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India Republic Day: जब युद्ध के मैदान से उसी ड्रेस में सीधे राजपथ पर पहुंची थी कमांडो की टुकड़ी

1971 में हुए इस युद्ध में पैरा कमांडो को हवाई जहाज से कुदाकर बांग्लादेश में उतारा गया था. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
1971 में हुए इस युद्ध में पैरा कमांडो को हवाई जहाज से कुदाकर बांग्लादेश में उतारा गया था. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

India Republic Day: कमांडो (Commando) की यह टुकड़ी किसी दूसरी पोस्ट पर लड़ाई के लिए निकली थी, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि इस टुकड़ी को राजपथ (Rajpath) पहुंचने का हुक्म दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2021, 11:31 AM IST
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नई दिल्ली. आज हम 72वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) मना रहे हैं, लेकिन साल 1972 का गणतंत्र दिवस भी हमारे लिए कई मायनों में बेहद खास था. एक महीने पहले ही हमने बांग्लादेश (Bangladesh) की शक्ल में पाकिस्तान (Pakistan) के दो टुकड़े किए थे. वहीं बांग्लादेश में युद्ध करने के बाद उसी ड्रेस में कमांडो (Commando) की टुकड़ी सीधे 26 जनवरी को राजपथ पर मार्च करने पहुंची थी. यह पहला मौका था जब कोई टुकड़ी युद्ध की ड्रेस पहनकर राजपथ के मार्च में शामिल हुई थी. इस बारे में न्यूज18 हिंदी को और ज़्यादा बताया उस युद्ध के हीरो कर्नल (रिटायर्ड) एसएम कुंजरू ने.

एसएम कुंजरू ने कहा, 'बांग्लादेश की मदद के लिए पैरा कमांडो की टुकड़ी पैराशूट की मदद ढाका में उतारी गई थी. कई दिन की लड़ाई के बाद बांग्लादेश को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराया गया. इसी दौरान सूचना मिली कि राजस्थान के गंगानगर के पास लोंगोवाला पोस्ट पर पाकिस्तान की एक टुकड़ी ने हमला कर दिया है. यह खबर मिलते ही ढाका में जो भी वाहन मिला उसमें बैठकर करीब 600 लोगों की टुकड़ी ढाका के बाहर आ गई. यहां से हमें एक ट्रेन में बैठाया गया. इस ट्रेन का नाम रखा गया व्हाइट हॉट. यह कोयले के इंजन वाली ट्रेन थी.'

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कुंजरू ने कहा, 'बिना रुके ट्रेन लगातार दौड़ती रही. ट्रेन का ड्राइवर बहुत जाबांज़ था. अभी हम गंगानगर पहुंचने ही वाले थे कि आला अफसरों से सूचना मिली कि लोंगोवाला पोस्ट से पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया गया है. अब हमें गंगानगर पहुंचने के बजाए दिल्ली पहुंचने का आदेश मिला.'

दिल्ली आकर पता चला कि यहां रहकर करीब एक महीने तक हमें राजपथ पर होने वाली परेड की तैयारी करनी है. और इस तरह से पहली बार सेना की किसी टुकड़ी ने युद्ध वाली ड्रेस में राजपथ पर परेड की थी.'
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