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तालिबान को मोहरा बनाकर पाकिस्तान ने चीन से हासिल किया मीडियम रेंज मिसाइल

तालिबान को मोहरा बनाकर पाकिस्तान ने चीन से हासिल किया मीडियम रेंज मिसाइल

पाकिस्तान को ये पता है कि मौजूदा हालात में चीन को भी तालिबान की जरूरत है.  (File pic)

पाकिस्तान को ये पता है कि मौजूदा हालात में चीन को भी तालिबान की जरूरत है. (File pic)

ऐसे में पाकिस्तान आर्मी अफगानिस्तान फोर्सेज के खिलाफ हमले में तालिबान को सपोर्ट देने के लिए एसएएम का इस्तेमाल कर सकती है. खास तौर से अफगान फोर्सेज को मिलने वाले एयर सपोर्ट को इसके जरिए टॉरगेट किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल कर सकता है.

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नई दिल्ली. तालिबान (Taliban) को मोहरा बनाकर पाकिस्तान ने चीन से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल हासिल कर लिया है. कुछ दिनों पहले चीन के तियानजिन में तालिबान और चीन के बीच हुई इंटर डेलीगेशन मीटिंग के दौरान पाक आर्मी/ISI के इशारे पर तालिबान ने चीन से उस क्षमता के सरफेस टू एयर मिसाइल की मांग की थीं जो अमेरिका के B-52 बॉम्बर की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की क्षमता और उसके रडार पर असर डाल सके. ये मीटिंग तालिबान के को फाउंडर मुल्ला बरादर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई थी.

अब चीन ने तालिबान को ये मिसाइल मुहैया करवा दी है. लेकिन ये अब पाक आर्मी के पास पहुंच चुकी है. वजह तालिबान के लड़ाके इसका इस्तेमाल करने में सक्षम नही हैं और पाक आर्मी ने तालिबान को इसके इस्तेमाल के लिए ट्रेन करने के नाम पर अपने कब्जे में ले लिया है.अफगानिस्तान की ढाई लाख की सेना के खिलाफ तालिबान के 60-70 हज़ार लड़ाई लड़ रहे हैं.

तालिबान को हमला में मदद के लिए पाकिस्तान कर सकता है इस्तेमाल
ऐसे में पाकिस्तान आर्मी अफगानिस्तान फोर्सेज के खिलाफ हमले में तालिबान को सपोर्ट देने के लिए एसएएम का इस्तेमाल कर सकती है. खास तौर से अफगान फोर्सेज को मिलने वाले एयर सपोर्ट को इसके जरिए टॉरगेट किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल कर सकता है.

तालिबान के जरिये एसएएम हासिल करने का पाकिस्तान का मक़सद चीन के कर्ज के जाल से बचना है. दरअसल पाकिस्तान सीधे भी चीन से एसएएम मांग सकता है लेकिन चीन की शर्तें ऐसी होती हैं जो पाकिस्तान को एक ट्रैप में फंसा सकता है. इसका कड़वा अनुभव पाकिस्तान को है. पाकिस्तान को ये पता है कि मौजूदा हालात में चीन को भी तालिबान की जरूरत है.

वीगर मुसलमानों को तालिबान के समर्थन से रोकने, सीपीईसी में अपने निवेश को सुरक्षित रखने और अफगानिस्तान में रणनीतिक मौजूदगी के लिए चीन को तालिबान की जरूरत है. ऐसे में पाकिस्तान ने इसे हासिल करने के लिए तालिबान को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया है. दरअसल जो मिसाइल तालिबान को चीन ने मुहैया करवाया है, उसके लिए फंडिंग एक इस्लामिक मुल्क ने की है. वो भी ओसामा बिन लादेन के हिडन एसेट्स को बेचकर.

Tags: China, Missile, Pakistan, Taliban

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