‘ऑक्सीजन कंसनट्रेटर’ मशीन से बनेगी मेडिकल ऑक्सीजन, केंद्र सरकार से मिली एक हजार मशीनें

‘ऑक्सीजन कंसनट्रेटर’ मशीन से बनेगी मेडिकल ऑक्सीजन, केंद्र सरकार से मिली एक हजार मशीनें
‘ऑक्सीजन कंसनट्रेटर’ मशीन से प्रति मिनट 5 लीटर मेडिकल ऑक्सीजन बनाई जा सकती है.

कोरोना (Corona) के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार (MP Govt) ने तकनीक और सुविधा (Facility) का तालमेल बिठाकर बेहतर इलाज देने की कोशिश शुरू कर दी है. केंद्र सरकार से मिली एक हजार ‘ऑक्सीजन कंसनट्रेटर’ (Oxygen concentrator) मशीन का भी वितरण जरूरत के हिसाब से कर दिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2020, 1:11 PM IST
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भोपाल. देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पिछले 24 घंटे में कोरोना के 95,000 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं. मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर और आस-पास के इलाकों में भी कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी आई है. इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए इलाज में उपयोग किए जाने वाले मेडिकल उपकरण भेजने में तेजी लाई गई है.

इसी क्रम में कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी ‘मेडिकल ऑक्सीजन’ अब सीधे हवा से ली जाएगी, जिसके लिए हर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने ‘ऑक्सीजन कंसनट्रेटर’ मशीन भेजी है, जो सीधे हवा से प्रति मिनट पांच लीटर मेडिकल ऑक्सीजन बनाएगी. साथ ही यह मशीन दो मरीजों के काम आ सकेंगी.

स्वास्थ्य विभाग ने एक जिले में कम से कम दो और अधिकतम 20 मशीनें उपलब्ध कराने की योजना बनाई है. शनिवार को 400 और मशीनें जिलों व मेडिकल कॉलेजों में जाएंगी. जो जरूरत के आधार पर जिलों में वितरित की जाएंगी. सरकार का ऐसा मानना है कि किसी भी इमरजेंसी में यह मशीन मरीज को लाभ दे सकती है. मेडिकल ऑक्सीजन की संभावित दिक्कत को देखते हुए केंद्र ने मप्र को एक हजार मशीनें दी हैं.



प्रमुख जिले में कितनी मशीन दी गई
भोपाल में 3, इंदौर में 2, जबलपुर में 9, ग्वालियर 2, उज्जैन में 5 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर मशीन उपलब्ध कराई है.

यहां सर्वाधिक भेजी गई मशीन
वहीं स्वास्थ्य विभाग ने छतरपुर में 23, शहडोल में 20, बालाघाट में 18, गुना में 17, दमोह में 16, शिवपुरी, सतना,राजगढ़ और नरसिंहपुर में 15 मशीनें उपलब्ध कराई है. आपको बता दे इन जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर है, और बड़े शहरों से इनकी कनेक्टिविटी भी दूर है.

वहीं दूसरी ओर इंदौर और आस-पास के इलाकों में कोरोना से पीड़ित गंभीर मरीज हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ सकती है. इसलिए जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है कि अब से ऑक्सीजन की आपूर्ति सिर्फ अस्पतालों के लिए ही होगी, इसका मतलब यह है कि औद्योगिक इकाइयों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा सकेगी. लगातार बढ़ते कोरोना मरीज और उनके लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता में आ रही कमी के मद्देनजर कलेक्टर ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. अब ऑक्सीजन का औद्योगिक उपयोग प्रतिबंधित रहेगा, सिर्फ मेडिकल के लिए ही हो सकेगा. औषधि निरीक्षक राजेश जीनवाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है जो इस आदेश का पालन सख्ती से करवाएंगे.

बता दें कि मौजूदा समय में लॉकडाउन की समाप्ति हो चुकी है और अनलॉक शुरू हो गया है. इसके मद्देनजर उद्योगों में काम होना शुरू हो जाएगा, जिससे कोरोना के और मामले आने की संभावना बढ़ गई है. यही वजह से भविष्य में कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में बढ़ोतरी हो सकती है.
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