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OPINION: कश्‍मीर मुद्दे पर चौतरफा नाकामी के बाद दहशतगर्दों का सहारा ले रहा पाकिस्‍तान

News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 4:12 PM IST
OPINION: कश्‍मीर मुद्दे पर चौतरफा नाकामी के बाद दहशतगर्दों का सहारा ले रहा पाकिस्‍तान
पाकिस्‍तान के पीएम इमरान खान को उम्‍मीद थी कि संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में कश्‍मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने में सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

पाकिस्‍तान (Pakistan) कश्‍मीर मुद्दे (Kashmir Issue) को लेकर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भारत (India) के खिलाफ माहौल बनाता रहा है. अब जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) से अनुच्‍छेद-370 (Article 370) हटाए जाने के बाद घाटी के मौजूदा माहौल में वह अपने चारों तरफ अंधेरा महसूस कर रहा है, जहां उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह भारत के खिलाफ माहौल कैसे बनाए. हालांं‍कि, उसे उम्‍मीद है कि घाटी में पाबंदियां (Restrictions) हटने के बाद उसे लोगों को उकसाकर सड़क पर उतारने में कामयाबी मिलेगी. 

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  • Last Updated: October 21, 2019, 4:12 PM IST
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मनोज गुप्‍ता

नई दिल्‍ली. जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्‍छेद-370 (Article 370) हटाने के बाद केंद्र सरकार ने सर्दी आने का इंतजार किए बिना दरबार को श्रीनगर से जम्‍मू स्‍थानांतरित कर दिया. हालांकि, केंद्र सरकार ने संसद सत्र (Parliament Session) के आखिरी कुछ दिनों में यह फैसला लिया. सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दरबार को जम्‍मू लाने की घोषणा संसद में की. इस बारे में सुरक्षाबलों (Security Forces), नौकरशाहों (Bureaucrats) या स्‍थानीय नेताओं (Local Politicians) को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union cabinet) के सहयोगियों को भी सुरक्षा की कैबिनेट समिति ( Cabinet Committee on Security) में इस बारे में जानकारी मिली.

कश्‍मीरियों ने दिया पाक की दशकों पुरानी सोच को तगड़ा झटका
केंद्र सरकार का साफ संकेत था कि इस बार हमें अनुच्‍छेद-370 हर हाल में हटाना ही है. फैसले लेने के बाद शुरुआती दौर में आम कश्‍मीरियों ने काफी अपमानित महसूस किया, लेकिन धीरे-धीरे उन्‍होंने इसे स्‍वीकार करना शुरू कर दिया. सरकार ने भी धीरे-धीरे घाटी में विकास (Development) और शांति (Peace) के विचार का प्रचार-प्रसार किया. घाटी के माहौल में सुधार के बीच 70 साल से कश्‍मीर मुद्दे पर सियासत कर रहे पाकिस्‍तान को लगा कि वह अंधेरे कुएं में खड़ा है, जहां उसे भारत के खिलाफ माहौल बनाने का तरीका समझ नहीं आ रहा है. पड़ोसी मुल्‍क पूरी दुनिया से यही कहता रहा है कि आम कश्‍मीरी पाकिस्‍तान के साथ आना चाहते हैं. इसके लिए वह अपनी जान तक देने को तैयार हैं. जम्‍मू-कश्‍मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के 70 दिन बाद तक एक भी आम कश्‍मीरी ने सड़क पर उतरकर जान नहीं दी. इससे पाकिस्‍तान की दशकों पुरानी सोच को तगड़ा झटका लगा.

आम कश्‍मीरियों ने स्‍वीकारा, पाक उन्‍हें कुछ भी नहीं देने वाला है
मोदी सरकार (Modi Government) के अनुच्‍छेद-370 हटाने के फैसले के बाद पाकिस्‍तान (Pakistan) को लगा था कि बड़ी संख्‍या में लोग सड़क पर उतरेंगे, उनकी सुरक्षाबलों से भिड़ंत होगी और बड़ी संख्‍या में लोग मारे जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. अब सवाल उठता है कि ऐसा क्‍यों नहीं हुआ? दरअसल, कश्‍मीर घाटी में ये सब कराने वाली मशीनरी ही उपलब्‍ध नहीं थी. आम कश्‍मीरी (Kashmiri people) भी शांति के साथ सोच रहे हैं कि अनुच्‍छेद-370 हटाने से उनका क्‍या फायदा होगा? अब उन्‍होंने स्‍वीकार करना शुरू कर दिया है कि पाकिस्‍तान उन्‍हें कुछ नहीं देने वाला. उन्‍हें पाक अधिकृत कश्‍मीर (PoK) के मीरपुर (Mirpur) और मुजफ्फराबाद (Muzzaffarabad) में रहने वाले अपने रिश्‍तेदारों के हालात की जानकारी है. उन्‍हें आतंकी संगठनों में शामिल हुए लोगों की बदहाली की पूरी दास्‍तान भी पता है.

