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पारा शिक्षकों ने भरी हेमंत सरकार के खिलाफ हुंकार, 15 मार्च से होगा विधानसभा का घेराव

पारा शिक्षकों ने बढ़ाई हेमंत सरकार की चिंता, 15 से विधानसभा को होगा घेराव

पारा शिक्षकों ने बढ़ाई हेमंत सरकार की चिंता, 15 से विधानसभा को होगा घेराव

रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को पारा शिक्षकों ने हेमंत सरकार के खिलाफ हुंकार भरी है. उन्होंने सरकार के सामने स्थायीकरण और वेतनमान की पुरानी मांग को फिर से दोहराया है. इसे पूरा करने के लिए सरकार को 10 मार्च तक का अल्टीमेटम भी दिया गया है.

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रांची. झारखंड विधानसभा ( Jharkhand Legislative Assembly) के बजट सत्र की शुरुआत के साथ सरकार की पारा शिक्षकों (Para teacher ) ने परेशानी बढ़ा दी है. स्थायीकरण और वेतनमान (Pay Scale ) को लेकर शिक्षकों का मुद्दा और उनके मांगों के गूंज को मोरहाबादी मैदान से विधानसभा तक पहुंचाने की कोशिश शुरू हो चुकी हैं. रांची के मोराबादी मैदान में रविवार को करीब ढाई सौ की संख्या में पारा शिक्षकों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए सरकार के सामने स्थायीकरण और वेतनमान की पुरानी मांग को फिर से दोहराया है. इसे पूरा करने के लिए सरकार को 10 मार्च तक का अल्टीमेटम भी दिया गया है.  पारा शिक्षकों ने कहा कि 10 मार्च तक मांगे पूरी नहीं होने पर 15 मार्च से वह विधानसभा का घेराव करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर देंगे.

अपनी मांगों को लेकर पारा शिक्षकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. रांची के चान्हो से आंदोलन के लिए मोरहाबादी मैदान पहुंचीं मीना कुमारी ने सीएम को अपना वचन याद दिलाते हुए कहा कि राजा तो वचन निभाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रदेश के राजा हैं.  राजा अपने वादे से मुकरते नहीं हैं, लेकिन पारा शिक्षकों से किये अपने वादे से सीएम साफ मुकरते नजर आ रहे हैं. यहां जुटे शिक्षकों ने कहा कि वह अपने अधिकारों को मांग रहे हैं. सरकार ने इसका वादा किया था. इसे हम लेकर रहेंगे.

2003 से उठ रही है स्थायीकरण और वेतनमान की मांग
दरअसल, राज्यभर के 65 हजार पारा शिक्षक 2003 से ही स्थायीकरण और वेतनमान की मांग कर रहे हैं. पारा शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए पिछले विधानसभा चुनाव में इसे खूब भुनाया गया था. गठबंधन सरकार में शामिल जेएमएम और कांग्रेस ने बकायदा इसे अपने मेनिफेस्टो में भी शामिल किया.  हेमंत सोरेन ने सत्ता में आते ही 3 महीने के भीतर वेतनमान और स्थाईकरण का भरोसा पारा शिक्षकों को दिया था. एकीकृत पारा शिक्षक के राज्य कमेटी सदस्य ऋ षिकेश पाठक ने कहा कि 2003 से ही हर सरकार ने पारा शिक्षकों को छलने का ही काम किया है. उन्होंने कहा कि पारा शिक्षक स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ अन्य कामों को भी अंजाम देते हैं. लेकिन उन्हें आज भी हाशिए पर रखा जा रहा है. राज्यभर के 3 हजार अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को पिछले 22 माह से मानदेय नहीं मिला है. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. बताया गया है कि विधानसभा के हर सत्र के दौरान राज्य भर में पारा शिक्षकों की मांगों से जुड़ा मुद्दा गूंजता है, लेकिन बाद में सरकारी नियमावली की पेंच में गुम हो जाता है. अब एक बार फिर पारा शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के लिए तैयार नजर आ रहे हैं.
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