एक रात में 'बारिश के देवता' ने कैसे बदल दी कर्नाटक के किसान की किस्मत

एक रात में 'बारिश के देवता' ने कैसे बदल दी कर्नाटक के किसान की किस्मत
भारी बारिश ने कर्नाटक के एक किसान की किस्मत खोल दी. (फाइल फोटो)

अंजीनप्पा (Anjinappa) के लिए बारिश कोरोना काल में उम्मीद की किरण बनकर आई. इस बारिश ने उनकी चिंता कम से कम एक साल के लिए खत्म कर दी. अब उनके बाग में पेड़ों को पानी देने में कोई समस्या नहीं आने वाली है. वे दूसरे किसानों को भी रेनवाटर हार्वेस्टिंग अपनाने की सलाह देते हैं.

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बेंगलुरु. भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक (Karnataka) के तुमकुरू (Tumakuru) जिले में बीते रविवार रात हुई भारी बारिश (Heavy Rain) ने एक किसान की किस्मत बदल दी. ये बात सुनने में अजीब भले लगे, लेकिन सच है. दरअसल तुमकुरू के मधुगिरी तालुके के किसान अंजीनप्पा ने कुछ साल पहले ही एक बड़ा तालाब रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए खुदवाया था. इस तालाब में 1 करोड़ लीटर पानी संचित करने की क्षमता है. ये तालाब अंजीनप्पा ने अपने तीन बोरवेल सूखने के बाद बेहद मुश्किल हालात में खुदवाया था.

अंजीनप्पा ने की है इंजीनियरिंग की पढ़ाई
अंजीनप्पा ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कुछ साल पहले वो राज्य में खूब चर्चा में आए थे. दरअसल बागवानी विभाग ने उनके आम के बाग को टूरिजम के तौर पर बढ़ावा देने के लिए चुना था. अंजीनप्पा के पास आम का बड़ा बाग है. लेकिन उन्होंने अपने तीन बोरवेल सूखने के बाद करीब 13 लाख रुपए खर्च करके बड़ा तालाब खुदवाया जिससे पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जा सके. अंजीनप्पा कहना है कि एक रात की बारिश ने उनकी किस्मत खोल दी. दरअसल रविवार रात को हुई बारिश ने न सिर्फ उनका तालाब पूरा भर दिया बल्कि बोरवेल भी रिचार्ज हो गए हैं.

कोरोना से फूटी किस्मत पर उम्मीद बनकर बरसी बारिश
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक अंजीनप्पा ने कहा- इस साल कोरोना वायरस की वजह से मेरे बाग में सैलानियों के कार्यक्रम भी नहीं हुए. हमें इसकी वजह से काफी नुकसान हुआ. ऐसे कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में आम बिक जाते थे. हालांकि अब हम आमों की डोर टू डोर डेलिवरी कर रहे हैं. इस बीच सबसे बड़ी चिंता पानी की थी. बोरवेल सूखे हुए थे अगर बारिश नहीं होती तो यह तालाब भी सूखा ही रहता. मतलब कमाई का अंतिम आसरा भी खत्म हो जाता. अंजीनप्पा के लिए यह बारिश कोरोना काल में उम्मीद की किरण बनकर आई. इस बारिश ने उनकी चिंता कम से कम एक साल के लिए खत्म कर दी. अब उनके बाग में पेड़ों को पानी देने में कोई समस्या नहीं आने वाली है. वे दूसरे किसानों को भी रेनवाटर हार्वेस्टिंग अपनाने की सलाह देते हैं.
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