इमरान खान कश्‍मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया के सामने अपनी हताशा दिखाते रहे. इस बीच उन्‍हें अहसास नहीं हुआ कि वह खुद को सत्‍ता से बेदखल किए जाने की जमीन तैयार कर रहे हैं.

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आईएसआई ही आम कश्‍मीरियों को उपद्रव के लिए उकसाती थी
स्‍पष्‍ट है कि कश्‍मीर घाटी (Kashmir Valley) में अब तक हुए विद्रोह और उपद्रव को पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का समर्थन हासिल था. आईएसआई ही आम कश्‍मीरियों को घाटी में बवाल करने के लिए उकसाती थी. वह मासूम कश्‍मीरियों की मौत पर भारत के खिलाफ माहौल बनाती थी. पाकिस्‍तान को अब भी उम्‍मीद है कि घाटी में पाबंदियां (Restrictions) हटने के बाद उसे लोगों को उकसाकर सड़क पर उतारने में कामयाबी मिलेगी. उसे उम्‍मीद है कि सुरक्षाबलों से झड़पों में बड़ी संख्‍या में आम कश्‍मीरी मारे जाएंगे. बता दें कि पाकिस्‍तान को अनुच्‍छेद-370 हटाने के बाद 70 दिनों तक किसी तरह का हमला करने में कामयाबी नहीं मिली. जम्‍मू-कश्‍मीर में सुरक्षाबल पूरी तरह से मुस्‍तैद हैं क्‍योंकि उन्‍हें दुश्‍मन के खतरनाक खेल की पूरी जानकारी है.

इमरान खान ने राजनयिक मोर्चे पर कीं एक के बाद एक गलतियां
राजनयिक मोर्चे (Diplomatic Front) पर भी पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) ने एक के बाद एक कई गलतियां कर डालीं. इमरान को उम्‍मीद थी कि संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) में कश्‍मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने में सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्‍हें उम्‍मीद नहीं थी कि इस बार कश्‍मीर मुद्दे पर उनकी सेना (Army) भी आगे आने को तैयार नहीं होगी. इमरान पूरी दुनिया के सामने अपनी हताशा दिखाते रहे. इस बीच उन्‍हें अहसास नहीं हुआ कि वह खुद को सत्‍ता से बेदखल किए जाने की जमीन तैयार कर रहे हैं. इसके उलट पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (Shah Mehmood Qureshi) वास्‍तविकता की जमीन पर खड़े नजर आए. एक लीक वीडियो (Leaked Video) में कुरैशी कहते हुए नजर आए कि कश्‍मीर मुद्दे पर दुनिया तो छोडि़ए मुस्लिम देश भी पाकिस्‍तान का साथ नहीं देंगे, क्‍योंकि उनके भारत के साथ मजबूत व्‍यापारिक संबंध (Business Ties) हैं. इमरान खान को कभी अहसास नहीं हुआ कि 'नया पाकिस्‍तान' जेहाद नहीं विकास और अर्थव्‍यवस्‍था के साथ खड़ा होना चाहिए.

पाकिस्‍तान ने कभी आतंकियों को समर्थन देने की बात नहीं मानी
कश्‍मीर में भीड़ को एकजुट करने, यूएनजीए और अंतरराष्‍ट्रीय समर्थन हासिल करने में नाकाम पाकिस्‍तान अब कश्मीरी दुकानदारों व गैर-कश्‍मीरी ट्रक ड्राइवरों की हत्‍या कराने पर उतर आया है. पाकिस्‍तान पिछले 30 साल से कश्‍मीर मुद्दे को जिंदा रखने के लिए यही सब करता आ रहा है. वह कश्‍मीर का माहौल बिगाड़ने के लिए दहशगर्दों का इस्‍तेमाल कर रहा है. आखिरकार यह उनके साथ ही उनकी ओर से खड़ी की गई आतंकियों की फौज की जिंदगी का मामला है. पाकिस्‍तान ने आम कश्‍मीरियों को राजनीतिक और राजनयिक मदद की बात स्‍वीकार की है, लेकिन आतंकवाद को दिए जाने वाले समर्थन पर कभी बात तक नहीं की. हर तरफ से नाकामी हासिल होने के बाद पाकिस्‍तान दहशतगर्दों का सहारा ले रहा है. अब वह अपने युवाओं को दक्षिण पंजाब में भर्ती कर रावलपिंडी में प्रशिक्षण देने के बाद कश्‍मीर में घुसपैठ का सपना बेच सकता है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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First published: October 21, 2019, 3:17 PM IST
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