जयललिता को इलाज के लिए ले जाना चाहता था US, पर अपोलो ने कर दिया मना: पन्नीरसेल्वम

जयललिता को इलाज के लिए ले जाना चाहता था US, पर अपोलो ने कर दिया मना: पन्नीरसेल्वम
पन्नीरसेल्वम - फाइल फोटो

पन्नीरसेल्वम ने कहा कि जब उन्होंने जयललिता को अमेरिका ले जाने के लिए एयरलिफ्ट करने के लिए कहा तो अस्पताल के अधिकारियों ने उनसे कहा, "आप ऐसे बोल रहे हैं जैसे आपको हम पर भरोसा नहीं है."

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  • Last Updated: September 26, 2018, 11:27 PM IST
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पूर्णिमा मुरली
तमिलनाडु
के उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने दावा किया कि उन्होंने अपोलो अस्पताल के अधिकारियों से पूछा था कि क्या दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए अमेरिका ले जा सकते हैं. तब अस्पताल ने इस संभावना से इनकार कर दिया था और उनकी सेहत सुधरने का भरोसा दिया था.

एआईडीएमके ने विपक्षी पार्टियों डीएमके और कांग्रेस के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया था. इस रैली में पन्नीरसेल्वम ने ये बातें कही. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जयललिता के पास अस्पताल में जाने नहीं दिया गया.

पन्नीरसेल्वम ने कहा कि जब उन्होंने जयललिता को अमेरिका ले जाने के लिए एयरलिफ्ट करने के लिए कहा तो अस्पताल के अधिकारियों ने उनसे कहा, "आप ऐसे बोल रहे हैं जैसे आपको हम पर भरोसा नहीं है."
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उन्होंने कहा कि अस्पताल को मनाने के लिए उन्होंने काफी आग्रह भी किया. अधिकारियों से उन्होंने यह तक कहा कि "अगर अम्मा का अस्पताल में निधन हो जाता है तो एआईएडीएमके के कार्यकर्ता अस्पताल पर हमला कर देंगे और हंगामा खड़ा हो जाएगा. इस धमकी के बाद भी वे नहीं माने."

उन्होंने कहा, "जब मैंने उनसे ये बातें कही तो मैं सिर्फ उन्हें डराना चाहता था, क्योंकि अगर अम्मा स्वस्थ होतीं और पोएस गार्डन लौट आई होतीं तो सब कुछ अच्छा होता."

बता दें कि 22 सितंबर 2016 को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जयललिता को भर्ती कराया गया था. 12 अक्टूबर 2016 को उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियां उस वक्त पन्नीरसेल्वम को सौंपी गई थीं. एआईडीएमके की नेता जयललिता ने 4 दिसंबर को अपनी आखिरी सांस ली थी.

पन्नीरसेल्वम ने जयललिता से न मिलने देने के लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 74 दिन अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें बीमार जयललिता से एक बार भी नहीं मिलने दिया गया.

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पन्नीरसेल्वम ने कहा, "जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं अम्मा को बचा सकता था. मैंने उनके साथ 32 साल काम किया. मैं उनसे पूछता हूं क्या मुझे उन्हें देखने का मौका भी दिया गया? मैं हर सुबह अपोलो जाता था और दिन खत्म होने तक वहां रहता. मेरी पत्नी रोज मुझसे पूछती थी कि क्या मैं अम्मा से मिला. मैंने हमेशा जवाब दिया- नहीं. वो मुझसे पूछती कि तो क्यों मैं पूरा दिन अस्पताल में बिताता हूं जबकि मुझे अंदर जाने नहीं दिया जाता."

फरवरी 2017 को जब वीके शशिकला के मुख्यमंत्री बनने की पूरी तैयारी थी. तब जयललिता का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने मीडिया को संबोधित कर अम्मा के निधन से जुड़ी अफवाहों को दूर करने की कोशिश की. इसमें ब्रिटेन के डॉक्टर रिचर्ड बीले भी शामिल थे.

जब उनसे जयललिता को एयरलिफ्ट करने के बारे में पूछा गया तो डॉ बीले ने कहा, "मरीज को ट्रांसफर करने के विषय पर बातचीत हुई थी, लेकिन ऐसे मामलों में जोखिम हमेशा बना रहता है."

हालांकि, बाद में ये सामने आया कि वह खुद ही देश से बाहर इलाज के लिए नहीं जाना चाहती थीं. डॉक्टरों ने दावा किया कि यह उनकी ही इच्छा थी.

पन्नीरसेल्वम ने शशिकला के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और जयललिता के निधन की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी. सितंबर 2017 से रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अगुवाई में एक कमिटी इसकी जांच कर रही है.

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