फिलिस्तीन-इजरायल मुद्दा: UNHRC में वोटिंग से दूरी बनाए रखने पर विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

इजरायल के हवाई हमले के बाद ग़जा़ शहर के अल-शरोक बिल्डिंग से निकलता धुआं. (एएफपी फाइल फोटो)

इजरायल के हवाई हमले के बाद ग़जा़ शहर के अल-शरोक बिल्डिंग से निकलता धुआं. (एएफपी फाइल फोटो)

Israel Palestine War: इजरायल और हमास के बीच हाल में संघर्ष के दौरान मानवाधिकार के उल्लंघन और अपराधों की जांच शुरू करने के यूएनएचआरसी के प्रस्ताव पर वोट डालने से पिछले दिनों भारत समेत 14 देश अनुपस्थित रहे थे.

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नई दिल्ली. फिलिस्तीन के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में मतदान में भारत के भाग नहीं लेने के संबंध में विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत ने पहले भी कई मौकों पर ऐसा किया है और उसका यह रुख नया नहीं है. दरअसल फिलिस्तीन ने उन सभी देशों को एक समान पत्र लिखा है जिन्होंने इजरायल के साथ हालिया संघर्ष को लेकर यूएनएचआरसी में मतदान के मामले में दूरी बनाकर रखी. भारत ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया था. विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हमारा रुख नया नहीं है, हमने पहले भी दूरी बनाकर रखी है.'


गौरतलब है कि ग़ज़ा में इजरायल और हमास के बीच हाल में 11 दिन तक संघर्ष के दौरान कथित तौर पर मानवाधिकार के उल्लंघन और अपराधों की जांच शुरू करने के यूएनएचआरसी के प्रस्ताव पर वोट डालने से पिछले दिनों भारत समेत 14 देश अनुपस्थित रहे थे.


जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडे ने विशेष सत्र में कहा था कि भारत ग़ज़ा में इजरायल और सशस्त्र समूह हमास के बीच संघर्ष विराम में सहयोग देने वाले क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत करता है.



उन्होंने यह भी कहा था, 'भारत सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और उन कदमों से गुरेज करने की अपील करता है जो तनाव बढ़ाते हों. साथ ही ऐसे प्रयासों से परहेज करने को कहता है जो पूर्वी यरुशलम और उसके आस-पड़ोस के इलाकों में मौजूदा यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के लिए हों.'


गौरतलब है कि इजरायल और ग़ज़ा के हमास चरमपंथियों के बीच तब भारी संघर्ष शुरू हो गया जब हमास ने 10 मई को फिलिस्तीनी प्रदर्शनों के समर्थन में यरुशलम पर रॉकेट दागे. अल-अक्सा मस्जिद परिसर में सुरक्षा बलों की सख्ती तथा यहूदियों द्वारा दर्जनों फिलिस्तीनी परिवारों को वहां से निकाले जाने की कोशिशों के खिलाफ ये प्रदर्शन किये जा रहे थे.


(इनपुट भाषा से भी)

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