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आतंक पर एक्शन लेने में फिर फिसड्डी निकला पाक, कोर्ट ने रिहा किए लश्कर और JUD के 6 आतंकी

आतंक पर एक्शन लेने में फिर फिसड्डी निकला पाक, कोर्ट ने रिहा किए लश्कर और JUD के 6 आतंकी

ट्रायल कोर्ट ने 6 नेताओं को 9 साल के कारावास की सजा सुनाई थी. इन नेताओं में प्रोफेसर मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद, नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर शामिल थे.

ट्रायल कोर्ट ने 6 नेताओं को 9 साल के कारावास की सजा सुनाई थी. इन नेताओं में प्रोफेसर मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद, नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर शामिल थे.

लाहौर हाईकोर्ट ने जमात-उद-दावा के आतंकियों को ऐसे समय में बरी किया है जब पूरे विश्व की निगाहें आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान पर ही है. मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाले वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है. वहीं, पाकिस्तान के हमदम दोस्त और धार्मिक गुरू तुर्की को भी एफएटीएफ ने ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया है.

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    लाहौर. दुनिया के सामने पाकिस्तान का नापाक चेहरा एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट ने शनिवार को एक निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद (Hafiz Saeed) के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (JuD) के छह आतंकियों को एक टेरर फाइनेंसिंग के मामले में बरी कर दिया है. पाकिस्तान की निचली अदालत ने  इन सभी को दोषी माना था. कोर्ट ने इसी साल अप्रैल में जमात-उद-दावा के सदस्यों- प्रो. मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद (जेयूडी का प्रवक्ता), नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर को नौ साल की जेल की सजा और हाफिज अब्दुल रहमान मक्की (सईद के साले) को छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी.

    ये फैसला पंजाब पुलिस के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद लिया गया था. मामले की सुनवाई में ये साबित हो गया था कि सभी लोग टेरर फाइनेंसिंग के लिए जिम्मेदार हैं. इसके बाद अपीलकर्ताओं ने एलएचसी की एक खंडपीठ के समक्ष अपनी सजा को चुनौती दी थी. लाहौर हाईकोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश मुहम्मद अमीर भट्टी और न्यायमूर्ति तारिक सलीम शेख शामिल हैं. उनके वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ताओं के खिलाफ उचित संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा. उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने उन सबूतों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जिसके कारण न्याय नहीं हो पाया.

    लाहौर हाईकोर्ट ने जमात-उद-दावा के आतंकियों को ऐसे समय में बरी किया है जब पूरे विश्व की निगाहें आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान पर ही है. मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाले वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है. वहीं, पाकिस्तान के हमदम दोस्त और धार्मिक गुरू तुर्की को भी एफएटीएफ ने ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया है. एफएटीएफ प्रमुख मार्कस प्लेयर ने कहा कि पाकिस्तान अब भी अतिरिक्त मॉनिटरिंग वाली ग्रे लिस्ट में मौजूद है. पाकिस्तान ने एफएटीएफ की 34 सूत्रीय एजेंडे में से 4 पर अबतक कोई काम नहीं किया है.

    मुंबई हमले में मारे गए थे 160 से ज्यादा लोग
    बता दें कि लश्कर-ए-तैयबा ने साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों की साजिश रची थी जिसमें 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे. हमले में मरने वाले लोगों में 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे. वहीं सईद के जमात-उद-दावा का कनेक्शन आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है.

    Tags: Hafiz Saeed, Pakistan

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