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पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने भारत से रिश्तों पर दिया बड़ा बयान, साबित हो सकता है टर्निंग प्वाइंट

शांति के मुद्दे पर जनरल कमर जावेद बाजवा ने पहला कदम उठा लिया है. अब भारत को फैसला करना है. (फाइल फोटो)
शांति के मुद्दे पर जनरल कमर जावेद बाजवा ने पहला कदम उठा लिया है. अब भारत को फैसला करना है. (फाइल फोटो)

India-Pak Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति की कोशिश की. 25 दिसंबर 2015 को दोनों देशों के बीच हुई मुलाकात के कुछ दिनों बाद ही जैश-ए-मोहम्मद ने पठानकोट एयरबेस पर हमला कर दिया. इससे यह साफ हो गया था कि वे शांति नहीं, युद्ध चाहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 5:08 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (General Qamar Javed Bajwa) भारत के साथ शांति की बात कर रहे हैं. उनकी बातों से लग रहा है कि उन्होंने कश्मीर (Kashmir) का राग छोड़कर पड़ोसी के साथ संबंधों को बेहतर करने पर विचार करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा है कि वो 'शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व' (Peaceful Coexistence) चाहते हैं. हालांकि, अगर वो अपनी बात का मतलब समझते हैं, तो ये दोनों देशों के बीच रिश्तों में टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

रावलपिंडी में पाकिस्तान एयरफोर्स अकादमी में ग्रेजुएशन डे संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, 'सभी दिशाओं में शांति का हाथ बढ़ाने का समय है.' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान और भारत को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए.' हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि पाकिस्तान की शांति की चाहत को कोई भी कमजोरी न समझे. बाजवा का यह बयान काफी मायने रखता है. कोई भी युद्ध नहीं चाहता. सभी शांति और विकास चाहते हैं. लेकिन असल तथ्य यह है कि तीन युद्ध हारने के बाद पाक तीन दशकों से भारत से जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में प्रॉक्सी वॉर कर रहा है.

पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए आतंकवादी भारत की जमीन का एक इंच भी हासिल नहीं कर सके. मरने के बाद उन्होंने उनके ही देश ने नहीं स्वीकारा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शांति की कोशिश की. 25 दिसंबर 2015 को दोनों देशों के बीच हुई मुलाकात के कुछ दिनों बाद ही जैश-ए-मोहम्मद ने पठानकोट एयरबेस पर हमला कर दिया. इससे यह साफ हो गया था कि वे शांति नहीं, युद्ध चाहते हैं. इसके बाद जैश के आतंकियों ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमला किया. इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.



हालांकि, भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक (Balakot Airstrike) कर बदला ले लिया था. लेकिन पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के प्रति भारत का रुख पूरी तरह बदल गया. अब अगर पाक एक गोली दागता है, तो भारतीय सेना पांच गोलियों के साथ जवाब देती है. पाकिस्तान को यह बात दिमाग में रखने की जरूरत है कि वो महज 7 दिनों तक भी युद्ध करने के लायक नहीं है.
यह भी पढ़ें: भारत की सख्ती से पाकिस्तान पस्त, जनरल जावेद बाजवा ने अलापा शांति का राग

पाक सेना कर सकती है शांति में मदद
5 अगस्त 2019 के बाद यह पहला मौका है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने शांति की बात कही है. अगर वो वाकई अपनी बात पर गंभीर हैं, तो एक मौका दिया जाना चाहिए. पूरा विश्व इस बात को जानता है कि सेना पाकिस्तान को चलाती है. वहां राजनेता कठपुतली हैं. अगर बाजवा शांति चाहते हैं, तो उन्हें काम करना होगा. पाक को अपनी जमीन पर सभी आतंकी गढ़ों को समाप्त करना होगा और उन लोगों का समर्थन करना बंद करना होगा, जो हिंसा की बात करते हैं. इस काम में बाजवा अहम भूमिका निभा सकते हैं.

उनका देश कई मुद्दों से जूझ रहा है और युद्ध करने के लायक नहीं है. पाकिस्तान को बचाने के लिए बाजवा को कड़े कदम उठाने होंगे और कश्मीर के बारे में बात करना बंद करना होगा. शांति के बारे में बात करना उन्हीं के देश के लिए फायदेमंद है. कोविड दौर खत्म होने को है और भारत का अगला एजेंडा पीओके हो सकता है.

हालांकि, शांति के मुद्दे पर बाजवा ने पहला कदम उठा लिया है. अब भारत को फैसला करना है. भारत को पाक पर दबाव कम कर बाजवा को मौका देना चाहिए. इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के कुछ महीनों बाद ही ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर शुरू कर दिया गया था. इस दौरान भी बाजवा ने बड़ी भूमिका अदा की थी. दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बाद भी उन्होंने इसे खोलने में आपत्ति नहीं जताई.
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