संसद से 'माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक' मंजूर, देश को वैश्विक मध्यस्थता केंद्र बनाना है मकसद

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम भारत को मध्यस्थता के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. सरकार का मानना है कि इससे ढांचागत विकास के लिये पूंजी की जरूरत को भी पूरा करने में मदद मिलेगी.

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Updated: August 1, 2019, 11:07 PM IST
संसद से 'माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक' मंजूर, देश को वैश्विक मध्यस्थता केंद्र बनाना है मकसद
'मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2019' का मकसद संस्थागत मध्यस्थता के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त व्यवस्था बनाना है.
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Updated: August 1, 2019, 11:07 PM IST
संसद ने 'मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2019' (Mediation and Reconciliation Amendment Bill, 2019) को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक का मकसद संस्थागत मध्यस्थता के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त व्यवस्था बनाना है. साथ ही इसका उद्देश्य भारत को संस्थागत मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र बनाना भी है. सरकार ने राज्यसभा से पारित विधेयक में कुछ संशोधन लाने का विचार किया था, लेकिन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पर तव्वजो नहीं दी. उन्हें लगा कि मध्यस्थों पर निर्णय लेने के लिये परिषद के पास पर्याप्त अधिकार हैं.

भारतीय माध्यस्थम परिषद करेगा मध्यस्थता केंद्रों की ग्रेडिंग

लोकसभा में भी विधेयक पारित होने के बाद रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि यह विधेयक राज्यसभा में नहीं जाएगा, क्योंकि मैंने संशोधनों पर जोर नहीं दिया है. 'मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2019' पर चर्चा का जवाब देते हुए विधि व न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विधेयक में भारतीय माध्यस्थम परिषद बनाने का प्रावधान है, जो देश में मध्यस्थता केंद्रों की ग्रेडिंग करेगा. यह ग्रेडिंग बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, परफॉर्मेंस, क्वालिटी और समयबद्धता के आधार पर होगी.

मध्यस्थ के रूप में अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का है प्रावधान 

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस ग्रेडिंग के बाद भी दूसरे स्तर की पड़ताल और छानबीन की व्यवस्था होगी. मध्यस्थ के रूप में जजों के अलावा वकील, वैज्ञानिक, बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ, आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञ को भी लिए जाने का प्रावधान किया गया है. नियुक्ति में सरकार की ओर से पक्षपात होने की कुछ सदस्यों की आशंकाओं को दूर करते हुए प्रसाद ने कहा, 'यह सोचना सही नहीं है कि सरकार जो भी करेगी, वह गलत ही करेगी. हम देश चलाते हैं और संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं.'

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में आर्थिक विवादों के निपटान के पुख्ता इंतजाम होने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को भी बढ़ावा मिलेगा.


भारत को मध्यस्थता के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है सरकार 
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कानून मंत्री ने कहा कि हम भारत को मध्यस्थता के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. सरकार का मानना है कि इससे ढांचागत विकास के लिये पूंजी की जरूरत को भी पूरा करने में मदद मिलेगी. भारत में आर्थिक विवादों के निपटान के पुख्ता इंतजाम होने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे पूंजी आधारित ढांचागत विकास कार्यों को गति मिलेगी. परिषद ऐसी रूपरेखा तैयार करेगी कि भारत संस्थागत मध्यस्थता का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बने. यहां भी सिंगापुर, लंदन की तरह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के मामले आएं.

बिल का मकसद है सुविधाएं और प्रशासकीय सहयोग उपलब्ध करना 

विधेयक का मकसद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मध्यस्थता केंद्र संचालित करने के एक प्रमुख संस्थान के तौर पर खुद को विकसित करने के लिए सुधार लाना है. साथ ही इसका मकसद मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही के लिए सुविधाएं व प्रशासकीय सहयोग उपलब्ध करना है. इसके जरिये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मान्यता प्राप्त पंचों, मध्यस्थों, सुलहकारों, सर्वेक्षकों, जांचकर्ताओं के पैनल बनाने तथा पेशेवर अंदाज में अंतरराष्ट्रीय व घरेलू मध्यस्थताओं और सुलह के संचालन को सुगम बनाना है.

कम खर्चीली और समयबद्ध सेवाएं प्रदान कराना है बिल का मकसद 

इसका मकसद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता और सुलह के संचालन के लिए कम खर्चीली और समयबद्ध सेवाएं प्रदान करना है. साथ ही वैकल्पिक विवाद समाधान और संबंधित मामलों के क्षेत्र में अध्ययन को प्रोत्साहित करना भी इसका काम होगा. इसके अलावा यह झगड़ों के निपटारे की व्यवस्था में सुधारों को प्रोत्साहित भी करेगा. इसके जरिये वैकल्पिक विवाद समाधान को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय समाजों, संस्थानों और संगठनों के साथ सहयोग करने की बात भी कही गई है.

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First published: August 1, 2019, 11:03 PM IST
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