चीन से तनाव के बीच 28 अक्‍टूबर को लद्दाख जाएगी संसदीय समिति, अग्रिम चौकियों का लेगी जायजा

28 अक्‍टूबर को लद्दाख जाएगी संसदीय समिति (फोटो साभार- ANI)
28 अक्‍टूबर को लद्दाख जाएगी संसदीय समिति (फोटो साभार- ANI)

Parliamentary Committee Ladkah Visit: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय समिति को दौरे की अनुमति दे दी है. दरअसल, अधीर रंजन चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा स्‍पीकर को एक पत्र लिखकर लद्दाख क्षेत्र का दौरा करने, वहां तैनात जवानों के साथ बातचीत करने और उनके कामकाज की स्थितियों और आवश्‍यकताओं को समझने के लिए यात्रा की अनुमति मांगी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 6:25 PM IST
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नई दिल्‍ली. चीन (China) से तनाव के बीच एक संसदीय समिति (Parliamentary Committee) दो दिवसीय लद्दाख दौरे पर जाएगी. इस दौरान समित‍ि सीएजी रिपोर्ट के तहत भी जायजा लेगी जिसमें हाई अल्टीट्यूट पर काम कर रहे सैनिकों के मौसमी कपड़े, स्नो गॉगल्स की कमी का जिक्र किया था. इसके साथ ही समिति जवानों के आवास, राशन और अग्रिम चौकियों का भी जायजा लेगी. हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, इससे संबंधित अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी है. अधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्षता में पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) के सदस्य 28-29 अक्टूबर को लेह की यात्रा कर सकते हैं.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय समिति को दौरे की अनुमति दे दी है. दरअसल, अधीर रंजन चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा स्‍पीकर को एक पत्र लिखकर लद्दाख क्षेत्र का दौरा करने, वहां तैनात जवानों के साथ बातचीत करने और उनके कामकाज की स्थितियों और आवश्‍यकताओं को समझने के लिए यात्रा की अनुमति मांगी थी. यह समिति नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की उस रिपोर्ट का भी अध्‍ययन कर रही है जिसमें हाई अल्‍टीट्यूट पर काम कर रहे जवानों के मौसमी कपड़े, उपकरण और अन्‍य आवश्‍यकताओं का जिक्र किया गया था.

इससे संबंधित अधिकारियों ने कहा कि पीएसी ने 6 सितंबर को एक बैठक के दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रात के साथ जवानों के राशन और कपड़ों से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की थी. इस बैठक के दौरान ही पीएसी अध्‍यक्ष ने लद्दाख दौरे की बात कही थी. जिसके बाद उन्‍होंने लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था. पीएसी अपनी यात्रा को अंतिम रूप देने के लिए 23 अक्‍टूबर को ओम बिरला से फिर मुलाकात कर सकती है. बता दें कि फरवरी में संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में कैग ने सियाचिन और लद्दाख जैसे हाई अल्‍टीट्यूट वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों के मौसमी कपड़े, उपकरण और राशन की कमी की बात कही थी.



भारत ने सातवें दौर की सैन्य वार्ता में चीन से जल्द सैनिक पीछे हटाने को कहा
पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के समाधान के लिए भारत ने सोमवार को चीन के साथ सातवें दौर की सैन्य वार्ता में बीजिंग से अप्रैल पूर्व की यथास्थिति बहाल करने और विवाद के सभी बिंदुओं से चीनी सैनिकों की पूर्ण वापसी करने को कहा. सरकारी सूत्रों ने यह बात कही. उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में कोर कमांडर स्तर की वार्ता दोपहर लगभग 12 बजे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चुशूल क्षेत्र में भारतीय इलाके में हुई और रात साढ़े आठ बजे के बाद भी जारी रही. सीमा विवाद छठे महीने में प्रवेश कर चुका है और विवाद का जल्द समाधान होने के आसार कम ही दिखते हैं क्योंकि भारत और चीन ने बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग एक लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं जो लंबे गतिरोध में डटे रहने की तैयारी है.

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वार्ता के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि एजेंडा विवाद के सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी के लिए एक प्रारूप को अंतिम रूप देने का था. भारतीय प्रतिनिधमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव कर रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि वार्ता में चीनी विदेश मंत्रालय का एक अधिकारी भी चीनी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा है. सूत्रों ने बताया कि वार्ता में भारत ने जोर देकर कहा कि चीन को विवाद के सभी बिंदुओं से अपने सैनिकों को जल्द और पूरी तरह वापस बुलाना चाहिए तथा पूर्वी लद्दाख में सभी क्षेत्रों में अप्रैल से पूर्व की यथास्थिति बहाल होनी चाहिए. गतिरोध पांच मई को शुरू हुआ था.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों सहित चीन अध्ययन समूह (सीएसजी) ने सैन्य वार्ता के लिए शुक्रवार को भारत की रणनीति को अंतिम रूप दिया. सीएसजी चीन के बारे में भारत की महत्वपूर्ण नीति निर्धारक इकाई है.

सातवें दौर की सैन्य वार्ता शुरू होने से पहले सूत्रों ने कहा था कि भारत पैंगोंग नदी के दक्षिणी किनारे कई रणनीतिक ऊंचाइयों से भारतीय सैनिकों की वापसी की चीन की मांग का मजबूती से विरोध करेगा.

उल्लेखनीय है कि भारतीय सैनिकों ने 29 और 30 अगस्त की रात पैंगोंग नदी के दक्षिणी किनारे स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था जिससे वहां भारतीय सेना की स्थिति काफी मजबूत हो गई है. भारतीय सेना ने चीनी सेना के जवाब में सीमा पर टैंक और अन्य भारी अस्त्र-शस्त्र उतार दिए हैं तथा ईंधन, भोजन और सर्दियों में काम आने वाली चीजों की पर्याप्त व्यवस्था की है.
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