क्या है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से बचने का पाक का गेम प्लान

खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान एफएटीएफ के प्रतिबंधों से बचने के लिए तमाम पैतरे आजमा रहा है, इनपुट शेयर करने का भी दिखावा कर रहा है.

नीतीश कुमार | News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 5:53 AM IST
क्या है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से बचने का पाक का गेम प्लान
पीएम इमारान खान की चिंता ये है कि पाकिस्तान को कर्ज नहीं मिला तो बिगड़ जाएगी हालत
नीतीश कुमार | News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 5:53 AM IST
कर्ज देने के लिए जरूरी क्लियरेंस देने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से बचने के लिए पाकिस्तान लगातार पैंतरेबाजी कर रहा है. अगर एफएटीएफ को पता चलता है कि पाकिस्तान आतंकियों पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहा है तो उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाएगा. इससे पाकिस्तान को कर्ज लेने में मुश्किलें आएंगी. माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने इन मुश्किलों से बचने के लिए कई दिखावे वाले कदम उठाए हैं.

ISI चीफ भी बदला

पाकिस्तान ने ले. जनरल असीम मुनीर को आईएसआई चीफ बनाने के महज 8 महीने बाद ही हटा दिया. आज तक कोई भी इतने कम वक्त के लिए आईएसआई चीफ नहीं बनाया गया था. ऐसा माना जाता है कि जैश-ए-मोहम्मद को पुलवामा हमले की मंजूरी ले. जनरल असीम मुनीर ने ही दी थी. पाकिस्तान दुनिया को दिखाना चाहता है कि वो न सिर्फ आतंकवादियों बल्कि उनके साथ जुड़े आईएसआई के हैंडलर्स के खिलाफ भी कार्रवाई कर रहा है.

जनरल बाजवा ने नवंबर, 2016 में पाकिस्तानी सेना प्रमुख पद संभाला था. उस वक्त ले. जनरल रिजवान अख्तर आईएसआई प्रमुख थे. ले. जनरल रिजवान ने 11 दिसंबर, 2016 को पद छोड़ा था. इसके बाद ले. जनरल नावीद मुख्तार अक्टूबर, 2018 तक आईएसआई चीफ रहे.

पहली बार महज 8 महीने में हटाया

ले. जनरल नावीद मुख्तार के रिटायर होने के बाद ले. जनरल असीम मुनीर ने आईएसआई की कमान संभाली थी. उन्हें महज 8 महीने बाद ही हटा दिया गया. अब आईएसआई की कमान जनरल बजावा के करीबी माने जाने वाले हमीद फैज को सौंपी गई है. आईएसआई को नियुक्त करने का अधिकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को है. पाकिस्तान के इतिहास में एक सेना प्रमुख के तीन साल के कार्यकाल में 4 आईएसआई चीफ कभी नहीं हुए थे.

पाकिस्तान एफएटीएफ को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है - Pakistan trying to fool FATF
पाकिस्तान ने हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा, फल्ह-ए-इंसानियत और मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कारवाई करने का दिखावा किया था.

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आतंकियों पर कार्रवाई भी दिखावा

पाकिस्तान ने कुछ दिनों पहले हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा, फल्ह-ए-इंसानियत और मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कारवाई करने का दिखावा किया था. हालांकि, उनके खिलाफ कार्रवाई पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत की गई थी, न कि आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत.

असीम मुनीर पर पाकिस्तान में प्रेस व मानवाधिकार संगठनों पर हमले और उन्हें दबाने की साजिश का पूरा ताना बाना बुनने का आरोप भी था. ले. जनरल मुनीर के होने से मुल्ला मिलिट्री अलाएंस को भी मजबूती मिलती दिख रही थी. आतंकी मसूद अजहर और हाफिज मसूद से भी जनरल असीम के गहरे रिश्ते रहे हैं. साथ ही ले. जनरल कई बार सेना प्रमुख की सलाह की अनदेखी भी करते रहे हैं.

फिर काली सूची का खतरा

जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 27 मुद्दों पर आतंक के खिलाफ कर्रवाई करने के लिए कहा था. सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान इनमें से 25 मुद्दों पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा. इसमें आतंकी संगठनों की ओर से चलाए जा रहे मदरसे, एनजीओ और दूसरी सेवाओं को दी जा रही मदद का मामला मुख्य है. ऐसे में एफएटीएफ अक्टूबर, 2019 में लिए जाने वाले आखिरी फैसले में पाकिस्तान को फिर ग्रे लिस्ट में डाल सकता है.

कर्ज मिलने में होगी दिक्कत

इसके बाद आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थान पाकिस्तान को कर्ज देने से मना कर सकते हैं. इससे पहले से खस्ताहाल पाकिस्तान बदहाल हो सकता है. इससे बचने के लिए पाकिस्तान तरह-तरह के पैंतरे आजमा रहा है.

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First published: June 20, 2019, 5:50 AM IST
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