ऐसे प्लाज्मा थेरेपी से आम जनता की जान बचा रहे हैं अर्धसैनिक बल के जवान

पिछले दस दिनों में 18 जवानों ने अपना प्लाज्मा देकर इतने ही लोगों की जान बचाई है
पिछले दस दिनों में 18 जवानों ने अपना प्लाज्मा देकर इतने ही लोगों की जान बचाई है

पिछले दस दिनों में 18 जवानों ने अपना प्लाज्मा (Plasama) देकर इतने ही लोगों की जान बचाई है. ये जवान सीआईएसएफ (CISF), बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF) से हैं जबकि अन्य बल आईटीबीपी (ITBP), एसएसबी (SSB) में भी कई ठीक हुए जवानों ने अपना प्लाज्मा दान करने की सहमति जताई है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) को हरा चुके देश के अर्धसैनिक बलों (Paramilitary) के जवान अब जरूरतमंद कोरोना संक्रमित मरीजों को अपना प्लाज्मा (Plasama) दान कर उनकी जान बचा रहे हैं. पिछले दस दिनों में 18 जवानों ने अपना प्लाज्मा देकर इतने ही लोगों की जान बचाई है. ये जवान सीआईएसएफ (CISF), बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF) से हैं जबकि अन्य बल आईटीबीपी (ITBP), एसएसबी (SSB) में भी कई ठीक हुए जवानों ने अपना प्लाज्मा दान करने की सहमति जताई है. दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) पर तैनात कांस्टेबल श्रीकांत ने पिछले हफ्ते अपना प्लाज्मा डोनेट कर 56 साल के एक शख्स की जान बचाई है. उन्हें 29 अप्रैल को कोरोना संक्रमण हुआ था और ठीक होने के बाद उन्होनें अपनी मर्जी के ये कदम उठाया. इसी तरीके से सीआईएसएफ दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात और कोरोना को मात दे चुके चार जवानों ने अपना प्लाज्मा दान देकर जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई है.

सीआईएसएफ में कांस्टेबल श्रीकांत का कहना है कि देश की सेवा के साथ-साथ है यह काम भी बेहद जरूरी है और ठीक होते ही उन्होंने यह निर्णय किया कि प्लाज्मा डोनेट करना है सबसे उचित खत्म होगा अगर कोरोना  के खिलाफ लड़ाई में और मजबूत होना है. दरअसल अर्धसैनिक जवानों में जितनी तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है उतनी ही तेजी से जवान ठीक भी हो रहे हैं. इन फोर्स में कोरोना से ठीक होने की दर सत्तर फीसदी है जो कि राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है. कोरोना से ठीक होने के बाद अभी तक करीब 150 अर्धसैनिक बलों के जवानों ने अपना प्लाज्मा दान करने पर समहति जताई है, जिसमें से 18 जवानों ने अपना प्लाज्मा डोनेट कर भी दिया है.

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साथियों को भी प्रेरित कर रहे जवान
दान करने वालों में से बीएसएफ के 9 जवान, सीआरपीएफ के 5 जवान और सीआईएसएफ के 4 जवान शामिल हैं. बीएसएफ के ठीक हुए जवान कहते हैं कि उनके इस कदम से उनको और ज्यादा संतुष्टि मिलेगी कि देश के लिए कुछ किया गया है और इसी तरीके से वह अपने अन्य साथियों को भी प्रेरित करेंगे.



कोरोना को मात दे चुके इन जवानों के उत्साह को देखते हुए अर्धसैनिक बलों ने आईजी स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की है जो प्लाज्मा डोनेशन की प्रक्रिया का संचालन करें और स्थानीय अस्पतालों से संपर्क करे जिनके यहां मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत है.
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