पाकिस्तान ने नहीं दी थी कश्मीर में किसी हमले की जानकारी, ऐसी रिपोर्ट्स झूठी: भारतीय खुफिया अधिकारी

रॉ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, इसके बारे में ISI ने कोई भी चेतावनी नहीं दी थी. उन्होंने बताया कि बस इसके बारे में इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाईकमीशन में एक अज्ञात फोन कॉल आई थी.

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Updated: June 17, 2019, 8:43 PM IST
पाकिस्तान ने नहीं दी थी कश्मीर में किसी हमले की जानकारी, ऐसी रिपोर्ट्स झूठी: भारतीय खुफिया अधिकारी
रॉ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, हमले के बारे में ISI ने कोई भी चेतावनी नहीं दी थी (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: June 17, 2019, 8:43 PM IST
कुछ वक्त से ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारतीय अधिकारियों के साथ कश्मीर में होने वाले अटैक की जानकारी साझा की थी. लेकिन फर्स्टपोस्ट पर अपने एक लेख में पत्रकार प्रवीण स्वामी ने इसे गलत बताया है. इससे पहले आई रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट ने कश्मीर पर होने वाले संभावित हमलों के बारे में नई दिल्ली के साथ जानकारियां साझा कीं. लेकिन अब खुफिया अधिकारियों ने बताया है कि कश्मीर के अवंतीपोरा में विस्फोट की जानकारी एक अज्ञात फोन कॉल के जरिए इन विस्फोटों के प्रति आगाह किया गया था. यह कोई सरकारी बातचीत नहीं थी.

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले से जुड़े हुए रॉ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, इसके बारे में ISI ने कोई भी चेतावनी नहीं दी थी. उन्होंने बताया कि बस इसके बारे में इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाईकमीशन में एक अज्ञात फोन कॉल आई थी. जिसमें न ही इसके बारे में बताया गया था कि इसके पीछे किसका हाथ है और न ही इस अटैक के समय के बारे में कुछ बताया गया था.

इसे माना जा रहा था पाकिस्तान का तनातनी कम करने का प्रयास
जब आईएसआई के जानकारियां साझा करने की ख़बरें आईं तो भारत में कई सारे सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे पाकिस्तान के भारत के साथ चल रही तनातनी को कम करने के प्रयासों के तौर पर देखा था. ऐसे ही कदमों के तौर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैंपों को बंद किए जाने के कदम और कई सारे मदरसों के सरकारी अधिगृहण के कदम को भी देखा गया है.

अमेरिका सहित अन्य देशों ने भी किया था आगाह
रॉ के इस अधिकारी ने बताया, भारतीय राजनयिकों ने इस जानकारी को नई दिल्ली के खुफिया अधिकारियों को दे दिया था. इसके तुरंत बाद ये जानकारियां गृह मंत्रालय के जरिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को दी गईं. जम्मू-कश्मीर में नियुक्त एक अधिकारी ने बताया, 'हमें यह जानकारी मात्र गृह मंत्रालय के जरिए नहीं मिली.'

अवंतीपोरा में कथित आतंकी हमले की जानकारी, इस्लामाबाद में स्थित हमारे कई सारे राजनयिक सहयोगियों ने भी दी थी. जिसमें अमेरिका के राजनयिक भी शामिल थे.
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हाल ही में अल-उमर संगठन ने किया था सीआरपीएफ काफिले पर हमला
इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान स्थित ये आतंकी समूह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को लगातार अंजाम देने में जुटे हैं. पिछले हफ्ते ही दो फिदायीनों ने खुद को उड़ाकर पांच सीआरपीएफ जवानों को शहीद कर दिया था. इस हमले में बाद में एक जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान की भी इलाज के दौरान शहादत हो गई थी. इस हमले को अंजाम देने वाले दोनों ही आतंकियों को जम्मू-कश्मीर पुलिस पाकिस्तानी नागरिक मान रही है.

घाटी में लौट आया है मुश्ताक जरगार
अल-उमर नाम का आतंकी संगठन, जिसका सरगना मुश्ताक जरगार है, उसने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. वह 1999 तक भारत की जेल में बंद था, जब तक कंधार अपहरण के बाद उसे छोड़ा नहीं गया. इसके बाद जरगार को पीओके के मुजफ्फराबाद में जिहाद से जुड़े कई सारे कार्यक्रमों में देखा गया था. जबकि इंटरपोल ने उसके खिलाफ देखते ही गिरफ्तार किए जाने का आदेश जारी कर रखा है. बताया जा रहा है कि अब वह घाटी में लौट आया है.

भारत का स्टैंड साफ, बातचीत और आतंक एक साथ नहीं चलेंगे
फरवरी में हुए पुलवामा हमले और उसके बाद भारत की एयर स्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के संबंधों में तल्खी बनी हुई है. पूरी दुनिया की कई संस्थाओं और देशों ने भी पाकिस्तान पर आतंकियों को आर्थिक लाभ न देने का दबाव बनाया हुआ है.

पिछले महीने पाकिस्तानी सरकार ने मुजफ्फराबाद में बारह जिहादी ग्रुप्स के ऑफिस बंद कर दिये थे. जो यूनाइटेड जिहाद काउंसिल से जुड़े हुए थे. यह कश्मीर में संचालित आतंकी समूहों का एक संगठन है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई आतंकी संगठनों के सहयोगी समूह भी जुड़े हुए हैं.

पाकिस्तान अभी तक प्रधानमंत्री मोदी को भरोसा नहीं दिला सका है कि उसने आतंकवाद के मसले पर संतुष्टि देने लायक काम किया है. इसके अलावा ये अनंतनाग जैसे छिटपुट हमले हैं, जिनके चलते पाकिस्तान पर विश्वास करना और मुश्किल है. यही कारण है कि हाल ही में पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकवाद से मुक्त माहौल बनाने के लिए अभी तक कुछ खास नहीं किया है.

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First published: June 17, 2019, 8:43 PM IST
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