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चिदंबरम ने कोर्ट में कहा- अपने फायदे के लिए नहीं किया वित्त मंत्री के पद का इस्तेमाल

भाषा
Updated: November 4, 2019, 9:31 PM IST
चिदंबरम ने कोर्ट में कहा- अपने फायदे के लिए नहीं किया वित्त मंत्री के पद का इस्तेमाल
चिदंबरम ने कोर्ट में वित्त मंत्री के पद का दुरुपयोग करने से इंकार किया है.

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने जमानत याचिका के जवाब में कहा कि चिदंबरम (Chidambaram) द्वारा कथित तौर पर किये गये अपराध की गंभीरता के मद्देनजर और देश के उच्च पद का अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए दुरूपयोग करना उन्हें अदालत से कोई राहत पाने का हकदार नहीं बनाता है.

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नई दिल्ली. आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले (INX Media Money Laundering Case) में गिरफ्तार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के उस दावे का खंडन किया कि उन्होंने वित्त मंत्री के पद का अपने व्यक्तिगत लाभों के लिए इस्तेमाल किया था.

चिदंबरम ने कहा कि अब तक अदालत के समक्ष रखे गये किसी भी साक्ष्य से इस कथित अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनकी संलिप्तता नहीं दिखती है. उन्होंने कहा कि ईडी के जमानत का विरोध करने का उद्देश्य न्याय के लिए आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना है, जिसे 21 अगस्त से 75 दिनों की हिरासत के बाद पहले ही गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया जा चुका है.

धनशोधन मामले में उनकी जमानत याचिका पर ईडी के जवाब में दाखिल किये गये ‘रिज्वाइंडर’ में 74 वर्षीय नेता ने ये दलीलें दी है. न्यायमूर्ति सुरेश कैत के समक्ष सोमवार को सुनवाई के लिए यह मामला सूचीबद्ध था. न्यायमूर्ति कैत ने मामले की सुनवाई बुधवार को तय कर दी क्योंकि दो नवम्बर को तीस हजारी अदालत (Tis Hazari Court) परिसर में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के मद्देनजर वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था.

चिदंबरम ने ईडी के दावे को किया खारिज

वकीलों अमित महाजन और रजत नायर के जरिये दाखिल किये अपने लिखित जवाब में ईडी ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि चिदंबरम द्वारा कथित तौर पर किये गये अपराध की गंभीरता उन्हें राहत पाने का हकदार नहीं बनाती है. अपने ‘रिज्वाइंडर’ में चिदंबरम ने ईडी के इस दावे को खारिज किया कि यह मामला आर्थिक अपराध का है.

वकील अर्शदीप सिंह के जरिये दाखिल किये गये चिदंबरम के ‘रिज्वाइंडर’ में कहा गया है कि अब तक उच्च न्यायालय में रखे गये किसी भी साक्ष्य से धनशोधन के कथित अपराध में उनके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा होना नहीं दिखता है. चिदंबरम ईडी के धनशोधन मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद है.

चिदंबरम को है ये बीमारी
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 22 अक्टूबर को चिदंबरम को जमानत दे दी थी. उच्च न्यायालय ने एक नवम्बर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) के निदेशक से एक मेडिकल बोर्ड का गठन करके चिदंबरम के स्वास्थ्य पर जानकारी देने के लिए कहा था. चिदंबरम आंतों से जुड़ी बीमारी ‘क्रोहन’ से पीड़ित हैं. क्रोहन आंतों से जुड़ी एक बीमारी है. इसके लक्षणों में पेट में दर्द, दस्त और वजन घटना शामिल है.

उच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को चिदंबरम को स्वच्छ परिवेश, मिनरल वाटर, घर का बना भोजन और मच्छरदानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे.

ईडी ने जमानत याचिका के जवाब में कहा कि चिदंबरम द्वारा कथित तौर पर किये गये अपराध की गंभीरता के मद्देनजर और देश के उच्च पद का अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए दुरूपयोग करना उन्हें अदालत से कोई राहत पाने का हकदार नहीं बनाता है.

सबूत से सामने आई ये बात
एजेंसी ने कहा कि जांच में इकट्ठा किये गये साक्ष्यों से पता चलता है कि यह स्पष्ट रूप से धनशोधन का मामला है जिसमें चिदंबरम, उनके पुत्र कार्ति और अन्य की संलिप्तता है. चिदंबरम ने इससे पहले धनशोधन मामले में उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत दिये जाने का अनुरोध किया था. उच्च न्यायालय ने हालांकि उनकी याचिका खारिज कर दी थी. इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई और शीर्ष अदालत ने भी उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था. ईडी ने चिदंबरम को धनशोधन मामले में 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था.

यह मामला 2007 में वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी में हुयी कथित अनियमितताओं से संबंधित है. सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 18 अक्टूबर को दायर अपने आरोप पत्र में चिदंबरम और अन्य के नाम लिये थे.

निचली अदालत ने 21 अक्टूबर को आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था और इसके बाद 22 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने मामले में उन्हें नियमित जमानत दे दी थी. चिदंबरम ने अपनी जमानत याचिका में दलील दी थी कि सीबीआई और ईडी के मामले एक ही वित्तीय लेन-देन से संबंधित है इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग हिरासत में नहीं लिया जा सकता है.

याचिका में कहा गया है कि मामले में सभी सबूत दस्तावेजी है और वे जांच एजेंसियों के पास है, इसलिए वह (चिदंबरम) इसमें छेड़छाड़ नहीं कर सकते है.

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First published: November 4, 2019, 9:31 PM IST
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