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Aircel Maxis Case: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे को राहत, कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत

बाप-बेटे बेटे दोनों को राहत मिल गई है

बाप-बेटे बेटे दोनों को राहत मिल गई है

CBI ने इस मामले में चिदंबरम (P Chidambaram) समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 11 व्यक्ति और सात कंपनियां हैं. ये पूरा मामला 2006 का है जब चिदंबरम देश के वित्त मंत्री (Finance Minister) थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2019, 3:27 PM IST
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नई दिल्ली. एयरसेल मैक्सिस केस (Aircel Maxis Case) में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम (P Chidambaram) और उनके बेटे कार्ति चिदम्बरम को राहत मिल गई है. इन दोनों को कोर्ट ने एक-एक लाख के निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दे दी. जज ओ पी सैनी ने इन दोनों को जांच में एजेंसी का सहयोग करने के लिए कहा है. सीबीआई और ईडी दोनों एयरसेल मैक्सिस केस की जांच कर रहे हैं. सीबीआई ने इस मामले में चिदंबरम समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 11 व्यक्ति और सात कंपनियां हैं. ये पूरा मामला 2006 का है जब चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे.

क्या हुआ कोर्ट में
राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल जज ओ पी सैनी ने अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि दोनों आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा साथ ही एविडेंस के साथ वो छेड़छाड़ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी अग्रिम जमानत तुरन्त रद्द कर दी जाएगी. आपको बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान ईडी और सीबीआई ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब कभी भी कार्ति विदेश जाते है वो एविडेंस को नष्ट करने की कोशिश करते हैं.

आईएनएक्स मीडिया केस में राहत
इससे पहले आज आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम को झटका लगा था. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. ऐसे में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) कभी भी उन्हें हिरासत में ले सकता है. ईडी ने दावा किया है कि उनके पास चिदंबरम के खिलाफ ठोस सबूत हैं.



क्या है एयरसेल मैक्सिस केस?
ये केस फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIBP ) से जुड़ा है. 2006 में एयरसेल-मैक्सिस डील को पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए मंजूरी दी थी. इसके तहत 3500 करोड़ की एफडीआई को मंजूरी दी गई थी. आरोप है कि पी चिदंबरम के पास 600 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्‍ट प्रपोजल्‍स को ही मंजूरी देने का अधिकार था. इससे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए उन्हें आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी जरूरी थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

सुब्रमण्यम स्वामी ने केस का किया था खुलासा
साल 2015 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की अलग-अलग कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया था. स्वामी ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए पी. चिदंबरम ने अपने बेटे कार्ति की एयरसेल-मैक्सिस डील से फायदा उठाने में मदद की थी. इसके लिए उन्होंने दस्तावेजों को जानबूझकर रोका और अधिग्रहण प्रक्रिया को नियंत्रित किया ताकि कार्ति को अपनी कंपनियों के शेयर की कीमत बढ़ाने का वक्त मिल जाए.

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