पेंटर, शिल्पकार जरीना हाशमी का लंबी बीमारी के बाद लंदन में निधन

पेंटर, शिल्पकार जरीना हाशमी का लंबी बीमारी के बाद लंदन में निधन
भारतीय पेंटर, शिल्पकार जरीना हाशमी का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को लंदन में निधन हो गया (फाइल फोटो, Twitter)

दिल्ली (Delhi) में एक आर्ट गैलरी (Art Gallery) की संचालक और हाशमी की मित्र रेणु मोदी ने बताया, ‘‘लंबी बीमारी के बाद लंदन (London) में उनकी मृत्यु हो गई. वह शांति से गईं. वहां वह भांजी-भांजे के साथ रह रही थीं.’’

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  • Last Updated: April 26, 2020, 8:10 PM IST
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नई दिल्ली. न्यूयॉर्क (New York) में रहने वाली भारतीय पेंटर, शिल्पकार जरीना हाशमी (Indian painter, craftsman Zarina Hashmi) का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को लंदन (London) में उनकी भांजी के आवास पर निधन हो गया. वह 83 वर्ष की थीं.

दिल्ली (Delhi) में एक आर्ट गैलरी (Art Gallery) की संचालक और हाशमी की मित्र रेणु मोदी ने बताया, ‘‘लंबी बीमारी के बाद लंदन (London) में उनकी मृत्यु हो गई. वह शांति से गईं. वहां वह भांजी-भांजे के साथ रह रही थीं.’’

'हाशमी के काम में देश के विभाजन और निर्वासन की त्रासदी खूब नजर आती है'
करीब दो दशक से हाशमी से जुड़ीं मोदी का कहना है कि इस क्षति को आंकना मुश्किल है. अलीगढ़ (Aligarh) में 1937 मे जन्मीं हाशमी के काम में देश के विभाजन (Partition) और निर्वासन की त्रासदी खूब नजर आती है.
भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Services) के अधिकारी साद हाशमी से विवाह (marriage) के बाद वह देश-दुनिया घूमीं, अलग-अलग शहरों में रहीं.



अपने इन कामों के लिए चर्चित रही हैं जरीना हाशमी
जिन जगहों पर वह रहती थीं, वहां तो वे रहती ही थीं, वे अपनी कलाकृतियों में भी रहती थीं. अगर 1997 की श्रृंखला 'होम्स आई मेड / ए लाइफ इन नाइन लाइन्स’ में उन घरों की रफ़ फ़्लोर योजनाएं थीं, जिनमें वे रहीं. 1999 में  'होम इज़ ए फॉरेन प्लेस’ नाम से उनके अलीगढ़ (Aligarh) के घर का एक प्रतिचित्रण आया. 2004 का काम 'लेटर्स फ्रॉम होम ’उनकी बहन रानी द्वारा उनके लिए लिखे गए अप्रकाशित पत्रों पर आधारित था, और वर्षों बाद प्रकाशित किया गया.

वुडब्लॉक और मेटल कट्स में चित्रित नक्शे, फ़्लोरप्लान और उर्दू पाठ को हाशमी के अभ्यास का एक अभिन्न अंग बनाया. फोटोग्राफर और कार्यकर्ता राम रहमान कहते हैं, जो हाशमी के करीबी दोस्त हैं, “वह एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और जमकर स्वतंत्र महिला थीं. दिल्ली (Delhi) में, उन्होंने उड़ना सीखा और ग्लाइडिंग क्लब की सदस्य थीं, उनके नक्शे का बहुत काम उस अनुभव से संबंधित है. उसमें एक न्यूनतम की चाह थी. उनके पास सौंदर्य और दर्शन की परिष्कृत संवेदनशीलता थी. विश्व सिनेमा की एक महान प्रशंसक, उन्होंने फ्रेंच, उर्दू साहित्य और कविता में दर्शन सहित बहुत कुछ पढ़ा.” (भाषा के इनपुट सहित)

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