बंटवारे के 72 साल बाद पाकिस्तान में खोला गया ऐतिहासिक गुरुद्वारा 'चोआ साहिब'

विभाजन के 72 साल बाद पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चोआ साहिब के दरवाजे भारत समेत विभिन्न देशों के सिख श्रद्धालुओं के लिए शुक्रवार को खोल दिए.

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Updated: August 3, 2019, 4:58 AM IST
बंटवारे के 72 साल बाद पाकिस्तान में खोला गया ऐतिहासिक गुरुद्वारा 'चोआ साहिब'
बंटवारे के 72 साल बाद पाकिस्तान में खोला गया ऐतिहासिक गुरुद्वारा (फाइल फोटो)
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Updated: August 3, 2019, 4:58 AM IST
विभाजन के 72 साल बाद पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चोआ साहिब के दरवाजे भारत समेत विभिन्न देशों के सिख श्रद्धालुओं के लिए शुक्रवार को खोल दिए. यह कदम नवंबर में गुरू नानक देव की 550वीं जयंती की तैयारी के मद्देनजर उठाया गया है. साल 1947 में पंजाब प्रांत के झेलम जिले में सिख समुदाय के पाकिस्तान से पलायन कर जाने के बाद से बंद यह गुरुद्वारा उपेक्षा की स्थिति में था.

यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल रोहतास किले के करीब स्थित गुरुद्वारा चोआ साहिब को कई उच्चाधिकारियों और समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में एक भव्य कार्यक्रम में खोला गया. कार्यक्रम की शुरुआत सिख समुदाय के सदस्यों की ‘अरदास’ और ‘कीर्तन’ के साथ हुई. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों को देखने वाले इवैक्यूई ट्रस्ट प्रोपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के अध्यक्ष डॉ. आमिर अहमद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे.

आजादी के बाद पहली बार खुला है गुरुद्वारा
गुरुद्वारे को दोबारा खोले जाने की ख़बरों के बीच इसके अध्यक्ष ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि गुरुद्वारे को अरदास के बाद गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना कर खोल दिया जाएगा. उन्होंने ही बताया था कि भारत-पाक के बिगड़ते रिश्तों के बीच यहां लोगों का आना कम हो गया था, जिसके बाद गुरुद्वारा बंद पड़ा रहा.

यहां पर पानी के लिए गुरुनानक ने की थी प्रार्थना
सिख धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, जब गुरुनानक 16वीं शताब्दी में कश्मीर से सियालकोट पहुंचे तो वे यहीं पर एक बेर के पेड़ के नीचे रुके. उस समय यहां के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे थे. ऐसे में गुरुनानक यहां पर पानी के लिए प्रार्थना की, जिससे यहां पर एक चोआ यानि पानी का झरना फूट निकला.

पाकिस्तान के रोहतास किले के पास आज भी मौजूद है झरना
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बाद में नत्था सिंह ने इसी जगह पर एक गुरुद्वारा बनवा दिया, जिसका नाम इस घटना के चलते चोआ साहिब पड़ा. कहा जाता है रोहतास के किले के आसपास रहने वाले आज भी इस झरने के पानी का उपयोग करते हैं. पाकिस्तान के रोहतास किले के पास मौजूद इस गुरुद्वारे का निर्माण आखिरी बार 1934 में करवाया गया. (भाषा के इनपुट के साथ)

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First published: August 3, 2019, 4:58 AM IST
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