फिर खालिस्तानियों की मदद में जुटा पाकिस्तान, तस्वीरों ने खोली पोल

न्यूज18 ने आईएसआई-खालिस्तान के ब्लूप्रिंट हासिल की है जिसमें ना सिर्फ प्रतिबंधित भारतीय बल्कि पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ हाथ मिलाए जाने के भी सबूत हैं

News18.com
Updated: April 17, 2018, 8:39 PM IST
फिर खालिस्तानियों की मदद में जुटा पाकिस्तान, तस्वीरों ने खोली पोल
खालिस्तान मुद्दा
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Updated: April 17, 2018, 8:39 PM IST
भारत ने खालिस्तानियों को समर्थन दिए जाने को लेकर जब पाकिस्तान से जवाब तलब किया, तो उसने भले ही इसे सिरे से नकार दिया हो, लेकिन अब सामने आईं कुछ तस्वीरें खालिस्तानी उग्रवादियों से पाकिस्तानी आतंकियों के चोली-दामन के साथ को उजागर कर रही हैं.

इसमें एक तस्वीर लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद और सिख उग्रवादी नेता गोपाल सिंह चावला के बीच लाहौर में हुई मुलाकात का है. इससे दोनों के बीच रिश्तों की एक बानगी जरूर मिल जाती है.

न्यूज़ 18 को आईएसआई और खालिस्तानियों के बीच साठगांठ के कुछ ऐसे दस्तावेज़ मिले हैं, जिससे पता चलता है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी भारत विरोधी भावनाएं भड़काने के मकसद से खालिस्तानी चरमपंथियों को बढ़ावा दे रहा है और पाकिस्तानी आतंकियों से उन्हें मदद भी मुहैया करा रहा है.

पाकिस्तान में सिख श्रद्धालुओं का विरोध

हालांकि पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इन खबरों को निराधार बताया है. विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, 'बैसाखी और खालसा जन्मोत्सव मनाने के लिए पाकिस्तान आए सिख श्रद्धालुओं की यात्रा को लेकर हुए विवाद को और हवा देने के लिए भारत जानबूझकर इस तरह के झूठ फैला रहा है.'

गौरतलब है कि सोमवार को भारत ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को तलब कर उस घटना पर तीखा विरोध जताया, जिसमें पाक दौरे पर गए सिख जत्थे के सामने खालिस्तान का मुद्दा उठाया गया और बैनर व पोस्टर्स के जरिये उनका विरोध किया गया. वहीं पाकिस्तान के सिख नेता गोपाल सिंह चावला ने वहां के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हाल ही में भारतीय अधिकारियों को पंजा साहिब गुरुद्वारा में सिख तीर्थयात्रियों से मिलने से भी रोक दिया था.

खालिस्तानी उग्रवादियों के लिए पाकिस्तान द्वारा दिया गया वीजा
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विदेश मंत्रालय ने बताया कि 1800 सिख श्रद्धालु 12 अप्रैल से द्विपक्षीय समझौते के तहत पाकिस्तान में मौजूद गुरुद्वारा पंजा साहिब की यात्रा पर हैं. मंत्रालय ने बताया कि बैसाखी के मौके पर पाकिस्तान में सिख श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए 14 अप्रैल को वहां पहुंचे भारतीय उच्चायुक्त को गुरुद्वारा पंजा साहिब से जबरदस्ती वापस भेज दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार सिख उग्रवादियों ने उनके खिलाफ पोस्टर्स लहराकर भी खालिस्तान का मुद्दा उठाने की कोशिश की. विदेश मंत्रालय इसे गलत बताते हुए जोरदार आपत्ति जताई है.

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