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भारत के खिलाफ चीन-पाक की साजिश! PLA मुख्यालय में पाक अधिकारी तैनात और PoK में आतंकी कैंप

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

पाकिस्तान-भारत-चीन (Pakistan-India-China) के बीच चल रहे तनाव में चीन को सैन्य और आतंकियो की मदद का ख़ुलासा हुआ है. पीएलए हेडक्वार्टर में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की तैनाती और गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में आतंकियों की ट्रेनिंग इसी तरफ इशारा कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. पाकिस्तान-भारत-चीन (Pakistan-India-China) के बीच चल रहे तनाव में चीन को सैन्य और आतंकियो की मदद का ख़ुलासा हुआ है. पीएलए हेडक्वार्टर में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की तैनाती और गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में आतंकियों की ट्रेनिंग इसी तरफ इशारा कर रहे हैं. दरअसल 5 अगस्त 2019 में भारत सरकार के एतिहासिक फ़ैसले ने जम्मू कश्मीर (Jammu kashmir) के नक़्शे को बदल दिया है, लेकिन इसकी सबसे ज़्यादा चोट लगी पड़ोसी देशों को यानी की चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) को.

पाकिस्तान को मानो से यक़ीन हो गया की भारत सरकार का अगला क़दम होगा गिलगित-बाल्टिस्तान को वापस लेना और उसी के तहत डर के मारे अब वो सब साजिश रच रहा है. तो दूसरी तरफ चीन ने भी लद्दाख को यूनियन टेरेटरी पर भी अपनी असहमति जताई थी. अब ये दोनों मिलकर लद्दाख में भारत के ख़िलाफ़ साजिश रच रहे हैं. खुफिया रिपोर्ट में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि पाकिस्तान की सेना के अधिकारी को बीजिंग में पीएलए के हेडक्वटर में तैनात किया गया है.

चीन के सहारे पाकिस्तान गिलगित बाल्टिस्तान को बचाना चाहता है.




पाक अधिकृत लद्दाख में सैन्य निर्माण
ऐसा बहुत कम होता है की किसी एक देश के सैन्य अधिकारी को दूसरे देश के सेना के मुख्यालय में जगह दी जाए, लेकिन चीन ने ऐसा किया है और ये साफ संकेत दे रहा है कि पीएलए और पाकिस्तान सेना और वायु सेना के बीच सहयोग अब एकीकरण में बदल गया है. इससे पहले भी जानकारी आई थी की चीन पाक अधिकृत लद्दाख में सैन्य निर्माण के लिए पाकिस्तान की मदद कर रहा है. लेह से 100 किलोमीटर दूर गिलगित-बाल्टिस्तान के सेकार्दू में पाकिस्तान एयरबेस में नया रनवे तैयार किया है और लगातार चीनी फाइटर उस बेस का इस्तेमाल कर उड़ान भर रहे है. यही नहीं चीन की महत्वकांक्षी परियोजना CPEC भी पाक अधिकृत लद्दाख से होकर गुज़रती है और चीन वहां पर निर्माण को लगातार बढ़ा भी रहा है.

लद्दाख में आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में पाकिस्तान
पाकिस्तान-भारत-चीन के बीच जारी तनाव पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और भारत पर कैसे और दबाव बनाया जाए इस पर काम कर रहा है. खुफिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी भी मिली है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने लद्दाख में आतंकियो की घुसपैठ और पाकिस्तानी फ़ौज की मदद के लिए बाक़ायदा एक ट्रेनिंग सेंटर तक चला रहा है. जम्मू कश्मीर के बाद अब लद्दाख में भी आतंकी साजिश को अंजाम देने कि फ़िराक़ में पाकिस्तान लगा हुआ है.

भारत-चीन के बीच एलएसी पर जारी तनाव के चलते पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए एक और रूट को खोल रहा है. लद्दाख में घुसपैठ के लिए आईएसआई आतंकियो को विशेष ट्रेनिंग जारी है. सूत्रों के मुताबिक़ आईएसआई 35 से 40 लश्कर और जैश के आतंकियो को गिलगित-बाल्टिस्तान में दे रहा है ये बिलकुल नई तरह की ट्रेनिंग है यानी की आतंकियो को लद्दाख के इलाके में कैसे ऑपरेट कराया जाए. गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कार्दू से महज़ 100 किलोमीटर दूर खपालु आईएसआई ने ट्रेनिंग सेंटर बनाया है. ये इलाक़ा भारतीय बटालिक सेक्टर के दूसरी ओर पाक अधिकृत लद्दाख में है.

लद्दाख में जनसंख्या कम है और वहां के लोग आतंकियों को शेल्टर देना तो दूर उन्हे देखना भी प्रसंद तक नहीं करते.


स्थितियां हैं काफी अलग
जानकारों की माने तो कश्मीर और लद्दाख के हालात बिलकुल अलग है. मसलन जम्मू कश्मीर में पहाड़ों जंगलों से भरे हुए है ऐसे में आतंकियो को घुसपैठ कराना थोड़ा आसानी होती है क्योंकि उन्हे नेचुरल शेल्टर मिल जाता है जबकि लद्दाख के पहाड़ नंगे पहाड़ है यानी कोई पेड़ पौधे या जंगल नहीं है. कोई भी मूवमेंट को आसानी से नोटिस की जा सकती है. वहीं जम्मू कश्मीर में स्थानीय लोगों का साथ आतंकियो को मिल जाता है जिससे उन्हें छिपने की जगह आसानी से मिल जाती है जबकि लद्दाख में जनसंख्या कम है और वहां के लोग आतंकियों को शेल्टर देना तो दूर उन्हे देखना भी प्रसंद तक नहीं करते. ऐसे में आईएसआई आतंकियों को इस तरह से ट्रेंड करने में जुटा है कि आतंकियो की घुसपैठ को आसानी से कराया जा सके.

जहा ये ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा है वो उसी बटालिक की दूसरी ओर है जहा आज से ठीक 21 साल पहले पाकिस्तानी सेना ने भारतीय इलाके में घुसपैठ की थी और उसके बाद कारगिल की लडाई लड़ी गई पाकिस्तान फिर से वही रूट तलाशने में लगा है, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि कारगिल के दौरान भी पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ को भी सबसे पहले वही के स्थानिय निवासी ने ही दी थी.
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