...तो क्या पनगढ़िया के वक्त से पहले पद छोड़ने की ये थी वजह?

...तो क्या पनगढ़िया के वक्त से पहले पद छोड़ने की ये थी वजह?
विश्व बैंक रैंकिंग की तुलना में कारोबार के लिए अधिक आकर्षक है भारत: पनगढ़िया

पनगढ़िया के अचानक पद छोड़ने से कई सवाल पैदा हो गए हैं.

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प्रतिमा शर्मा

कोलंबिया यूनिवर्सिटी से चुनकर नरेंद्र मोदी ने अरविंद पनगढ़िया को नीति आयोग का वाइस चेयरमैन बनाया था. पनगढ़िया के अचानक पद छोड़ने से कई सवाल पैदा हो गए हैं. हालांकि उनके अचानक इस्तीफा देने की क्या वजह है, इस बात का पता नहीं चल पाया है. लेकिन पनगढ़िया के पिछले कुछ बयानों को देखें तो उनके पद छोड़ने की वजह का अंदाजा लगाया जा सकता है.

सरकार और नीति निर्माताओं के बीच मतभेद की एक अहम वजह है कि सरकार लोकप्रिय नीतियों को बढ़ावा देना चाहती है जबकि अर्थशास्त्रियों का फोकस विकास पर होता है.



विचारों की जंग 
पनगढ़िया एक पूंजीवादी विचार पर चलने वाले शख्स थे. और ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने सरकार की नीति से उलट अपनी राय दी. कुछ ऐसा ही जीवन रक्षक दवाओं को लेकर हुआ.

नीति आयोग लगातार यह मांग कर रहा था कि दवाओं की कीमतों को बाजार के हवाले कर दिया जाए. लेकिन सरकार यह करने के बिल्कुल मूड में नहीं थी. नीति आयोग लगातार इस बात की कोशिश कर रहा था कि दवाओं की कीमतें तय करने का अधिकार बाजार के हवाले कर दिया जाए.

कीमतें बाजार के हवाले होने का सीधा मतलब है कि आम लोगों पर बोझ बढ़ता. बाजार में जितनी मांग बढ़ेगी उसके हिसाब से कीमतें घटेंगी-बढ़ेंगी. हालांकि सरकार ने नीति आयोग की यह मांग नहीं मानी.

क्या है मतभेद की वजह?

यह सिर्फ एक घटना नहीं थी. ऐसे कई मौके आए हैं जब सरकार ने नीति आयोग की राय मानने से इनकार कर दिया था. अभी कुछ दिनों पहले ही नीति आयोग ने कहा था कि सरकार को स्कूल और अस्पतालों में कोई दखल नहीं देना चाहिए. नीति आयोग की यह बात मानने का सीधा मतलब यह था कि सभी स्कूलों और अस्पतालों का निजीकरण कर दिया जाए.

इसके बात के भी दो पहलू हो सकते हैं. पहली बात यह कि अगर निजीकरण होता है तो आम आदमी के लिए शिक्षा और इलाज दोनों महंगा हो जाएगा. दूसरी बात यह है कि इससे गुणवत्ता सुधरती है. लेकिन भारत जैसे देश में जहां ज्यादातर लोगों के लिए रोजी रोटी का इंतजाम करना मुश्किल है वहां निजीकरण के आइडिया पर काम करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

हाल ही में एयर इंडिया के निजीकरण को लेकर अरविंद पनगढ़िया का बयान आया था. उन्होंने कहा था कि जितनी जल्दी हो सके एयर इंडिया के निजीकरण का काम पूरा होना चाहिए.

कहां जाएंगे पनगढ़िया

माना जा रहा है कि पनगढ़िया एकबार फिर शिक्षा के क्षेत्र में लौट सकते हैं. इनको करीब से जानने वालों का मानना है कि पनगढ़िया का पहला प्रेम पढ़ाना है. यही वजह है कि उन्होंने इस्तीफा दिया है. नीति आयोग उपाध्यक्ष बनने से पहले पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में कोई भी व्यक्ति रिटायर नहीं होता है. वह जीवनभर अपनी स्वास्थ्य क्षमता के अनुसार अध्यापन कार्य कर सकता है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अरविंद पनगढ़िया को दो बार पहले भी वापस लौटने के लिए नोटिस भेजा गया था.

इन नोटिस में पूछा गया था, 'क्या वह यूनिवर्सिटी में आगे अध्यापन कार्य नहीं करना चाहते हैं. वह लंबे समय से अपने पद से अनुपस्थित हैं. लिहाजा वहां छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है. नोटिस में यह लिखा गया है कि वह यह निर्णय करें कि आगे वह छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं या नहीं. अगर वह अध्यापन के लिए इच्छुक नहीं है तो अपना इस्तीफा दे दें.' उम्मीद है कि पनगढ़िया एकबार फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी लौट जाएंगे.

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