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Parliament session: 12 राज्यसभा सांसद निलंबित, संसद के शेष सत्र में नहीं ले सकेंगे हिस्सा

Parliament Winter Session Live: संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा. सत्र शुरू होते ही तीनों कृषि कानून वापसी बिल पास हो गया है. तीनों कृषि कानून के विरोध में पिछले करीब एक साल से दिल्ली की सीमा पर किसान संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के डर से सरकार ने इस कानून को वापस लिया.

  • News18Hindi
  • | November 29, 2021, 18:25 IST
    LAST UPDATED 2 MONTHS AGO
    17:50 (IST)
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लुकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि निरंकुश सरकार ने सांसदों में डर पैदा करने के लिए ऐसा कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि 2 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव लाना पूरी तरह से अवैध, गलत और नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि विपक्ष आगे की कार्रवाई पर चर्चा के लिए कल बैठक करेगा. कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर दूसरों के लिए आवाज उठाने वालों की आवाज दबाई जाती है, तो यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है.

    17:12 (IST)
    भारतीय किसान संघ के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि राष्टपति रामनाथ कोविंद को पहले कृषि कानूनों के निरस्तीकरण पर हस्ताक्षर करने दें उसके बाद हम 750 किसानों की मौत, एमएसपी और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने के लिए चर्चा करेंगे. उन्होंने कहा कि विवादित कृषि कानून एक बीमारी की तरह थे अच्छा हुआ जो इन्हें निरस्त करने का फैसला लिया गया.

    16:45 (IST)

    केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि मैं केंद्र सरकार की तरफ से तेलंगाना और पूरे देश को बताना चाहता हूं कि धान की खरीद से संबंधित नीतियों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

    16:41 (IST)

    12 सांसदों के निलंबन को लेकर अब विपक्षी दलों ने आगे के लिए अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. कल मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यलय में ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है.

    16:18 (IST)

    राज्यसभा से निलंबित कांग्रेस के सांसद रिपुन बोरा ने कहा कि सांसदों को निलंबित करना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है. यह लोकतंत्र और संविधान की हत्या है. उन्होंने आरोप लगाया कि हमें सदन में सुनवाई का मौका नहीं दिया गया. अध्यक्ष का यह फैसला एकतरफा, पक्षपाती और प्रतिशोधी है. उन्होंने कहा कि हमने पिछले सत्र में भी विरोध किया था. लेकिन, कोई हमें यह बताए कि हम गरीबों, उत्पीड़ितो और वंचितों की आवाज संसद में नहीं उठाए तो कहां उठाएं.

    16:09 (IST)
     सांसदों के निलंबन को लेकर कांग्रेस की राज्यसभा सांसद छाया वर्मा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह निलंबन पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सदन में अन्य दलों के सदस्यों ने भी हंगामा किया लेकिन अध्यक्ष ने मुझे निलंबित कर दिया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष वैसा कर रहे है जैसा पीएम मोदी चाहते हैं क्योंकि उनके पास भारी बहुमत है.

    15:40 (IST)
    राज्यसभा के 12 सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है. इनमें सीपीएम के एलाराम करीम, कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, आर बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, सीपीआई के बिनॉय विश्वम, टीएमसी की डोला सेन और शांता छेत्री और शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई शामिल हैं. 

    14:38 (IST)

    19 नवंबर 2021 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की

    29 नवंबर 2021 : संसद के दोनों सदनों ने कृषि कानून को निरस्त करने वाले कृषि विधि निरसन विधेयक, 2021 को बिना चर्चा के मंजूरी मंजूरी दी.


    14:14 (IST)
    तीनों कृषि कानून वापसी बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है. अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के डर से सरकार ने इस कानून को वापस लिया.

    13:46 (IST)

    राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'हम चाहते हैं कि कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 पर चर्चा हो. लेकिन लोकसभा में इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित कर वे (सरकार) सिर्फ ये साबित करना चाहते हैं कि वे किसानों के पक्ष में हैं.'

    नई दिल्ली. संसद का शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) आज से शुरू हो गया. सत्र शुरू होते ही तीनों कृषि कानून वापसी बिल पास (New farm Laws) हो गया. तीन कृषि कानून के विरोध में पिछले करीब एक साल से दिल्ली की सीमा पर किसान संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इससे पहले संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा योगदान दिया, कितना सकारात्मक काम हुआ, उस तराजू पर तोला जाए. न कि मापदंड ये होना चाहिए कि किसने कितना जोर लगाकर सत्र को रोका. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार हर विषय पर खुली चर्चा के लिए तैयार है. हम ये भी चाहते हैं कि संसद में सवाल भी हों और शांति भी हो.

    बता दें कि पिछले साल सितंबर महीने में केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून और आवश्यक वस्तु संशोधन कानून, 2020 बनाया था.

    यहां पढ़े संसद सत्र से जुड़े Live Updates…

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