब है कि विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधान पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से हटाते हुए सरकार ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया था. दोनों केंद्रशासित प्रदेश 31 अक्टूबर से अस्तित्व में आ गए हैं.

'शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए लोगों को गिरफ्तार किया गया'
रेड्डी ने बताया, 'शांति भंग न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए पांच अगस्त के बाद से कश्मीर घाटी में 5,161 लोगों को ऐहतियात के तौर पर गिरफ्तार किया गया. इनमें पथराव करने वाले, असामाजिक तत्व, अलगाववादी और राजनीतिक कार्यकर्ता आदि शामिल हैं. इनमें से 609 लोग अभी भी हिरासत में हैं.'

218 लोगों ने किए थे पथराव
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिरासत में रह रहे लोगों में से करीब 218 लोग पथराव करने वाले हैं. हिरासत में लिए गए लोगों में जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं. रेड्डी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा, कानून व्यवस्था एवं शांति के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. जम्मू कश्मीर की सरकार ने खबर दी है कि घाटी में आवश्यक सेवाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं.'

मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार से मिली सूचना के अनुसार, पांच अगस्त 2019 के बाद से किसी भी व्यक्ति की कानून व्यवस्था की घटनाओं के दौरान पुलिस की गोलीबारी में मौत नहीं हुई. उन्होंने बताया, 'इस अवधि के दौरान कानून व्यवस्था संबंधी घटनाओं में 197 व्यक्ति घायल हुए. इसी अवधि में आतंकवाद संबंधी घटनाओं में तीन सुरक्षा कर्मी और 17 नागरिक मारे गए तथा 127 व्यक्ति घायल हुए.'
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जम्‍मू कश्‍मीर के लोग आतंकवाद से पीड़ित थे: रेड्डी
एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में रेड्डी ने बताया कि जम्मू कश्मीर के लोग पिछले कई दशकों से सीमा पार से मिल रहे समर्थन से चल रहे आतंकवाद एवं अलगाववाद से पीड़ित थे. उन्होंने कहा, 'अनुच्छेद 370 और कुछ अन्य संवैधानिक प्रावधानों के चलते इस क्षेत्र के लोग भारत के संविधान के तहत प्रदत्त पूर्ण अधिकारों एवं देश के अन्य नागरिकों को मिलने वाले लाभों से वंचित थे. यही वजह थी कि बीते 70 साल से जम्मू, कश्मीर तथा लद्दाख क्षेत्र का समुचित आर्थिक विकास भी नहीं हो पाया.'

रेड्डी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इन मुद्दों का समाधान हो गया और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी देश के दूसरे हिस्सों के नागरिकों की तरह ही अधिकार एवं लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया. मंत्री ने कहा, 'हाल ही में लिए गए इन फैसलों की वजह से कुछ ऐहतियाती कदम शुरू में उठाए गए जिनमें बाद में ढील दे दी गई. ये कदम अल्पकालिक थे और इनकी वजह से किसी तरह का नुकसान होने की कोई विशेष रिपोर्ट जम्मू कश्मीर सरकार से नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की सरकार वहां केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन कर रही है.

अमित शाह ने कहा कि जम्‍मू कश्‍मीर से आतंकवाद खत्‍म करने के लिए अनुच्‍छेद 370 हटाया गया.


अनुच्छेद 370 के रद्द होने के बाद पथराव के मामले घटे: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों के खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों पर पथराव की घटना में 40 से 45 प्रतिशत की कमी आई है. एक निजी टीवी चैनल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि प्रावधानों को खत्म करने में 70 साल लग गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे करने का संकल्प लिया.

पाक ने जम्‍मू कश्‍मीर के युवाओं को गुमराह किया
शाह ने कहा कि जब तक अनुच्छेद 370 के तहत प्रावधानों को रद्द नहीं किया जाता जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को हराना नामुमकिन था. गृहमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्र के युवाओं को गुमराह किया. उन्हें हथियार मुहैया कराए और आतंकवाद का प्रचार किया. उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान की कार्रवाई से तय होती है और अगर वो शांति चाहते हैं तो उन्हें आतंकवाद खत्म करना होगा. शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों की संख्या आज भी उतनी ही है जितनी यह 1990 से रही है. उन्होंने कहा कि वहां तैनात अतिरिक्त बलों को हटा लिया गया है.

उन्‍होंने ने कहा कि कश्मीर में अगस्त से अब तक पथराव की घटनाओं में 40-45 फीसदी की कमी आई है. संसद में पिछले सत्र के दौरान जम्मू कश्मीर पर विधेयक पेश करने के दौरान अपनी कड़ी प्रतिक्रिया के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनकी आक्रामकता किसी एक व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं बल्कि देश में सुरक्षा स्थिति के कुप्रबंधन के खिलाफ थी. नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोई और देश अपने यहां अवैध प्रवासियों को बसने नहीं देगा.

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First published: November 27, 2019, 8:15 PM IST
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