लाइव टीवी

लॉकडाउन इफेक्ट: कभी विक्टोरिया मेमोरियल की शान होते थे ये घोड़े, आज चारे के लिए तरसे

भाषा
Updated: April 5, 2020, 7:48 PM IST
लॉकडाउन इफेक्ट: कभी विक्टोरिया मेमोरियल की शान होते थे ये घोड़े, आज चारे के लिए तरसे
कोलकाता में बग्घी की सवारी कराने वाले घोड़ों को उनके हाल पर छोड़ा गया (फाइल फोटो)

एक अधिकारी ने बताया, 'आम दिनों में 100 से अधिक घोड़े पयर्टकों को विक्टोरिया मेमोरियल के आसपास के इलाकों की सैर कराते हैं, लेकिन अब इनमें से कई को ऐसे ही छोड़ दिया गया है.'

  • Share this:
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता की यात्रा भव्य विक्टोरिया मेमोरियल (Victoria Memorial) को देखने और उसके आसपास घोड़ागाड़ी की सवारी के बिना पूरी नहीं होती, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद लागू लॉकडाउन (Lockdown) में दिल दहला देने वाली तस्वीर देखने को मिली. यहां घोड़ों को उनकी हाल पर छोड़ दिया गया है और चारे के अभाव में कई घोड़े कमजोर हो गए हैं.

पीपल फॉर एनिमल (पीएफए) के वरिष्ठ सदस्य अजय दागा ने बताया कि आम दिनों में 100 से अधिक घोड़े पयर्टकों को विक्टोरिया मेमोरियल के आसपास के इलाकों की सैर कराते हैं लेकिन अब इनमें से कई को ऐसे ही छोड़ दिया गया है. उन्होंने रविवार को बताया कि स्थिति सामान्य होने तक इन घोड़ों को चारा खिलाने के लिए गैर सरकारी संगठन आगे आया है.

लॉकडाउन की वजह से गांव भाग गए मालिक



दागा ने कहा, ‘‘ शुक्रवार को सांसद मेनका गांधी (Maneka Gandhi) का फोन आया था और उन्होंने घोड़ों की स्थिति के बारे में जानकारी ली. उन्होंने बताया कि पशु प्रेमी पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिया है कि वह इन जानवरों की देखभाल में जब भी जरूरत होगी पीएफए की मदद करेंगी. दागा ने बताया, ‘मौजूदा समय में पीएफए घोड़ों के चारे का इंतजाम लोगों द्वारा दान मे मिली मदद से कर रहा है. उन्होंने बताया कि घोड़ों के कुछ मालिक लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही इन्हें छोड़कर उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित अपने गांव चले गए हैं जबकि कुछ यहीं हैं लेकिन कुछ ही घोड़ों की देखभाल कर रहे हैं.



रोजाना 15 हजार का चारा खाते हैं घोड़े

घोड़ागाड़ी के मालिक सलीम ने कहा, ‘लॉकडाउन समाप्त होने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी पर कौन बैठेगा क्योंकि कुछ समय तक कोई पर्यटक नहीं आएगा.’ दागा ने बताया कि पीएफए के पास घोड़ों को केवल अगले सात दिनों तक ही चारा देने का पैसा है. उन्होंने बताया कि घोड़ों के चारे पर रोजाना 15,000 रुपये का खर्च आ रहा है.

दागा ने बताया कि पीएफए के न्यासी और इमामी समूह के संयुक्त अध्यक्ष आरएस गोयनका ने जरूरत पड़ने पर मदद का भरोसा दिया है. स्थानीय पार्षद सुष्मिता भट्टाचार्य ने बताया कि कोलकाता नगर निगम विक्टोरिया मेमोरियल के पास घोड़ों के पानी पीने के लिए बने नाद को भरवा रही हैं. उन्होंने बताया, ‘‘ मुझे पश्चिम बंगाल के सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी से फोन आया और उन्होंने घोड़ों की जानकारी ली और उनकी देखभाल का भरोसा दिया.’’

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 5, 2020, 7:48 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading