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आतंकियों की घुसपैठ के लिए सुरंगों का इस्तेमाल कर रहा पाकिस्तान, सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं मदद

आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए टनल पर ज्यादा फोकस कर रहा है पाकिस्तान (फाइल फोटो: ANI/Twitter)
आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए टनल पर ज्यादा फोकस कर रहा है पाकिस्तान (फाइल फोटो: ANI/Twitter)

Pakistan: पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए सुरंगों पर ज्यादा फोकस कर रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान सुरक्षा एजेंसियों की इंजीनियरिंग टीम आतंकियों को टेक्निकल सपोर्ट दे रही हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 11:57 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) भारत में आतंकियों की घुसपैठ के लिए नए नए रास्ते तलाशता रहता है. एलओसी (LoC) पर जहां एक तरफ पाकिस्तान तारों के नीचे से आतंकियों को भारत भेजने की कोशिश करता है तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर वह सुरंग खोदकर इस काम को अंजाम देने की कोशिश में लगा है. लेकिन भारतीय सेना (Indian Army) की मुस्तैदी के चलते पाकिस्तान की सभी कोशिशों पर पानी फिर जाता है. खुफिया रिपोर्ट की मानें को आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान टनल यानी की सुरंग पर ज्यादा तवज्जो दे रहा है. ऐसे टनल को बनाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां अपनी इंजीनियरिंग टीम का टेक्निकल सपोर्ट आतंकियों दे रही हैं.

पिछले कुछ सालों में भारतीय सुरक्षाबलों ने ऐसी कई सुरंगें पकड़ी हैं जिनके जरिए पाकिस्तान आतंकियों, हथियार, ड्रग्स और जाली नोट भारत में भेजने की फ़िराक़ में रहता है. लेकिन अब जो सुरंग पकड़ी जा रही है वो पहले की सुरंगों से ख़ासा अलग हैं. नई सुरंगों में बाक़ायदा इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि ऑक्सीजन का प्रवाह लगातार बना रहे. ताकि अगर सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के चलते घुसपैठ करने वाले आतंकियों को कुछ समय उसमें बिताना भी पड़ जाए को ज्यादा दिक्कत न हो.

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निगरानी तंत्र से बचने की कोशिश में पाकिस्तान
यही नहीं टनल को पहले से ज्यादा भी गहराई में खोदा जा रहा है ताकि भारतीय निगरानी तंत्र जैसे कि सैटेलाइट की निगाह से भी उसे बचाया जा सके. यही नहीं टनल में घुसने और निकलने के लिए मिट्टी काट कर सीढ़ियां भी बनाई जा रही हैं. जानकारों की मानें तो बिना टेक्निकल सपोर्ट के साधारण लोग इस तरह की सुरंगें नहीं बना सकते.

वरिष्ठ अधिकारी ने मुताबिक़ सुरंग का पता तीन तरीके से लगाया जा सकता है पहला सेटेलाइट इमेजरी के एनालिसिस के जरिए, दूसरा फिजिकल पेट्रोलिंग के जरिए और तीसरा सिसमिक सेंसर के जरिए. सिसमिक सेंसर सिस्टम महंगा होने के चलते पूरे बॉर्डर पर लगाना संभव नहीं है. यही नहीं सेटेलाइट इमेजरी के जरिए भी टनल का पता तब लग पाता है जब जहां पर खुदाई हो रही है वहां पर मिट्टी इकट्ठा दिखे या दूसरे कोई निशान हो. लेकिन आतंकी अब इसका भी ख्याल रख रहे हैं कि वह सेटेलाइट इमेजरी से पकड़ में न आएं. इसलिए फिजिकल पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है ताकि आतंकियों को कोई मौका ना मिल सके.

पहले पंजाब इलाके में सुरंग के जरिए पाकिस्तान की तरफ से ज्यादा घुसपैठ और तस्करी होती थी लेकिन अब धीरे धीरे आतंकी जम्मू की तरफ ज्यादा टनल बना रहे हैं इसी साल 13 जनवरी को ही जम्मू में 150 मीटर सुरंग मिली थी तो पिछले साल भारतीय सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान की दो सुरंगों का भंडाफोड़ किया था. 2017 में भी दो टनल मिली थीं जिसमें एक टनल ऐसी थी जिसका बाहर निकलने का रास्ता आतंकी तब तक तैयार नहीं कर पाए थे. वहीं 2016 में दो सुरंगें मिली थीं जिसमें एक 40 मीटर लंबी थी और एक 33.5 मीटर लंबी. ये सब जम्मू के इलाके में मिली थी. हालांकि पंजाब में आख़िरी टनल 2003 में सुरक्षाबलों ने बरामद की थी.
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