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OPINION: विपक्ष अब जो भी कहे, राज्यसभा में 11 अगस्त की घटना दुनिया ने देखी थी

OPINION: विपक्ष अब जो भी कहे, राज्यसभा में 11 अगस्त की घटना दुनिया ने देखी थी

सरकार ने हर बार बातचीत की पेशकश की. विपक्ष बीएसी की बैठक में आश्वासन देते थे, लेकिन फिर हंगामा करने लगते थे. (फाइल फोटो: PTI)

सरकार ने हर बार बातचीत की पेशकश की. विपक्ष बीएसी की बैठक में आश्वासन देते थे, लेकिन फिर हंगामा करने लगते थे. (फाइल फोटो: PTI)

Parliament Winter Session: सरकारी सूत्रों ने बताया कि सांसद करीम और देसाई ने मार्शलों का घेरा तोड़ने की कोशिश की. करीम ने एक मार्शल का गला पकड़ कर खींचने की कोशिश की. डोला सेन ने फांसी का फंदा बनाया और दूसरी महिला सांसद शांता छेत्री के गले में डाल कर घुमाया. फूलोदेवी नेताम और छाया वर्मा ने काग़ज़ फाड़े और प्रियंका चतुर्वेदी ने काग़ज़ फेंके. नासिर हुसैन ने संजय राउत को अधिकारियों पर धकेला. रिपुन बोरा ने एलईडी स्क्रीन निकालने की कोशिश की. सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) और बाजवा की घटना दस अगस्त की है इस लिए उन पर कार्रवाई नहीं की गई.

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नई दिल्ली. संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में राज्यसभा (Rajyasabha) में जो हुआ वो संसदीय परंपराओं के लिए एक काला धब्बा था. विपक्ष का एक ही मकसद था कि किसी भी कीमत पर सरकार को बिल पारित नहीं कर देना है. आलम ये था कि कोई मेज पर चढ़ा था तो कोई पेपर फेंक रहा था, कोई वीडियो बना रहा था. हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी. लेकिन जब शीतकालीन सत्र शुरू हुआ तो पहले दिन ही संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने चेयरमैन को खत लिख कर कहा कि ये शर्मनाक घटना थी इसलिए कार्रवाई करने को कहा. विपक्ष इसे अलोकतांत्रिक बता रहा है, तो सरकारी सूत्र कह रहे हैं कि सारा हंगामा पूरी दुनिया ने देखा है.

सूत्रों के मुताबिक, मानसून सत्र के पहले दिन पीएम मोदी को मंत्रियों का परिचय कराने नहीं दिया गया. रूलिंग है कि अगर मंत्रियों का परिचय नहीं होता तो वे प्रश्नों के जवाब भी नहीं दे सकते. सारे संसदीय बुलेटिन में लिखा गया कि उन सांसदों के नाम जिन्होंने सदन की कार्यवाही में बाधा डाली. सूत्रों का दावा है कि ये पहले से ही तय किया था कि यह सत्र चलने नहीं देना है. 22 जुलाई को अश्विनी वैष्णव के हाथों से पेपर छीने गए. उस दिन 24 सांसदों के नाम लिए गए थे

पहली बार संसद में देखा गया
सदन में सीटियां बजाई गईं. वीडियो रिकॉर्डिंग करके यूट्यूब पर डाला गया. चेयर पर किताब फेंकी गई. टेबल पर खड़े होकर डांस करना. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जो सांसद बोलना चाह रहे थे उनके चेहरे के सामने प्लेकार्ड लगाया गया ताकि कैमरे पर प्लेकार्ड आएं. चेयरमैन को बोलने नहीं दिया गया .

