अपना शहर चुनें

States

नागरोटा मुठभेड़ में थी पाकिस्तान की मिलीभगत! आतंकियों के गेजेट्स से हुआ बड़ा खुलासा

कश्मीर के नगरोटा में सुरक्षा बलों ने सीमा पार से आए चार आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया था. (PTI फोटो)
कश्मीर के नगरोटा में सुरक्षा बलों ने सीमा पार से आए चार आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया था. (PTI फोटो)

Jammu Kashmir: 19 नवंबर को मारे गए आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार उपकरणों की तुलना करने वाले सुरक्षा अधिकारियों ने इस साल जनवरी में आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए गैजेट्स के साथ कई समानताएं पाईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 5:40 AM IST
  • Share this:
श्रीनगर. जम्मू (Jammu) के बान टोल प्लाजा (Ban Toll Plaza) पर 19 नवंबर को मारे गए जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के चार आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल की गई कम्युनिकेशन डिवाइस के इस बात का खुलासा हुआ है कि 31 जनवरी 2020 को हुई इसी तरह की घुसपैठ के पीछे पाकिस्तान (Pakistan) का हाथ था. घटना से परिचित लोगों ने इस बात की जानकारी दी है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी साल 31 जनवरी को, भारतीय सुरक्षाबलों (Indian Security Forces) ने एक ही टोल प्लाजा के पास जैश के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था और तड़के हुई एक मुठभेड़ में तीन भूमिगत सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तार लोगों में ट्रक का ड्राइवर समीर अहमद डार भी था.

डार, आदिल डार का चचेरा भाई था. आदिल डार ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा (Pulwama Attack) में सीआरपीएफ जवानों (CRPF Jawans) से भरी बस पर विस्फोटक से भरी मारूति ईको गाड़ी से टक्कर मार दी थी. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत हो गई थी. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि 19 नवंबरको नगरोटा मुठभेड़ (Nagrota Encounter) की जांच में जैश आतंकियों के दो समूहों द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार उपकरणों में समानताएं मिली हैं और ये बात भी दृढ़ता से सामने आई है कि सांबा बॉर्डर के पास शकरगढ़ के आतंकी शिविरों से जैश के आतंकियों की भारत में घुसपैठ की साजिश पाकिस्तान कर रहा था.

ये भी पढ़ें- Google Pay से अब फ्री में नही होगा मनी ट्रांसफर, यूजर्स को देना पड़ेगा चार्ज



सुरंग निर्माण देखकर जांचकर्ता भी हैरान
19 नवंबर को मारे गए चारों आतंकवादी पाकिस्तानी की तरफ से खोदी गई 200 मीटर लंबी सुरंग से भारत में दाखिल हुए थे. भारतीय जांचकर्ताओं ने जो आश्चर्यचकित किया है, वह इंजीनियरिंग विवरण है, जो अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 12 किमी दूर जाटवाल में पिक-अप बिंदु तक पहुंचने के लिए नगरोटा हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पिलर 189 पर सुरंग के निर्माण में किया गया था.

जाहिर तौर पर पाकिस्तानी रेंजरों की मदद से बनाई गई यह सुरंग 200 मीटर लंबी है, जिसमें आतंकियों के चलने और सीमा पार करने के लिए पर्याप्त जगह है. यह सुरंग पाकिस्तानी साइड एंट्री पॉइंट पर 40 मीटर लंबी है.

19 नवंबर को मारे गए आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार उपकरणों की तुलना करने वाले सुरक्षा अधिकारियों ने इस साल जनवरी में आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए गैजेट्स के साथ कई समानताएं पाईं.

ये भी पढे़ें- PM मोदी ने अजय देवगन की फिल्म का डायलॉग बोलकर कोरोना के खिलाफ चेताया

ये थीं समानताएं
दोनों अवसरों पर एक ही LMR सेट का उपयोग किया गया है और सीरियल नंबर एक ही सीरीज़ के थे. 31 जनवरी को LMR का सीरियल नंबर 908331P00059 था, जबकि 19 नवंबर को नंबर 908331P00058 था. दोनों सेट को "रेडियो उपनाम: फ्रीडम फाइटर" नाम दिया गया था. 31 जनवरी को उपयोग किए जाने वाले कॉल संकेत पी 1, पी 2, पी 4, पी 5, पी 55, जी 1 थे और 19 नवंबर को, संकेत पी 1, पी 55, पी 11 और पी 66 थे.

एक ही प्रकार के हाथ से पकड़े गए उपकरण का उपयोग घुसपैठ की घटना को चिह्नित करने के लिए दोनों घटनाओं में किया गया था. जांचकर्ताओं ने यह भी देखा कि दोनों जीपीएस उपकरणों को आतंकवादियों द्वारा उसी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया था जैसा कि उन्हें पाक हैंडलर्स द्वारा करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज