पानी की कहानी: एक घड़ा पानी भरने के लिए कोसो दूर की यात्रा करते हैं इस गांव के लोग

महाराष्ट्र के अंबरनाथ शहर के छाया अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है, इसकी वजह सिर्फ एक गंदा पानी है.

News18Hindi
Updated: May 18, 2018, 2:58 PM IST
पानी की कहानी: एक घड़ा पानी भरने के लिए कोसो दूर की यात्रा करते हैं इस गांव के लोग
कुएं की तली पर लगा गंदा पानी पीने को मजबूर हैं लोग
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Updated: May 18, 2018, 2:58 PM IST
आशीष दीक्षित

जिस पानी से आप हाथ भी नहीं धोएंगे उस पानी को पीने के लिए हजारों आदिवासी गांव वाले मजबूर हैं लेकिन यह पानी अब जानलेवा हो गया है, तली में लगा पानी सड़ने लगा है और इसे पीकर गांव वाले हर रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं. पानी का एक घड़ा भरने के लिए करीब 50 फीट नीचे कुएं में उतरकर इस गांव के लोग अपने परिवार के लिए पीने का पानी की भरते हैं, कड़कड़ाती धूप में नगे पैर कई कोस दूर चल कर इन्हें पीने के लिए ये जहरीला पानी ही मिलता है.

गांव में एक कुएं के अलावा कोई और पानी का साधन उपल्बध नही है. इस इलाके में दूर-दूर तक ना ही पानी का कोई कनेक्शन है और न ही पानी के टैंकर की सुविधा उपलब्ध है. इसीलिए गांव के लोग सालों से यही सड़ा हुआ पानी इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं. गांव की महिलाएं बताती हैं कि गांव में पानी का कोई कनेक्शन न होने के कारण हम कई पीड़ियों से यह पानी पी रहे है लेकिन अब ये पानी जानलेवा बनता जा रहा है.

गंदा पानी पीने से बीमार पड़ रहें लोग

अंबरनाथ शहर के छाया अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है, इसकी वजह सिर्फ ये गंदा पानी है. कॉलेज से निकलकर नौकरी की तलाश कर रही सायली इन दिनों अस्पताल में अपना इलाज करा रही हैं, सायली को कुछ दिन पहले अचानक पेट में दर्द और बुखार होने लगा, जब वो इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंची तो वो ये देखकर दंग रह गई कि, अस्पताल में उन्हीं के गांव के एक नहीं दो नहीं 21 से ज्यादा लोग गंदा पानी पीने के कारण बिमार पड़ गए हैं.

इस भयानक हादसे का सच जानने के लिए न्यूज18 की टीम जवसाई गांव के उसी कुएं के पास पहुंची हमने जो देखा वो देख कर आंखे खुली की खुली रह गई, अस्पताल में इलाज करा रहे 21 लोगों के बावजूद गांव वाले आज भी उसी गंदे पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं. गंदे पानी के वजह से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही थी, मरीजों की बढती संख्या और मीडिया के जमावड़े को देख अचानक सोए हुए नेता और पालिका अधिकारियों की नींद खुली. अब उम्मीद यही है कि ये हादसा दोबारा न हो और सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठाए.

डैम के पास पर पानी से दूर...

जो पानी 50 किलोमीटर दूर मुंबई में बैठे लोगों की प्यास बुझाता है उसी पानी के लिए महज 5 किलोमीटर दूर जवसाई गांव के लोग तरस रहे हैं. सुनने में थोडा अटपटा लगे लेकिन अंबरनाथ के चिखलोली डैम से पांच किलोमीटर दूर के जवसाई गांव के लोगों की दर्दभरी दास्तान हम आपको बताने जा रहे हैं.

मुंबई से महज 50 किलोमीटर दूर अंबरनाथ शहर का चिखलोली डैम से अंबरनाथ और आस पास के कई शहरों को पानी सप्लाई किया जाता है, कहीं कडाके की धूप में डैम के पानी में डुबकी लगाने का आनंद लेते बच्चे तो कहीं डैम के पास कपडे धोती महिलाएं, डैम का पानी लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है, पानी से लबालब भरे डैम को देखकर आप थोड़ी राहत महसूस कर रहें होंगे लेकिन इस डैम से महज पांच किलोमीटर दूर के एक आदिवासी गांव की दास्तान सुनकर आप सहम जाएंगे.

डैम से चोरी छुपे पानी के टैंकर तो भरे जाते हैं पर पास के जवसाई-ठाकुरपाड़ा गांव तक ये टैंकर बड़ी मुश्किल से पहुंच पाते हैं. 800 से ज्यादा आबादी वाले इस गांव के लोग पिछले कई सालों से पानी के लिए तरस रहे हैं, पीने के पानी के नाम पर एक कुएं के अलावा इन लोगों के पास कोई और विकल्प नहीं है.

सरकार और प्रशासन की चुप्पी

कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुके इन लोगों ने अब गांव में पानी आने की उम्मीद छोड़ दी है. गांव में पानी के लिए कई मोर्चे निकाले गए, कई बार भूख हड़ताल की गई सरकार और प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिए गए लेकिन ये सारे आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं. गंदे पानी के कारण 21 से ज्यादा लोग फूड पॉयजनिंग का शिकार हुए, खबर सामने आने पर अधिकारियों की नींद खुली, अस्पताल में मरीजों से मिलने के लिए नेताओं और पालिका अधिकारियों की भीड़ लग गई.

सावल पूछे जाने पर अधिकारियों ने पालिका की तरफ से टैंकर भेजने, पानी को दवा डालकर साफ करने का आश्वासन देते हुए सारे आरोप महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजीपी) के मत्थे मढ़ने का काम कर दिया.  महाराष्ट्र सरकार भले ही स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयास कर रही हो लेकिन सच तो यह है कि गांवों में लोग आज भी पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं.
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