मानसून : कोरोना से पहले से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मी अब डेंगू-मलेरिया के प्रकोप के लिए कर रहे तैयारी

मानसून : कोरोना से पहले से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मी अब डेंगू-मलेरिया के प्रकोप के लिए कर रहे तैयारी
कोविड-19 टेस्ट के लिये लाइन में लगे लोगों की समस्याओं को सुनता एक स्वास्थ्यकर्मी (सांकेतिक फोटो, AP)

डेंगू (Dengue) बुखार और मलेरिया (Malaria) जैसी बीमारियां हर साल भारत में करीब 5 लाख लोगों को संक्रमित करती हैं और इनसे हर साल भारत में सैकड़ों लोगों की जान जाती है.

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मुंबई. पहले ही अस्पताल (Hospital) अपनी पूरी क्षमता के साथ भरे हुए हैं. अब इसी दौरान कोरोना वायरस (Coronavirus) से प्रभावित भारत, मानसून के साथ ही आने वाली सालाना मच्छरजनित बीमारियों (Mosquito-borne Diseases) के लिए तैयार हो रहा है. और इसमें उसका साथ देने के लिए है, पहले से ही थकी हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य कर्मियों (Public Health Workers) की एकमात्र सुरक्षा सेना.

डेंगू (Dengue) के बुखार और मलेरिया (Malaria) जैसी बीमारियां हर साल भारत में करीब 5 लाख लोगों को संक्रमित करती हैं और इनसे हर साल भारत में सैकड़ों लोगों की जान जाती है. ऐसे में मानसून वह बारिश तो लेकर आता ही है, जिसका किसानों और लोगों को बहुत अधिक इंतजार होता है लेकिन इसके साथ ही वह तबाही और बीमारियां भी लेकर आता है.

'भारत के सार्वजनिक अस्पताल भारी बोझ उठाने के आदी लेकिन कोविड-19 ने खराब की हालत'
लंबे समय से कम बजट में काम चला रही भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का तीन दशकों से ज्यादा समय से एक डॉक्टर के तौर पर अनुभव रखने वाली विद्या ठाकुर, जो वर्तमान में मुंबई के राजावाड़ी हॉस्पिटल में मेडिकल सुपइंटेंडेंट हैं, कहती हैं- "यह भारी बोझ उठाने का आदी है."
वे कहती हैं, "लेकिन अब कोविड-19 ने हमें कुछ न कर सकने की हालत में ला दिया है... और मानसून चीजों को और भी ज्यादा कठिन बना देगा." जहां वो काम करती हैं, उस 580 बेड वाले सरकारी अस्पताल का हर कोना पहले ही महामारी से ल़ड़ रहे मरीजों को दिया जा चुका है. कॉरिडोर में बेड डाले गये हैं, स्टोरेज रूम को वॉर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, यहां तक कि स्टाफ भी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.



पहले से बीमारियों से पीड़ित और बुजुर्ग डॉक्टर संक्रमण के डर से मरीजों से दूर
मुंबई के ही बड़े लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल, जिसे चर्चित तौर पर सिऑन (Sion) नाम से जाना जाता है के मेडिकल रेजिडेंट शरीवा रनादिवे ने बताया कि वहां पर मेडिकल के अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स को मरीजों के इलाज में लगा दिया गया है.

कई सारे अनुभवी डॉक्टर और नर्सें इस मामले से दूर हैं क्योंकि वे वायरस के संक्रमण से गंभीर तरह से प्रभावित हो सकते हैं. इसकी वजह या तो उनकी उम्र है या तो उनका पहले से डायबिटीज जैसे रोगों से संक्रमित होना. ठाकुर कहते हैं, "सभी लगातार काम कर रहे हैं... हम थक चुके हैं."

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