दुनिया की सबसे महंगी धातु के आगे फीकी है सोने चांदी की चमक, लेकिन इससे गहने नहीं बनवाते लोग

ये धातु विशेष रूप से रूस और दक्षिण अफ्रीका में पाई जाती है (फोटो- News18)
ये धातु विशेष रूप से रूस और दक्षिण अफ्रीका में पाई जाती है (फोटो- News18)

सोने (Gold) वो धातु है जिसके पीछे पूरी दुनिया पागल है, फिर पैलेडियम (Palladium) उससे ज्यादा कीमती (costly) कैसे हो गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 8:33 PM IST
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भारतीय समाज (Indian Society) में सोने (Gold) का बहुत महत्व होता है. सोमवार को ही घरेलू बाजार (Domestic Market) में सोने की कीमतें रिकॉर्ड 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 50,437 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गई हैं. इस लिहाज से एक महीने में गोल्ड 5763 रुपये प्रति दस ग्राम तक सस्ता हो गया है. ऐसे में उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है जो आने वाले त्योहारों और शादियों (Weddings) के मौसम के लिए सोने की खरीददारी करने के लिए प्लान बना रहे थे. सोना जहां एक महंगी धातु (Costly Metal) होने के चलते भारतीय समाज में प्रतिष्ठा का प्रतीक होता है तो वह घरेलू अर्थव्यवस्था (Economy) के लिए भी एक जरूरी तत्व होता है. लेकिन सोना महंगा होने के बाद भी दुनिया की इस सबसे महंगी धातु से कम दाम का ही है. दुनिया की यह सबसे महंगी धातु है पैलेडियम (Palladium).

हम आपको बता रहे हैं कि पैलेडियम (Palladium) है क्या, और क्या हैं उसकी खासियतें (characteristics), जो इसके इतना महंगा होने का कारण बनती हैं. सोने (Gold) वो धातु है जिसके पीछे पूरी दुनिया पागल है, फिर पैलेडियम उससे ज्यादा कीमती (costly) कैसे हो गया-
ये धातु चांदी की तरह दिखती है. लेकिन इसमें चमक प्लेटिनम की तरह होती है. पैलेडियम को करेंसी कोड भी दिए गए हैं. यह ऐसी चौथी धातु है जिसे करेंसी कोड दिया गया है. ये धातु रूस और दक्षिण अफ्रीका में विशेष रूप से पाई जाती है.
पैलेडियम के अलावा प्लैटिनम, सोना और चांदी को भी यह कोड दिया गया है. इसे प्लैटिनम ग्रुप की छह धातुओं के साथ रखा जाता है. इसके अलावा इस ग्रुप में रुथेनियम, रोडियम, ओसमियम, इरिडियम और प्लेटिनम हैं.
पैलेडियम का दामों में 1998 से अब तक 500% से ज्यादा का उछाल आया है. इससे आगे सिर्फ रोडियम है, जिसका दाम 4000% बढ़ा है.
इसे दुनिया की 4 सबसे कीमती धातुओं की श्रेणी में रखा जाता है. 2019 की शुरुआत से 2020 की शुरुआत के बीच इसके दामों में 63% का उछाल आया था. जबकि इस बीच सोना सिर्फ 17% महंगा हुआ था.
वर्तमान में इसका दाम 1 लाख 66 हजार प्रति औंस (28 ग्राम से कुछ अधिक) से भी ज्यादा है, जबकि वर्तमान में सोने के एक औंस का दाम 1 लाख 39 हजार ही है.
पैलेडियम की कीमत तेजी से बढ़ने के पीछे का कारण इसकी बढ़ती हुई मांग को माना जाता है. इसकी मांग बढ़ने की वजह पूरी दुनिया में सरकारों का गाड़ियों में प्रदूषण नियमों को सख्त करना रहा है. विशेष रूप से चीन में इसकी मांग बढ़ी है. ऑटो इंडस्ट्री में इस धातु की मांग बहुत ज्यादा है.
तकरीब 85 प्रतिशत पैलेडियम का इस्तेमाल कारों के एक्जास्टस में होता है. ये जहरीले प्रदूषणकारी तत्वों कम नुकसानदायक बनाने में मदद करता है.
पैलेडियम, पेट्रोल और हाइब्रिड गाड़ियों के एक्जास्ट्स में इस्तेमाल होने वाले कैटेलिस्ट बनाने के लिए होता है. इसके अलावा इसे इलेक्ट्रॉनिक्स, डेंटिस्ट्री, जुलरी में भी इस्तेमाल किया जाता है.
दुनियाभर में सप्लाई होने वाले पैलेडियम के 40 प्रतिशत हिस्से का उत्पादन दक्षिण अफ्रीका में होता है.
दरअसल पैलेडियम का उत्पादन बहुत कम है और इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. रूस और दक्षिणी अफ्रीकी देशों पर इसके उत्पादन का बहुत दबाव है. धातु की तेजी से बढ़ती कीमतों ने उत्पादक देशों को भी हैरान किया है.
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