मानसून सत्र: कर्मचारियों, पत्रकारों की रोजाना एंटीजन जांच अनिवार्य

Parliament Monsoon Session: कोरोना वायरस महामारी की छाया में सोमवार से शुरू हुए 18 दिनों के मानसून सत्र में कई चीजें पहली बार होती दिख रहीं हैं. इसमें बिना किसी छुट्टी के अलग अलग पाली में दोनों सदनों की बैठकें हो रही.
Parliament Monsoon Session: कोरोना वायरस महामारी की छाया में सोमवार से शुरू हुए 18 दिनों के मानसून सत्र में कई चीजें पहली बार होती दिख रहीं हैं. इसमें बिना किसी छुट्टी के अलग अलग पाली में दोनों सदनों की बैठकें हो रही.

Parliament Monsoon Session: कोरोना वायरस महामारी की छाया में सोमवार से शुरू हुए 18 दिनों के मानसून सत्र में कई चीजें पहली बार होती दिख रहीं हैं. इसमें बिना किसी छुट्टी के अलग अलग पाली में दोनों सदनों की बैठकें हो रही.

  • भाषा
  • Last Updated: September 18, 2020, 10:29 PM IST
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नई दिल्ली. सांसदों (Parliament) के कोरोना वायरस (Coronavirs) से संक्रमित होने के नए मामलों के आने के बाद अब नए प्रोटोकॉल के मुताबिक, संसद परिसर (Parliament Premisis) में प्रवेश करने वाले वहां के सभी कर्मचारियों और पत्रकारों की रोजाना एंटीजन जांच (Antigen Test) अनिवार्य कर दी गई है. संसद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों सदनों के सदस्य एक निश्चित अंतराल के बाद आरटी-पीसीआर जांच (RT-PCR Test) करवा रहे हैं. सांसद चाहे जितनी बार, आरटी-पीसीआर जांच करा सकते हैं.

संसद की कार्यवाही का प्रेस दीर्घा से कवरेज करने वाले पत्रकारों के पास भी आरटी-पीसीआर जांच कराने के विकल्प खुले हैं. यह जांच 72 घंटे के लिए मान्य है. चूंकि आरटी-पीसीआर जांच की रिपोर्ट आने में देरी लगती है, इसलिए एंटीजन जांच रोज किया जाना अनिवार्य कर दिया गया हैं. अपने संबंधित मंत्रियों के साथ संसद पहुंचने वाले अधिकारियों को भी 72 घंटे के भीतर हुई आरटी-पीसीआर जांच की अपनी रिपोर्ट दिखानी होगी.

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वैंकेया नायडू ने की सांसदों से सावधानी बरतने की अपील
वहीं राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि परीक्षा हॉल में पर्चियों के लेन-देन की अनुमति नहीं है लेकिन कोविड-19 सुरक्षा उपायों के मद्देनजर उच्च सदन में सदस्य एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए ऐसा कर सकते हैं. नायडू ने उच्च सदन में सदस्यों को सलाह दी कि वे बैठक शुरू होने के बाद किसी भी स्पष्टीकरण के लिए सदन में बैठे अधिकारियों के पास नहीं आएं, साथ ही वे एक दूसरे सदस्यों की सीट पर भी नहीं जायें. अगर कोई मुद्दा जरूरी हो तो अपना ‘स्लिप’ (पर्ची) भेज सकते हैं.



नायडू ने कहा, ‘‘सदन के सत्र में होने पर किसी भी सदस्य से टेबल कार्यालय तक नहीं आने की उम्मीद की जाती है ... सदस्यों से अनुरोध है कि वे अन्य सदस्य की सीट पर नहीं जाएं और उनके कानों के पास झुककर बातचीत नहीं करें. कृपया इससे बचें. यदि आपको कोई संदेश भेजना है तो पर्ची भेजें. ऐसा परीक्षा हॉल में करने की अनुमति नहीं है, लेकिन यहां अनुमति है.’’

नायडू की इस टिप्पणी पर सदस्य अपनी हंसी नहीं रोक सके.

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सुरक्षा मानदंडों का होना चाहिए पालन
जब एक सदस्य ने मजाकिया लहजे में पूछा कि क्या वे एक कप चाय के लिए आ सकते हैं, तो नायडू ने कहा कि वे अनौपचारिक रूप से पर्चियां भेज सकते हैं और वह इस मुद्दे को यथासंभव संबोधित करने का प्रयास करेंगे. उन्होंने सभी सांसदों को सभापति के कार्यालय में नहीं आने की भी सलाह दी और कहा कि हालांकि उन्हें लोगों से मिलने में अच्छा लगता है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सुरक्षा मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए.

कोरोना वायरस महामारी की छाया में सोमवार से शुरू हुए 18 दिनों के मानसून सत्र में कई चीजें पहली बार होती दिख रहीं हैं. इसमें बिना किसी छुट्टी के अलग अलग पाली में दोनों सदनों की बैठकें हो रही हैं और नकारात्मक कोविड-19 रिपोर्ट रखने वालों को संसद में प्रवेश देना और इसके अलावा मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और प्रह्लाद पटेल (Prahlad Patel) कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. दोनों ने संसद के चालू सत्र में हिस्सा लिया है. 14 सितंबर को संसद की शुरुआत से पहले हुई जांच में भी कई सांसद कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे. उन्हें संसद की कार्यवाही से दूर रहने की सलाह दी गई है.
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