मानसून सत्र : विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने बदले तेवर, सांसद लिखित में पूछ सकेंगे सवाल

मानसून सत्र : विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने बदले तेवर, सांसद लिखित में पूछ सकेंगे सवाल
टीएमसी ने सरकार पर बोला हमला (फाइल फोटो)

संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान सांसद अब लिखित में सवाल पूछ सकेंगे, जिसका जवाब भी लिखित में ही मिलेगा. हालांकि सरकार के इस फैसले पर विपक्ष अब संतुष्ट नहीं नजर आ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2020, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में प्रश्नकाल को हटाए जाने को लेकर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने कुछ बदलाव किया है. सरकार अब सीमित प्रश्नकाल (Question Hour) कराने पर सहमत हो गई है. मानसून सत्र के दौरान सांसद अब लिखित में सवाल पूछ सकेंगे, जिसका जवाब भी लिखित में ही मिलेगा. हालांकि सरकार के इस फैसले पर विपक्ष अब भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. गुरुवार को सत्र से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया गया है. जिसमें कहा गया कि इस बार राज्यसभा में प्रशनकाल नहीं होगा. ऐसे में संसद के सभी सदस्य लिखित में अपना सवाल पहले दे सकते हैं, जिनका लिखित में जवाब मिलेगा.

संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने बुधवार को कहा कि सरकार किसी चर्चा से नहीं भाग रही. सरकार अतारांकित प्रश्न लेने को तैयार है. इसके बारे में सभी विपक्षी दलों को पहले ही बताया गया था और ज्यादातर इस पर राजी थे. अतारांकित ऐसे प्रश्न होते हैं, जिनका मंत्री केवल लिखित जवाब देते हैं, जबकि तारांकित प्रश्न में प्रश्न पूछने वाले को मौखिक और लिखित दोनों उत्तर का विकल्प दिया जाता है.

अलग-अलग शिफ्ट में चलेंगे दोनों सदन
बता दें कि कोरोना संकट के बीच इस बार संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है, जो 1 अक्टूबर तक लगातार चलेगा. इस बार दोनों सदन अलग-अलग शिफ्ट में चलेंगे, ताकि नियमों का पालन हो सके. लेकिन प्रश्नकाल और शून्य काल रद्द करने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमला कर रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार सवाल पूछने के सांसदों के अधिकारों से उन्हें वंचित करना चाहती है. उनका कहना है ऐसा इसलिए किया गया है ताकि विपक्षी सदस्य अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी पर सरकार से सवाल न पूछ पाएं.
टीएमसी ने सरकार पर बोला हमला


तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इस संबंध में ट्वीट किया, ‘सांसदों को संसद में प्रश्न काल वाले सवाल 15 दिन पहले जमा करने होते हैं. सत्र की शुरुआत 14 सितंबर से हो रही है. इसलिए प्रश्न काल रद्द हो गया? विपक्षी सांसदों का सवाल पूछने का अधिकार चला गया. 1950 के बाद पहली बार जब संसद के कामकाज के घंटे पहले वाले ही हैं तो प्रश्न काल क्यों रद्द किया गया? लोकतंत्र की हत्या के लिए महामारी का बहाना.’ उन्होंने इस ओर इशारा किया कि प्रश्न काल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इस दौरान उठाए गए मुद्दों का जवाब संबंधित मंत्री देते हैं जबकि शून्य काल में ऐसा नहीं है. तृणमूल सांसद ने कहा कि प्रश्न काल के दौरान सत्ता पक्ष के द्वारा भी सवाल उठाए जाते हैं और इस अवधि को निलंबित करने का कदम उठाकर सरकार अपने सांसदों को भी सवाल पूछने का अवसर नहीं दे रही है.



‘मुद्दे उठाने के अधिकार में न की जाए कटौती’
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पिछले हफ्ते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि संसद सत्र में सदस्यों के प्रश्न पूछने और मुद्दे उठाने के अधिकार में कटौती नहीं की जाए. कटौती करना जन प्रतिनिधियों के हित में नहीं होगा.
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