मानसून सत्र के हंगामे
सरकार ने हर बार बातचीत की पेशकश की. विपक्ष बीएसी की बैठक में आश्वासन देते थे, लेकिन फिर हंगामा करने लगते थे. 30 जुलाई, चार अगस्त, 10 और 11 अगस्त को हंगामा किया. नौ अगस्त को एक वोटिंग प्रक्रिया में साबित हुआ कि विपक्ष के पास संख्या नहीं है. हर बार सरकार चेयरमैन के पास जाती थी कि कार्यवाही हो लेकिन विपक्ष आश्वासन देता था कि अब सदन चलेगा.

11 अगस्त को चेयरमैन वेंकैया नायडू बहुत भावुक हो गए. क्षुब्ध हो गए और उनके मुताबिक विपक्ष ने झूठा आरोप लगाया कि बाहर से मार्शल लाए. एक वीडियो में साफ दिखा कि कांग्रेस की दो महिला सांसद लेडी मार्शल को खींच रही हैं. महिला मार्शल ने लिखित शिकायत दी कि उनके साथ हाथापाई हुई और वे घायल हुईं.

इन वीडियो के हवाले से सरकारी सूत्रों ने बताया कि सांसद करीम और देसाई ने मार्शलों का घेरा तोड़ने की कोशिश की. करीम ने एक मार्शल का गला पकड़ कर खींचने की कोशिश की. डोला सेन ने फांसी का फंदा बनाया और दूसरी महिला सांसद शांता छेत्री के गले में डाल कर घुमाया. फूलोदेवी नेताम और छाया वर्मा ने काग़ज़ फाड़े और प्रियंका चतुर्वेदी ने काग़ज़ फेंके. नासिर हुसैन ने संजय राउत को अधिकारियों पर धकेला. रिपुन बोरा ने एलईडी स्क्रीन निकालने की कोशिश की. सांसद संजय सिंह और बाजवा की घटना दस अगस्त की है इसलिए उन पर कारवाई नहीं की गई.

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कार्रवाई जरूरी थी
विपक्ष ने सवाल उठाए तो सरकारी सूत्रों नें बताया की अगर पिछले सत्र के हंगामे पर कार्रवाई न करते तो इसका मतलब यह नहीं कि हर सत्र के आखिर में हंगामा करो ताकि कार्यवाही न हो. सरकारी सूत्र कहते हैं कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए कभी इस तरह का हिंसक हंगामा नहीं किया. विपक्ष सांसद सदन नहीं चलने देने पर उतारू थे. अगर सख्त कार्रवाई कर संदेश नहीं दी जाता तो यही चलता रहता.

कांग्रेस राज में तो हंगामे में बिल पारित हुए. इसलिए सरकारी सूत्र कहते हैं कि क्या करें? विपक्षी खासकर कांग्रेस के सांसदों को इनके ऊपर से आदेश आ जाता है कि हाउस नहीं चलने देना है. उनका आपस का मुक़ाबला है.

राज्य सभा के नेता सदन पीयूष गोयल ने चेयरमैन को खत लिख कर विशेष समिति बनाने की मांग की. कमेटी के लिए कई बार कहा गया, लेकिन विपक्ष के कई दल तैयार नहीं हुए. चेयरमैन ने कहा कि सदन में आकर माफी मांग लें. खड़गे ने कहा कि सांसद नहीं मांगेंगे, उनकी ओर से मैं बोलूंगा. सरकार ने कहा कि इंडीविजुअल एमपी के लिए कैसे बोलेंगे? टीएमसी तो आपकी बात सुन नहीं रही.

अब आगे क्या है रास्ता
विपक्ष ने बहिष्कार की बात कही है इस पर सरकार का कहना है कि ये उनका विशेषाधिकार है. सरकारी सूत्र फिर भी कह रहे हैं कि सदन के बहिष्कार करने का फैसला विपक्ष का अपना है. अगर विपक्ष पेशकश करता है तो सरकार इस पर विचार करेगी. अगर अपने बर्ताव के लिए सांसद माफी मांगें, तो निलंबन वापस हो सकता है.

Tags: Loksabha, Monsoon Session, Parliament, Rajyasabha, Winter Session

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