टेरर फंडिंग से जुड़े पाकिस्तानी उच्चायोग अधिकारियों के तार, NIA को मिले अहम सबूत

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में एनआईए (NIA) को पुख्ता सबूत मिले हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में एनआईए (NIA) को पुख्ता सबूत मिले हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

न्यूज़18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान हाई कमीशन (Pakistan High Commission) के दो अधिकारियों पर टेरर फंडिंग (Terror Funding) के सीधे आरोप हैं.

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नई दिल्ली. भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने मंगलवार को दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग (Pakistan High Commision) में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या को 50% घटाने का फैसला लिया. यह फैसला पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर बताया गया. विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी न सिर्फ देश में जासूसी गतिविधियों में संलिप्त हैं, बल्कि कई आतंकी संगठनों से भी इनकी सांठगांठ है.  न्यूज़18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान हाई कमीशन के दो अधिकारियों पर टेरर फंडिंग (Terror Funding) के सीधे आरोप हैं. और उनके कुछ अधिकारी भारत-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं. इसीलिए भारत ने स्टाफ की संख्या कम करने का फैसला लिया, जिसे एक हफ्ते में लागू किया जाएगा.

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग में पाक उच्चायोग का हाथ
जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में एनआईए (NIA) को पुख्ता सबूत मिले हैं. जांच के दौरान पता चला है कि हुर्रियत नेताओं (Hurriyat Leaders) तक पाक उच्चायोग के अधिकारी पैसा पहुंचाते थे. कश्मीर के एक बिज़नेसमैन जहूर अहमद शाह वटाली के ज़रिए पाकिस्तान उच्चायोग और पाक की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI, हुर्रियत नेताओं को पैसा भेजता था. तलाशी के दौरान वटाली के घर से कुछ ऐसे दस्तावेज एनआईए के हाथ लगे हैं जिससे यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी सीधे तौर पर हुर्रियत नेताओं के लिए वटाली को पैसा भेजते था. दस्तावेज से यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी इकबाल चीमा ज़हूर वटाली के पास लाखों रुपए भेजता था ताकि उन्हें हुर्रियत नेताओं तक पहुंचाया जा सके और कश्मीर में गड़बड़ी फैलाई जा सके.

NIA के पास मौजूद दस्तावेज़ के मुताबिक 15 मार्च 2016 को वटाली को 30 लाख रुपये भेजे गए और 20 अक्टूबर 2016 को 40 लाख रुपए वटाली के पास भेजे गए. जांच के मुताबिक पता चला है कि यह रकम पाकिस्तान उच्चायोग में फर्स्ट सेक्रेटरी-प्रेस इकबाल चीमा ने भेजी थी.  23 सितंबर 2015 से 2 नवंबर 2016 तक पाक उच्चायोग में फर्स्ट सेक्रेटरी प्रेस के तौर पर कार्यरत था मुदस्सर इकबाल चीमा, हालांकि 2016 में चीमा समेत छह अधिकारियों को पाकिस्तान ने वापस बुला लिया था. लेकिन दिल्ली में हाई कमिशन में कार्यकाल के दौरान इक़बाल चीमा लगातार हुर्रियत नेताओं को रकम भेजता रहता था.
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DSP देविंदर सिंह के साथ भी पाक हाई कमीशन के तार
NIA को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि डीएसपी-जम्मू कश्मीर पुलिस देविंदर सिंह (Devinder Singh) मामले में भी पाकिस्तान हाई कमीशन का कनेक्शन था. इस पूरे मामले में पाक हाई कमिशन में असिस्टेंट शफ़ाकत का बहुत बड़ा किरदार था. इस साल जनवरी में डीएसपी देविंदर सिंह को हिज़बुल के तीन आतंकियों के साथ यात्रा करते हुए पकड़ा गया था, जिसमें इरफान शफी मीर, हिजबुल कमांडर नवीद मुश्ताक़ और रफी अहमद शामिल था. जांच से पता चला है यह सभी पाकिस्तान हाई कमिशन में एक अधिकारी से लगातार संपर्क में थे. एनआईए को जांच में पता चला है कि जिस व्यक्ति से संपर्क में थे वह पाक उच्चायोग में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत था और उसका नाम शफ़ाकत था. पाकिस्तान उच्चायोग का यह अधिकारी हवाला लेनदेन और टेरर फंडिंग में शामिल था. इस साल जनवरी में हिज़बुल के आतंकियों के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी देवेंद्र सिंह को पकड़ा गया था.

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19 साल में भी नहीं बदला पाकिस्तान
2001 में संसद पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान उच्चायोग के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. उस वक्त भी पाकिस्तान उच्चायोग के स्टाफ को 50% कम करने का फैसला लिया गया था. उस वक्त के विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने एक बयान जारी कर यह कहा था कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी ना सिर्फ जासूसी गतिविधियों में संलिप्त हैं, बल्कि उनके संबंध आतंकी संगठनों से भी हैं और ऐसे में 48 घंटों के अंदर पाकिस्तान उच्चायोग के स्टाफ को 50% कम करने का फैसला लिया गया था. यानी 19 साल बीत गए लेकिन पाकिस्तान का रवैया नहीं बदला.

अब से कुछ दिन पहले पाकिस्तान उच्चायोग के दो अधिकारियों को जासूसी करते रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसके बाद उन्हें देश निकाला कर दिया गया था.
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